आईटीईपी : 2026 सत्र के लिए बिहार के छह कॉलेजों को मंजूरी, डायट भागलपुर को मूल्यांकन में मिले थे दो अंक
संसाधनों की कमी के कारण डायट भागलपुर को 2026 सत्र के लिए इंटीग्रेटेड टीचर्स एजुकेशन प्रोग्राम (आईटीईपी) की मान्यता नहीं मिली। राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा ...और पढ़ें

भागलपुर खिरनीघाट स्थित डायट।
जागरण संवाददाता, भागलपुर। संसाधनों की कमी के कारण इस वर्ष भी डायट भागलपुर में इंटीग्रेटेड टीचर्स एजुकेशन प्रोग्राम (आईटीईपी) शुरू नहीं हो सका। वर्ष 2026 सत्र के लिए राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) ने राज्य के चार संस्थानों सहित देशभर के 223 संस्थानों को आईटीईपी शुरू करने की मान्यता दी है, लेकिन भागलपुर का डायट इस सूची में शामिल नहीं हो पाया। विभागीय सूत्रों के अनुसार, चार वर्षीय इंटीग्रेटेड कोर्स शुरू करने के लिए आवश्यक आधारभूत संरचना फिलहाल उपलब्ध नहीं है।
इन संस्थानों को मिली मान्यता
राज्य में जिन संस्थानों को आईटीईपी की स्वीकृति मिली है, उनमें बीआरए बिहार विश्वविद्यालय (बीआरएबीयू) से संबद्ध बैद्यनाथ शुक्ला बीएड कॉलेज, सीएम साइंस कॉलेज दरभंगा, पटना वीमेंस कॉलेज, दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय, महाबोधि महाविद्यालय नालंदा और भोजपुर का माता मंझराव बीएड कॉलेज शामिल हैं। इन संस्थानों में सत्र 2026 से चार वर्षीय इंटीग्रेटेड कोर्स संचालित किए जाएंगे।
चार वर्षीय कोर्स की होगी पढ़ाई
आईटीईपी के तहत बीएससी-बीएड, बीए-बीएड और बीकॉम-बीएड की चार वर्षीय पढ़ाई शुरू की जानी है। नामांकन शुरू होने पर छात्र-छात्राओं की संख्या में बढ़ोतरी की संभावना है। ऐसे में पर्याप्त कक्षाएं, प्रयोगशाला, पुस्तकालय और अन्य शैक्षणिक संसाधन अनिवार्य होंगे। डायट भागलपुर में फिलहाल इन मानकों के अनुरूप आधारभूत ढांचा उपलब्ध नहीं है।
सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के बाद बढ़ेगी संभावना
डायट परिसर में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के निर्माण के बाद ही चार वर्षीय कोर्स शुरू होने की संभावना जताई जा रही है। इस परियोजना पर 12 करोड़ 7 लाख 71 हजार 435 रुपये खर्च होने हैं। टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और मार्च से निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीद है। ऐसे में माना जा रहा है कि अगले वर्ष से पहले आईटीईपी शुरू होना संभव नहीं है।
पूर्व मूल्यांकन में मिले थे कम अंक
मई 2024 में आईटीईपी शुरू करने के लिए निरीक्षण किया गया था। उस समय डायट को 10 में से केवल दो अंक मिले थे। निरीक्षण में बुनियादी ढांचे और शैक्षणिक संसाधनों की कमी प्रमुख कारण बताई गई थी। इसी आधार पर इस सत्र में मान्यता नहीं मिल सकी।
आईटीईपी से मिलेगा व्यावहारिक प्रशिक्षण
नई शिक्षा नीति के तहत शुरू किए जा रहे आईटीईपी में पढ़ाई के साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण पर जोर दिया गया है। यह चार वर्षीय (आठ सेमेस्टर) कोर्स होगा, जिसमें फील्ड बेस्ड एक्सपीरियंस, टीचिंग प्रैक्टिस और इंटर्नशिप अनिवार्य रूप से शामिल रहेंगे।
प्रत्येक सेमेस्टर में 125 दिन की पढ़ाई होगी और सप्ताह में न्यूनतम 40 घंटे कक्षाएं संचालित की जाएंगी। छात्रों के लिए 80 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य होगी, जबकि प्रैक्टिकल और इंटर्नशिप में 90 प्रतिशत उपस्थिति जरूरी है। 50 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।
प्रवेश परीक्षा से होगा नामांकन
आईटीईपी बीएड में नामांकन प्रवेश परीक्षा के आधार पर होगा। यह परीक्षा राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) द्वारा आयोजित की जाएगी। देशभर में एक साथ 17 अप्रैल को परीक्षा होगी। अभ्यर्थी 11 मार्च तक आवेदन शुल्क जमा कर सकते हैं। एडमिट कार्ड से संबंधित जानकारी एनटीए की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध कराई जाएगी।
इंटीग्रेटेड टीचर्स एजुकेशन प्रोग्राम शुरू करने में अभी समय लगेगा। इसको लेकर मुख्यालय से निर्देश आएगा। अभी सेंटर आफ एक्सीलेंस बनाने के लिए काम शुरू होने वाला है। इसके निर्माण के बाद ही कुछ संभव है।
श्रुति, प्राचार्य डायट भागलपुर
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