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    विक्रमशिला सेतु अपडेट : ढाई टन की स्कार्पियो 20–30 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से गुजरी, बेली ब्रिज का हुआ ट्रायल सफल

    Updated: Tue, 02 Jun 2026 11:46 PM (IST)

    भागलपुर के विक्रमशिला सेतु पर क्षतिग्रस्त हिस्से में बने 49 मीटर लंबे बेली ब्रिज का सफल ट्रायल किया गया। ढाई टन की स्कॉर्पियो से हुए इस परीक्षण को बीआ ...और पढ़ें

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    विक्रमशिला सेतु पर बेली ब्रिज का सफल ट्रायल, 20–30 किमी की रफ्तार से गुजरी स्कार्पियो

    HighLights

    1. 49 मीटर लंबे बेली ब्रिज का सफल ट्रायल।

    2. ढाई टन की स्कॉर्पियो से हुई मजबूती की जांच।

    3. छोटे वाहनों के परिचालन से मिलेगी बड़ी राहत।

    जागरण संवाददाता, भागलपुर। विक्रमशिला सेतु पर छोटे वाहनों के परिचालन की दिशा में बड़ी प्रगति दर्ज की गई है। मंगलवार देर रात सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) की टीम ने सेतु के क्षतिग्रस्त हिस्से पर बनाए गए 49 मीटर लंबे बेली ब्रिज पर सफल ट्रायल किया। इस परीक्षण के दौरान चारपहिया वाहन स्कार्पियो को पुल से गुजारकर उसकी मजबूती और स्थिरता की जांच की गई।

    ट्रायल के दौरान करीब 2.5 टन वजनी स्कार्पियो वाहन को पुल पर चलाया गया। वाहन में बीआरओ के एक अधिकारी और चालक मौजूद थे। इस दौरान वाहन को 20 से 30 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गुजारा गया, ताकि पुल की वास्तविक स्थिति और भार सहन क्षमता का आकलन किया जा सके।

    बीच रास्ते में ब्रेक लगाकर भी की गई जांच

    परीक्षण को और अधिक सटीक बनाने के लिए अधिकारियों ने बीच रास्ते में वाहन को ब्रेक लगाकर भी जांच की। इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह देखना था कि अचानक भार परिवर्तन और दबाव की स्थिति में बेली ब्रिज किस तरह प्रतिक्रिया करता है।

    अधिकारियों के अनुसार, पूरे ट्रायल के दौरान पुल में किसी भी प्रकार की तकनीकी खामी, कंपन या अस्थिरता की स्थिति सामने नहीं आई। वाहन बिना किसी रुकावट के आसानी से पुल के एक छोर से दूसरे छोर तक पहुंच गया।

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    बीआरओ ने ट्रायल को बताया सफल

    सीमा सड़क संगठन के अधिकारियों ने इस परीक्षण को सफल बताया है। उनका कहना है कि प्रारंभिक निरीक्षण में बेली ब्रिज पूरी तरह सुरक्षित और उपयोग योग्य प्रतीत हो रहा है। हालांकि, अंतिम निर्णय तकनीकी रिपोर्ट और उच्चस्तरीय मंजूरी के बाद ही लिया जाएगा।

    अधिकारियों ने बताया कि इस ट्रायल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त हिस्से पर बनाए गए अस्थायी बेली ब्रिज पर छोटे वाहनों का सुरक्षित परिचालन संभव है या नहीं।

    चारों बेली ब्रिज पर होगा विस्तृत ट्रायल

    जानकारी के अनुसार अब विशेषज्ञों की टीम की निगरानी में विक्रमशिला सेतु पर बनाए गए सभी चार बेली ब्रिज का अलग-अलग परीक्षण किया जाएगा। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सभी संरचनाएं समान रूप से सुरक्षित और स्थिर हैं।

    अधिकारियों ने बताया कि आगामी चार और पांच जून को अंतिम चरण का ट्रायल किया जाएगा। इसके बाद तकनीकी मूल्यांकन रिपोर्ट तैयार कर संबंधित विभाग को सौंपी जाएगी। इसी रिपोर्ट के आधार पर छोटे वाहनों के परिचालन को लेकर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

    छोटे वाहनों के परिचालन से लोगों को राहत की उम्मीद

    विक्रमशिला सेतु भागलपुर और नवगछिया के बीच एक प्रमुख संपर्क मार्ग है, जिस पर प्रतिदिन हजारों वाहनों का आवागमन होता है। सेतु के क्षतिग्रस्त होने के बाद यातायात व्यवस्था प्रभावित हुई थी और लोगों को वैकल्पिक मार्गों से लंबी दूरी तय करनी पड़ रही थी।

    ऐसे में बेली ब्रिज के सफल ट्रायल से आम लोगों में राहत की उम्मीद बढ़ गई है। यदि अंतिम मंजूरी मिल जाती है तो छोटे वाहनों का आवागमन शुरू हो सकेगा, जिससे क्षेत्रीय यातायात व्यवस्था काफी हद तक सामान्य हो जाएगी।

    तकनीकी जांच के बाद होगी अंतिम घोषणा

    बीआरओ और संबंधित तकनीकी विशेषज्ञों की टीम अब सभी आंकड़ों और निरीक्षण रिपोर्ट का विश्लेषण करेगी। इसके बाद यह तय किया जाएगा कि बेली ब्रिज पर नियमित रूप से वाहनों का परिचालन कब से शुरू किया जाए।

    अधिकारियों का मानना है कि सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए ही आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। किसी भी तरह की जोखिमपूर्ण स्थिति को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।

    हजारों लोगों को मिल सकती है राहत

    विक्रमशिला सेतु पर छोटे वाहनों के परिचालन की शुरुआत से भागलपुर, नवगछिया, कोसी और सीमांचल क्षेत्र के हजारों लोगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। इससे न केवल यात्रा समय कम होगा, बल्कि वैकल्पिक मार्गों पर दबाव भी घटेगा।

    स्थानीय लोगों को अब अंतिम ट्रायल और तकनीकी मंजूरी का इंतजार है, जिसके बाद इस महत्वपूर्ण मार्ग पर यातायात फिर से सुचारू होने की संभावना है।