ED Raid: श्यामलाल चंद्रशेखर मेडिकल कॉलेज में 17 घंटे चली ED की छापेमारी, मान्यता से जुड़ा है मामला
खगड़िया के श्यामलाल चंद्रशेखर मेडिकल कॉलेज में ईडी ने 17 घंटे छापेमारी की। कॉलेज प्रशासन ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने बताया कि कॉलेज को मान्यता न मिलने पर मामला अदालत में गया था। सीबीआई ने प्राथमिकी दर्ज की, पर कॉलेज का नाम नहीं था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी मान्यता प्रक्रिया रुकी रही। बाद में कोर्ट ने 50 एमबीबीएस सीटों को मंजूरी दी, जिसे बढ़ाकर 100 कर दिया गया। चार्जशीट में नाम न होने पर भी ईडी की छापेमारी पर सवाल उठे।

प्रेस वार्ता करते हुए कॉलेज प्रशासन। फोटो जागरण
जागरण संवाददाता, खगड़िया। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम ने खगड़िया नगर परिषद क्षेत्र के परमानंदपुर स्थित श्यामलाल चंद्रशेखर मेडिकल कॉलेज में शुक्रवार को छापेमारी की। शुक्रवार की सुबह 10 बजे के आसपास छापेमारी शुरू हुई, जो शनिवार की अल सुबह तीन बजे तक चली।
लगभग 17 घंटे छापेमारी चली। इस दौरान ईडी की टीम ने मौजूद मेडिकल कॉलेज के व्यवस्थापक इंजीनियर धर्मेंद्र कुमार से पूछताछ की और कुछेक हार्ड डिस्क साथ लेते गए।
इधर शनिवार को मेडिकल कॉलेज के व्यवस्थापक इंजीनियर धर्मेंद्र कुमार, मीडिया प्रभारी अमरीष कुमार और कॉलेज के रोगी कल्याण समिति के अध्यक्ष प्रफुल्ल चंद्र घोष ने संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि, श्यामलाल चंद्रशेखर मेडिकल कॉलेज खगड़िया में प्रवर्तन निदेशालय की टीम द्वारा की गई छापेमारी दुर्भाग्यपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि वैसे भारत के संविधान एवं संवैधानिक संस्था का हम एक देशभक्त नागरिक के रूप में सम्मान करते हैं, लेकिन किस वजह से छापेमारी की गई है, यह एक अबूझ पहेली है।
कॉलेज की मान्यता से जुड़ा है मामला
कॉलेज प्रशासन के मुताबिक श्यामलाल चंद्रशेखर मेडिकल कॉलेज का नेशनल मेडिकल कमीशन द्वारा 28 जून 2024 को इंस्पेक्शन किया गया और कमीशन द्वारा मान्यता नहीं दी गई, उसके बाद यह मामला उच्च न्यायालय पटना पहुंचा, जहां माननीय न्यायाधीश ने 20 दिनों के समयावधि के अंदर पूर्ण निरीक्षण कर मान्यता प्रदान करने का आदेश प्रदान किया।
नेशनल मेडिकल कमीशन ने उच्च न्यायालय पटना के इस आदेश को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी। इस बीच 24 जून, 2025 को कमीशन ने दोबारा औचक निरीक्षण कर दिया।
CBI ने दर्ज किया है मामला
24 जून 2025 को किए गए औचक निरीक्षण में कालेज में कोई उल्लेखनीय कमी नहीं पाई गई, तो छत्तीसगढ़ के रायपुर में सीबीआई ने एक प्राथमिकी दर्ज की, जिसमें ना तो इस कॉलेज को अभियुक्त बनाया गया, ना ही कोई नोटिस दी गई। केवल एक पंक्ति लिखी कि कुछ एनएमसी के अज्ञात लोग उनसे संपर्क करने का प्रयास कर रहे थे।
उन्होंने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय ने आदेश दिया कि तीन दिन के अंदर मान्यता के संबंध में कमीशन निर्णय जारी करें, उसके जवाब में कमीशन ने आदेश निर्गत किया कि सीबीआई की प्राथमिकी में कॉलेज के नाम का उल्लेख होने के कारण मान्यता की प्रक्रिया पर रोक लगा दी गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने MBBS की 100 सीटों पर लगाई थी मुहर
व्यवस्थापक ने बताया कि मामला फिर सर्वोच्च अदालत पहुंचा कि व्यक्ति गुनाहगार हो सकता है, संस्थान नहीं। उस आदेश को रद करते हुए कोर्ट ने आदेश दिया कि, 24 जून 2025 के निरीक्षण रिपोर्ट को चार दिन के अंदर दोबारा निरीक्षण कर मान्यता के संबंध में निर्णय 20 दिन के अंदर दे।
उस पर कमीशन द्वारा कोई कार्यवाही नहीं होने पर सर्वोच्च न्यायालय की अवमानना का मुकदमा दायर हुआ, लेकिन कमीशन ने 25 दिन का अतिरिक्त समय मांगा और चार दिन के बजाय 21वें दिन तीसरी बार औचक निरीक्षण किया।
इस निरीक्षण में भी कोई कमी नहीं पाई गई। उसके आधार पर 50 एमबीबीएस सीट की मंजूरी दी गई, जिसे सर्वोच्च न्यायालय ने 100 सीटों में परिवर्तित कर दिया। इस बीच सीबीआई ने अपनी चार्ज शीट जमा की, जिसमें कॉलेज का नाम नहीं है।
उन्होंने बताया कि कॉलेज का नाम अभियुक्त की सूची में नहीं है। छह माह बीत जाने पर कोई नोटिस नहीं है। चार्जशीट में नाम नहीं है, तो फिर ईडी द्वारा छापेमारी का क्या कारण हो सकता है?

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