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    TMBUमें बड़ा बदलाव : शिक्षकों को रोज 5 घंटे क्लास अनिवार्य, 70 गेस्ट फैकल्टी बहाली पर जांच रिपोर्ट में नियम उल्लंघन के संकेत

    Updated: Tue, 14 Apr 2026 01:46 PM (IST)

    टीएमबीयू में शिक्षकों के लिए नए नियम लागू किए गए हैं, जिसके तहत प्रतिदिन 5 घंटे कक्षा और सप्ताह में 40 घंटे शिक्षण अनिवार्य होगा। इसका उद्देश्य शैक्षण ...और पढ़ें

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    टीएमबीयू में शिक्षकों पर सख्ती: रोज 5 घंटे क्लास अनिवार्य, 70 गेस्ट फैकल्टी बहाली पर जांच रिपोर्ट में नियम उल्लंघन के संकेत

    जागरण संवाददाता, भागलपुर। लोकभवन से 7 अप्रैल को जारी निर्देश के आधार पर टीएमबीयू में शिक्षकों के कार्य संचालन को लेकर नई व्यवस्था प्रभावी कर दी गई है। सीसीडीसी प्रो. एसएन पांडेय ने इस संबंध में अधिसूचना जारी करते हुए इसे तत्काल लागू करने का निर्देश दिया है।

    नई व्यवस्था के अनुसार अब सभी शिक्षकों को प्रतिदिन कम से कम पांच घंटे कक्षा लेना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही सप्ताह में कुल 40 घंटे का शिक्षण कार्य सुनिश्चित करना होगा। विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इसका सख्ती से अनुपालन कराया जाएगा।

    छह कार्यदिवसों में तय होगा शिक्षण कार्य

    अधिसूचना में यह भी उल्लेख किया गया है कि सप्ताह में छह कार्यदिवसों के आधार पर शिक्षकों का कार्यभार निर्धारित किया जाएगा। इसके अलावा पूरे शैक्षणिक सत्र में 180 दिनों तक इस व्यवस्था की नियमित निगरानी की जाएगी, ताकि कक्षाओं का संचालन बाधित न हो और छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो।

    नियमित कक्षाओं पर जोर

    विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि लंबे समय से कक्षाओं के नियमित संचालन को लेकर शिकायतें मिल रही थीं। नई व्यवस्था लागू होने के बाद शिक्षण प्रक्रिया अधिक अनुशासित और पारदर्शी होगी। इस कदम से छात्रों को भी नियमित रूप से पढ़ाई का लाभ मिलेगा और अकादमिक गुणवत्ता में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।

    70 गेस्ट फैकल्टी बहाली पर जांच रिपोर्ट

    इधर, टीएमबीयू में अप्रैल 2025 में हुई 70 गेस्ट फैकल्टी की बहाली को लेकर उठे धांधली के आरोपों की जांच के लिए गठित दो कमेटियों ने अपनी रिपोर्ट प्रभारी कुलपति प्रो. विमलेंदु शेखर झा को सौंप दी है। इनमें से एक कमेटी ने बहाली प्रक्रिया की जांच की, जबकि दूसरी कमेटी ने लोकभवन में प्राप्त शिकायतों की पड़ताल की।

    जांच कमेटी की संरचना

    पहली जांच कमेटी के संयोजक डॉ. नेसार अहमद थे। इसमें पीजी अर्थशास्त्र विभाग के अध्यक्ष डॉ. अनिल कुमारी तिवारी, पीजी दर्शनशास्त्र विभाग के अध्यक्ष डॉ. पूर्णेंदु शेखर और बजट अधिकारी डॉ. ए.एन. सहाय शामिल थे। दूसरी कमेटी के संयोजक डॉ. कमल प्रसाद थे, जबकि इसमें सिंडिकेट सदस्य डॉ. मुश्फिक आलम और डॉ. अनिल कुमार तिवारी शामिल रहे।

    नियमों के उल्लंघन के संकेत

    कमेटी के कुछ सदस्यों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि बहाली प्रक्रिया में तय नियमों का आंशिक उल्लंघन पाया गया है। जांच में यह भी सामने आया कि कुछ आवेदकों के आरोप आंशिक रूप से सही पाए गए हैं, जिससे नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं।

    रोस्टर और पदों को लेकर विवाद

    अभ्यर्थियों का आरोप था कि नियुक्ति में रोस्टर प्रणाली की अनदेखी की गई और 148 रिक्त पदों के स्थान पर केवल 70 अभ्यर्थियों की ही नियुक्ति की गई। इसी को लेकर विश्वविद्यालय में विवाद गहराता जा रहा है और आगे प्रशासनिक कार्रवाई की संभावना भी जताई जा रही है।

    आगे की कार्रवाई पर नजर

    फिलहाल दोनों जांच रिपोर्ट कुलपति को सौंप दी गई है और विश्वविद्यालय प्रशासन इनके अध्ययन में जुटा है। संभावना है कि रिपोर्ट के आधार पर आगे कोई बड़ा प्रशासनिक निर्णय लिया जा सकता है, जिससे बहाली प्रक्रिया की पारदर्शिता पर स्थिति स्पष्ट होगी और विश्वविद्यालय में चल रहे विवाद का समाधान निकल सकेगा।