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    Darbhanga News : निजी स्कूलों में मनमानी फीस वृद्धि, पाठ्यपुस्तक और ड्रेस बदलाव से अभिभावकों पर दोहरी मार

    By Abul Kaish Naiyar Edited By: Dharmendra Singh
    Updated: Sun, 05 Apr 2026 07:37 PM (IST)

    दरभंगा में निजी स्कूलों ने नए सत्र में फीस में मनमानी वृद्धि की है, जिससे अभिभावकों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ रहा है। स्कूलों द्वारा पाठ्यपुस्तकें और ड्र ...और पढ़ें

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    इसमें प्रतीकात्मक तस्वीर लगाई गई है।

    संवाद सहयोगी, दरभंगा । सरकारी और निजी विद्यालयों में नए शैक्षणिक सत्र आरंभ हो गए हैं। निजी विद्यालयों में नामांकन के लिए भीड़ उमड़ने लगी है। साथ ही अभिभावकों की जेब पर दोहरी मार पड़ी भी आरंभ हो गई है।

    किसी निजी स्कूल में पाठ्य पुस्तकों को बदल दिया गया है तो कहीं ड्रेस ही बदल दिया गया है। कई स्कूलों में मनमानी फीस वृद्धि कर दी गई है। कहीं कहीं तो यह वृद्धि 60 प्रतिशत तक हुई है।

    शहर के एक स्कूल ने मासिक शिक्षण शुल्क को 1700 रुपये प्रति महीने से बढ़ा कर 2700 रुपया कर दिया है। रहमगंज के अभिभावक रामचन्द्र महतो ने कहा कि निजी स्कूलों को निजी प्रकाशक मोटा कमीशन लेते हैं।

    कोई एनसीईआरटी की पुस्तक नहीं पढ़ाता। कारण कि वह निजी स्कूल प्रबंधन को कमीशन नहीं देता। हालांकि अब कई स्कूल अपने परिसर में पुस्तक मेला का आयोजन नहीं करते।

    पड़ासराय के रमेशचंद्र प्रसाद ने कहा कि एक तो मार्च में पूरा वेतन आयकर की भेंट चढ़ गया है। ऊपर से स्कूल वालों को भी इसी वर्ष ड्रेस भी बदलना था। उसमें दो हजार रुपये अतिरिक्त लग गया। अगर ड्रेस नहीं बदलता तो यह राशि बच जाती।

    बाकरगंज के अभिभावक इमरान रसीद ने कहा कि स्कूल अपने यहां अब किताब नहीं बेचते। लेकिन उनकी निर्धारित दुकान से ही पुस्तक लेना अनिवार्य है। केवल उत्तर पुस्तिकाओं का छह सौ रुपये मूल्य है।

    राजद अति पिछड़ा प्रकोष्ठ के प्रदेश महासचिव हनुमान ठाकुर ने डीएम से ऐसे मामलों में तुरंत हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने कहा है कि पुनः नामांकन फीस में हजारों रुपये की वृद्धि कर दी गई है।

    मासिक शुल्क भी 1700 रुपये से बढ़ाकर 2700 रुपये कर दिया गया। इसके अलावा किताबें, यूनिफार्म, बैग, कापियां आदि की खरीद भी विद्यालय की निर्धारित दुकानों से ही कराने का दबाव बनाया जा रहा है।

    यह मनमानी , अनुसूचित जाति अन्य पिछड़ा वर्ग सहित असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले लगभग 75 प्रतिशत परिवारों पर भारी आर्थिक बोझ डाल रही है। समय पर फीस जमा न करने पर छात्र-छात्राओं को अपमानित भी किया जा रहा है।

    यह योजनाबद्ध अपराध के समान है। उन्होंने डीएम को याद दिलाया कि पूर्वी चंपारण में इसी तरह की मनमानी पर बीते 23 जनवरी को रोक लगाई थी।

    उन्होंने जिले में भी इसी तरह के विशेष अधिकार का इस्तेमाल करते हुए फीस वृद्धि पर तुरंत रोक लगाने और विद्यालयों की मनचाहा दुकानों से सामग्री खरीदने पर पाबंदी लगाने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि यदि जिला प्रशासन तुरंत कार्रवाई नहीं करता तो गरीब अभिभावकों का शोषण और बढ़ेगा।