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    भागलपुर में एमडीएम घोटाले में कड़ा कदम, 60 हेडमास्टरों की सैलरी से कटेगा 18 लाख, 30.93 लाख का गबन

    Updated: Fri, 27 Feb 2026 09:17 AM (IST)

    भागलपुर में मध्याह्न भोजन योजना (एमडीएम) में बच्चों की फर्जी उपस्थिति दिखाकर 30.93 लाख रुपये के गबन का मामला सामने आया है। विभाग ने दोषी पाए गए 60 प्र ...और पढ़ें

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    मध्यान्ह भोजन योजना (एमडीएम) में भागलपुर में हुआ घोटाला।

    जागरण संवाददाता भागलपुर। जिले में बच्चों की फर्जी उपस्थिति दिखाकर मध्यान्ह भोजन योजना (एमडीएम) की राशि के दुरुपयोग के मामले में अब विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है। जांच में दोषी पाए गए 60 प्रारंभिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों के खिलाफ वसूली की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। मध्यान्ह भोजन निदेशालय के निर्देश पर संबंधित प्रधानाध्यापकों की सूची स्थापना शाखा को भेज दी गई है। विभाग का निर्णय है कि बकाया राशि की वसूली सीधे उनके वेतन से की जाएगी। इसे लेकर शिक्षा विभाग में हलचल मची हुई है।

    जांच में 30 लाख से अधिक गबन उजागर

    विभागीय जांच में वर्ष 2014 से 2022 के बीच 30 लाख 93 हजार 477 रुपये के गबन का मामला सामने आया था। यह राशि बच्चों के पोषण और भोजन व्यवस्था के लिए निर्धारित थी। आरोप है कि कागजों पर छात्रों की फर्जी उपस्थिति दर्ज कर राशि निकाली गई। लगातार पत्राचार और दबाव के बाद अब तक 12 लाख 36 हजार 971 रुपये की वसूली की जा चुकी है। हालांकि 18 लाख 56 हजार 506 रुपये अब भी बकाया हैं।

    वेतन से होगी सीधी कटौती

    बकाया राशि में से 18 लाख 31 हजार 620 रुपये की वसूली सीधे संबंधित प्रधानाध्यापकों के वेतन से की जाएगी। विभाग का मानना है कि कई बार नोटिस और रिमाइंडर भेजे जाने के बावजूद संतोषजनक जवाब नहीं मिला। अधिकारियों का कहना है कि विभागीय निर्देशों की अनदेखी के बाद कठोर कदम उठाना जरूरी हो गया था। अब वेतन कटौती के माध्यम से शेष राशि वसूल की जाएगी।

    13 जिलों में भी बड़ी राशि बकाया

    केवल भागलपुर ही नहीं, बल्कि कोसी–सीमांचल और पूर्वी बिहार के 13 जिलों में भी एमडीएम योजना के तहत बड़ी राशि की वसूली लंबित है। इन जिलों में कुल 4 करोड़ 54 लाख 24 हजार 104 रुपये की वसूली होनी थी। अब तक 2 करोड़ 61 लाख 75 हजार 256 रुपये ही वसूल किए जा सके हैं। शेष 1 करोड़ 92 लाख 45 हजार 893 रुपये अभी भी बकाया हैं।

    सहरसा में सबसे अधिक बकाया

    आंकड़ों के अनुसार सबसे अधिक बकाया राशि सहरसा जिले में है। यहां 51 लाख 35 हजार रुपये की वसूली होनी है। विभागीय अधिकारी अन्य जिलों में भी वसूली प्रक्रिया तेज करने की बात कह रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि योजना में किसी प्रकार की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी, क्योंकि यह सीधे बच्चों के पोषण से जुड़ा मामला है।

    टॉप फाइव बकायेदार प्रधानाध्यापक

    फर्जी उपस्थिति दिखाकर एमडीएम राशि गबन के मामले में जिन प्रधानाध्यापकों पर सबसे अधिक बकाया है, उनमें मध्य विद्यालय सरैया की बिंदु कुमारी पर 1 लाख 31 हजार रुपये, मध्य विद्यालय चकंथु के समसुल हक पर 91 हजार 196 रुपये, मध्य विद्यालय सुकुटिया की शशिकला देवी पर 86 हजार 190 रुपये, मध्य विद्यालय कासिमपुर के नितेश कुमार गुप्ता पर 81 हजार 177 रुपये और बुनियादी मध्य विद्यालय तेलघी के आलोक राज पर 77 हजार रुपये बकाया हैं।

    1. मध्य विद्यालय सरैया- बिंदु कुमारी- एक लाख 31 हजार
    2. मध्य विद्यालय चकंथु- समसुल हक- 91196 रुपया
    3. मध्य विद्यालय सुकुटिया- शशिकला देवी- 86190 रुपया
    4. मध्य विद्यालय कासिमपुर- नितेश कुमार गुप्ता 81177 रुपए
    5. बुनियादी मध्य विद्यालय तेलघी-आलोक राज- 77 हजार

    विभाग का सख्त संदेश

    डीपीओ एमडीएम सह एसएसए बबीता कुमारी ने स्पष्ट किया कि भविष्य में इस तरह की अनियमितता पाए जाने पर और भी कठोर कार्रवाई की जाएगी।

    60 प्रधानाध्यापकों को कई बार नोटिस और रिमाइंडर भेजे गए, लेकिन राशि जमा करने में उन्होंने गंभीरता नहीं दिखाई। विभागीय निर्देशों की लगातार अनदेखी के बाद अब कठोर कदम उठाना अनिवार्य हो गया था। इसलिए अब उनके वेतन से ही राशि कटौती होगी।

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    बबीता कुमारी, डीपीओ एमडीएम सह एसएसए