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    भागलपुर में आरटीई उल्लंघन : शिक्षा विभाग ने 43 न‍िजी स्कूलों को तलब किया जवाब

    Updated: Sun, 05 Apr 2026 01:35 PM (IST)

    भागलपुर शिक्षा विभाग ने आरटीई के तहत बच्चों के नामांकन में अनियमितता पर 43 निजी स्कूलों को तलब किया है। 69 चयनित बच्चों को दाखिला न देने पर विभाग ने स ...और पढ़ें

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    भागलपुर: आरटीई नामांकन में लापरवाही, 43 निजी स्कूलों को विभाग की चेतावनी

    जागरण संवाददाता, भागलपुर। भागलपुर में शिक्षा विभाग ने आरटीई के तहत नामांकन में गड़बड़ी को गंभीरता से लेते हुए 43 निजी विद्यालयों पर सख्ती दिखाई है। विभाग ने सभी स्कूलों से जवाब तलब किया है। जिला शिक्षा विभाग ने आरटीई (शिक्षा का अधिकार) के तहत नामांकन में लापरवाही बरतने वाले 43 निजी विद्यालयों पर सख्त रुख अपनाया है। इस संबंध में जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (प्राथमिक शिक्षा) की ओर से पत्र जारी किया गया है। पत्र में स्पष्ट कहा गया है कि शैक्षणिक सत्र 2026-27 में वर्ग-एक में नामांकन के लिए चयनित बच्चों को स्कूलों ने दाखिला नहीं दिया, जो नियमों का उल्लंघन है।

    चयन के बावजूद बच्चों का नहीं हुआ नामांकन

    विभागीय जानकारी के अनुसार, ज्ञानदीप पोर्टल पर चयन प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद 69 बच्चों का नामांकन संबंधित स्कूलों में नहीं लिया गया। इसे गंभीर अनियमितता माना गया है।

    शिक्षा विभाग का कहना है कि आरटीई के तहत चयनित छात्रों का नामांकन लेना सभी मान्यता प्राप्त निजी विद्यालयों के लिए अनिवार्य है।

    स्कूल प्रबंधन को नोटिस, स्पष्टीकरण मांगा

    विभाग ने सभी 43 विद्यालयों के प्राचार्य और प्रबंधकों को निर्देश दिया है कि वे 6 अप्रैल को दोपहर 12:30 बजे तक स्वयं उपस्थित होकर अपना पक्ष रखें। साथ ही, नामांकन नहीं लेने के कारणों का स्पष्ट स्पष्टीकरण देने और संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा गया है।

    जवाब नहीं देने पर मान्यता रद्द की चेतावनी

    डीपीओ एसएसए बबीता कुमारी ने बताया कि जारी पत्र में स्पष्ट चेतावनी दी गई है। उन्होंने कहा कि तय समय तक संतोषजनक जवाब नहीं मिलने या निर्देशों की अनदेखी करने पर संबंधित विद्यालयों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आवश्यकता पड़ने पर स्कूलों की मान्यता समाप्त करने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।

    विभाग ने दिखाया सख्त रुख

    शिक्षा विभाग की इस कार्रवाई को आरटीई नियमों के पालन को सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे निजी विद्यालयों में जवाबदेही तय करने में मदद मिलेगी।