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    भागलपुर में कस्तूरबा स्कूलों की बच्चियां सीखेंगी कंप्यूटर, 25 स्कूलों में आईसीटी लैब तैयार

    Updated: Thu, 16 Apr 2026 06:18 PM (IST)

    भागलपुर के 25 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में छात्राओं को डिजिटल शिक्षा से जोड़ने की पहल हुई है। बिहार शिक्षा परियोजना परिषद ने इन विद्यालयों में ...और पढ़ें

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    जागरण संवाददाता, भागलपुर। जिले के 25 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में पढ़ने वाली छात्राओं को डिजिटल शिक्षा से जोड़ने की दिशा में शिक्षा विभाग ने अहम पहल की है। बिहार शिक्षा परियोजना परिषद की ओर से इन विद्यालयों में आईसीटी लैब निर्माण का कार्य लगभग पूरा कर लिया गया है। अब छात्राओं को कंप्यूटर शिक्षा देने की तैयारी तेज कर दी गई है।

    इसी को लेकर गुरुवार को जिला शिक्षा सभागार में डीपीओ एसएसए बबीता कुमारी की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई। बैठक में कस्तूरबा विद्यालयों में कंप्यूटर शिक्षा शुरू करने की रूपरेखा तय की गई।

    निर्देश दिया गया कि जिन विद्यालयों से कस्तूरबा स्कूल टैग किए गए हैं, वहां कार्यरत कंप्यूटर शिक्षक या आईसीटी इंस्ट्रक्टर कस्तूरबा विद्यालयों की अंशकालिक शिक्षिकाओं को कंप्यूटर संचालन और बुनियादी तकनीकी जानकारी देंगे। इसके बाद वही शिक्षिकाएं छात्राओं को नियमित रूप से कंप्यूटर की पढ़ाई कराएंगी।

    साथ ही डीपीओ बबीता कुमारी ने कहा कि टैग विद्यालयों के कंप्यूटर शिक्षक समय-समय पर कस्तूरबा विद्यालय पहुंचकर छात्राओं को सीधे प्रशिक्षण भी देंगे। इसका उद्देश्य छात्राओं को डिजिटल दुनिया से जोड़ना और उन्हें कंप्यूटर का बेसिक ज्ञान देना है, ताकि वे आगे की पढ़ाई और प्रतियोगी दौर में पीछे न रहें।

    बैठक में संभाग प्रभारी मुकेश कुमार, आईसीटी डिस्ट्रिक्ट को- आर्डिनेटर तकि अहमद, सभी कस्तूरबा विद्यालयों के प्रतिनिधि एवं आईसीटी इंस्ट्रक्टर मौजूद थे।

    मासिक मूल्यांकन से निखरेगी बच्चियों का डिजिटल ज्ञान

    डीपीओ ने बताया कि कंप्यूटर कक्षाओं के लिए जल्द ही विशेष रूटीन तैयार किया जाएगा। इसी समय सारिणी के अनुसार छात्राओं को प्रशिक्षण दिया जाएगा। साथ ही हर माह मूल्यांकन भी कराया जाएगा, जिससे छात्राओं की सीखने की क्षमता का आकलन हो सके।

    बेहतर प्रदर्शन करने वाली छात्राओं को प्रोत्साहन स्वरूप पुरस्कृत भी किया जाएगा। आपको बता दें कि पहली बार राज्य स्तर पर कस्तूरबा विद्यालयों में आईसीटी लैब स्थापित किए जा रहे हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्र की बच्चियों को भी आधुनिक तकनीकी शिक्षा का लाभ मिलेगा।

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