विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

बक्सर: बिना 1 रुपया खर्च किए 73 बच्चों के दिल का सफल ऑपरेशन, 'बाल हृदय योजना' दे रही नया जीवन

Published: Wed, 09 Sep 2026 03:21 PM (IST)

मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना बक्सर में 73 जन्मजात हृदय रोगी बच्चों के लिए जीवनदायिनी साबित हुई है। यह योजना बच्चों ...और पढ़ें

बक्सर में बाल हृदय योजना से 73 बच्चों को मिला नया जीवन (AI Generated Image)

बक्सर में बाल हृदय योजना से 73 बच्चों को मिला नया जीवन (AI Generated Image)

HighLights

  1. मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना 73 बच्चों के लिए जीवनदायिनी बनी।

  2. जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित बच्चों को मिला निःशुल्क उपचार।

  3. सरकार वहन करती स्क्रीनिंग, सर्जरी और परिवहन का खर्च।

जागरण संवाददाता, बक्सर। जन्मजात हृदय रोग से जूझ रहे मासूम बच्चों के लिए मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना जीवनदायिनी साबित हो रही है। योजना के तहत स्क्रीनिंग के बाद अब तक जिले के 73 बच्चों के दिल की सफल सर्जरी कराई जा चुकी है।

वर्ष 2025-26 में ही जिले के 11 बच्चों का सफल उपचार कराया गया है। खास बात यह है कि बच्चों की स्क्रीनिंग से लेकर सर्जरी और उपचार के बाद सामान्य दिनचर्या में लौटने तक की प्रक्रिया में सरकार की ओर से निश्शुल्क सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के डीईआइसी के डॉ. अभिजीत बैद्य ने बताया कि आरबीएसके की टीमें पूरे जिले में ऐसे बच्चों की पहचान करने के लिए लगातार स्क्रीनिंग अभियान चलाती हैं।

चिह्नित बच्चों की आवश्यक जांच और उपचार की व्यवस्था कराने के साथ उनके चिकित्सकीय उपचार के बाद सामान्य जीवन में लौटने तक आवश्यक सहयोग दिया जाता है। जिले से चिह्नित बच्चों की सर्जरी अहमदाबाद और पटना के अस्पतालों में कराई जा रही है।

डॉ. वैद्य ने बताया कि बच्चों में होने वाले जन्मजात रोगों में हृदय में छेद गंभीर समस्या है। सुशासन के कार्यक्रम के तहत सात निश्चय-2 में शामिल बाल हृदय योजना को मंत्रिमंडल ने पांच जनवरी 2021 को स्वीकृति दी थी।

योजना एक अप्रैल 2021 से लागू है। इसका उद्देश्य जन्म से हृदय में छेद वाले बच्चों को समय पर चिह्नित कर निश्शुल्क उपचार उपलब्ध कराना है।

छह वर्ष तक के बच्चों के लिए विशेष प्रविधान

योजना के तहत छह वर्ष से कम उम्र के बच्चों के उपचार के लिए विशेष प्रविधान किया गया है। राज्य के बाहर चिह्नित चैरिटेबल ट्रस्ट अथवा निजी अस्पताल में उपचार के लिए जाने वाले बच्चे के साथ मां के अलावा एक अन्य स्वजन के आने-जाने का खर्च भी सरकार वहन करती है।

परिवहन भाड़े के रूप में बाल हृदय रोगी के लिए पांच हजार रुपये तथा अटेंडेंट के लिए अधिकतम राशि को बढ़ाकर 10 हजार रुपये किया गया है। इलाज के दौरान बच्चों और उनके परिवार की सहायता के लिए समन्वयक भी साथ रहते हैं।

उपचार पूरा होने के बाद समन्वयक बच्चों को उनके परिवार के साथ वापस लेकर आते हैं। योजना के कारण आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को भी समय पर बेहतर हृदय उपचार मिल पा रहा है।