आरा के बड़हरा में बाढ़ से त्राहिमाम: छतों और तटबंधों पर त्रिपाल के सहारे जिंदगी, नाव की कमी से हाहाकार
आरा के बड़हरा में बाढ़ की स्थिति गंभीर है, जहाँ लोग छतों और तटबंधों पर त्रिपाल लगाकर रहने को मजबूर ...और पढ़ें

छतों और तटबंधों पर त्रिपाल के सहारे जिंदगी
HighLights
बाढ़ से घिरे घरों में लोग छतों पर जीवन बिता रहे हैं।
दैनिक जरूरतों और आवागमन के लिए नावों की भारी कमी।
प्रशासन द्वारा घोषित नावों से कम का संचालन हो रहा है।
संवाद सूत्र, बड़हरा (आरा)। महुदही के संजय सिंह का पूरा घर बाढ़ के पानी से घिरा हुआ है और परिवार छत पर जिंदगी की जंग लड़ रहा है। घर में बचे जरूरी सामान किसी तरह इस जंग में काम आ रहे हैं, लेकिन परेशानी बढ़ती जा रही है। यह स्थिति गांव में कई परिवारों की है।
प्रखंड में बाढ़ की स्थिति विकट होने के कारण बड़ी संख्या में लोग घर छोड़कर कोईलवर बक्सर तटबंध, सरैया-सिन्हा मुख्य सड़क और अपने घरों की छत पर प्लास्टिक का त्रिपाल लगाकर रहने को मजबूर हैं।
खुले आसमान के नीचे रह रहे बाढ़ पीड़ित
कोईलवर-बक्सर तटबंध और उत्तर प्रदेश के बिरला बांध पर खुले आसमान के नीचे रह रहे बाढ़ पीड़ितों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है। सड़क मार्ग बंद होने से प्रभावित गांवों के लोगों के सामने रोजमर्रा की जरूरत का सामान जुटाना भी चुनौती बन गया है। इस बीच नथमलपुर पंचायत के संजय सिंह समेत अन्य ग्रामीणों ने पंचायत में नावों के संचालन को लेकर सवाल उठाया है।
ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत के नाम पर अंचल कार्यालय की ओर से 21 नाव उपलब्ध कराए जाने की बात कही गई है। धरातल पर महज 10 नावों का ही संचालन हो रहा है। इससे बाढ़ प्रभावित लोगों को जरूरी सामान खरीदने और सुरक्षित आवागमन में परेशानी हो रही है।
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गांव के नाम पर छह नाव चलाने की बात
ग्रामीणों ने बताया कि महुदही गांव के नाम पर छह नाव चलाने की बात कही जा रही है। जबकि गांव में फिलहाल सिर्फ एक नाव का संचालन हो रहा है। इससे लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
इस संबंध में राजस्व कर्मचारी विकास कुमार ने बताया कि नथमलपुर पंचायत में वर्तमान में 10 नावों का संचालन किया जा रहा है। जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त नाव की व्यवस्था की जाएगी।
