पेपरलेस व्यवस्था लागू होते ही किशनगंज में घटी रजिस्ट्री, जुलाई में मिले थे ₹6.22 करोड़, अगस्त में ₹11.63 लाख राजस्व
Kishanganj Land Registry: बिहार में 100% पेपरलेस ऑनलाइन रजिस्ट्री लागू होने के बाद किशनगंज में निबंधन और राजस्व में भारी ...और पढ़ें

Kishanganj Land Registry: पहले रोज होती थीं 40-50 रजिस्ट्री, अब महीनेभर में सिर्फ 11: बिहार में 100% ऑनलाइन सिस्टम से किशनगंज निबंधन कार्यालय में पसरा सन्नाटा
HighLights
पेपरलेस रजिस्ट्री से किशनगंज में निबंधन संख्या घटी।
जुलाई के ₹6.22 करोड़ से अगस्त में ₹11.63 लाख राजस्व।
तकनीकी जटिलताओं के कारण आमजन व डीड राइटर असहज।
जागरण संवाददाता, किशनगंज। Kishanganj Land Registry: कभी जमीन खरीदारों, विक्रेताओं और दस्तावेज नवीसों (डीड राइटरों) की चहल-पहल से गुलजार रहने वाला किशनगंज जिला निबंधन कार्यालय इन दिनों पूरी तरह सूना नजर आ रहा है। सुबह से शाम तक लगने वाली लोगों की भीड़ और खिड़कियों पर लंबी कतारें अब नदारद हैं। बिहार सरकार द्वारा जमीन व संपत्ति के निबंधन के लिए 100 प्रतिशत पेपरलेस और ऑनलाइन रजिस्ट्री व्यवस्था लागू किए जाने के बाद कार्यालय का पूरा परिदृश्य बदल गया है।
बिहार में 100 प्रतिशत पेपरलेस और ऑनलाइन रजिस्ट्री लागू होने के बाद किशनगंज निबंधन कार्यालय में रजिस्ट्री की संख्या में भारी गिरावट
3 से 29 अगस्त के बीच जिले में हुईं केवल 11 रजिस्ट्रियां, जिनमें अधिकांश ट्रस्ट व मॉर्टगेज से संबंधित दस्तावेज शामिल
जुलाई में मिले ₹6.22 करोड़ के मुकाबले अगस्त में विभाग को प्राप्त हुआ महज ₹11.63 लाख का राजस्व
अवर निबंधक अनवर आलम बोले- घर बैठे आवेदन व मनपसंद स्लॉट जैसी कई सुविधाएं, 10-20 मिनट में पूरी हो रही प्रक्रिया और ईमेल-व्हाट्सएप पर मिल रहे दस्तावेज
किशनगंज जिले में 3 अगस्त से इस नई व्यवस्था को प्रभावी किया गया था। इसके बाद 3 से 29 अगस्त तक यानी करीब एक महीने की अवधि में महज 11 दस्तावेजों का ही निबंधन हो सका है। इनमें भी अधिकांश मामले ट्रस्ट और बैंक मॉर्टगेज से जुड़े हैं। नई ऑनलाइन प्रक्रिया और इसकी तकनीकी जटिलताओं को लेकर आम नागरिकों के साथ-साथ डीड राइटर भी अभी पूरी तरह सहज नहीं हो सके हैं, जिसका सीधा असर निबंधन की रफ्तार और सरकारी राजस्व पर पड़ रहा है।
जुलाई में 6.22 करोड़ से अधिक राजस्व
नई व्यवस्था के लागू होने से पहले जुलाई माह में जिला निबंधन कार्यालय में प्रतिदिन औसतन 40 से 50 दस्तावेजों की रजिस्ट्री होती थी। सुबह से ही कार्यालय परिसर में गहमागहमी बनी रहती थी। अकेले जुलाई महीने में निबंधन विभाग को कुल 6 करोड़ 22 लाख रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त हुआ था।
अगस्त में घटकर 11.63 लाख पर सिमटा
वहीं, पेपरलेस व्यवस्था लागू होने के बाद अगस्त माह में अब तक विभाग के खाते में महज 11,63,560 रुपये ही जमा हो पाए हैं। स्थिति यह है कि पहले जहां हर रोज दर्जनों निबंधन होते थे, वहीं अब ऑनलाइन बुक किए गए स्लॉट के अनुसार एक या दो दिन के अंतराल पर बमुश्किल एक-दो रजिस्ट्री ही हो पा रही हैं। कई बार आवेदकों को चार दिन बाद तक का स्लॉट मिल रहा है।
डीड राइटर असमंजस में, जागरूकता की दरकार
ऑनलाइन रजिस्ट्री की नई प्रक्रिया के तहत ऑनलाइन आवेदन भरने, डिजिटल दस्तावेज अपलोड करने और समय का स्लॉट चुनने जैसे तकनीकी पहलुओं की पूरी जानकारी का अभी आम लोगों में अभाव है। डीड राइटरों की कार्यप्रणाली भी अभी इस नए डिजिटल प्रारूप के अनुसार पूरी तरह ढल नहीं पाई है, जिससे उनकी सक्रियता काफी घट गई है। जानकारों के मुताबिक, नई व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिए बड़े पैमाने पर जन-जागरूकता और डीड राइटरों के तकनीकी प्रशिक्षण की आवश्यकता है।
घर बैठे आवेदन और व्हाट्सएप पर दस्तावेज मिलने की सुविधा: अवर निबंधक
जिला अवर निबंधक अनवर आलम ने बताया कि विभाग की ओर से लोगों को लगातार पेपरलेस रजिस्ट्री के फायदे और प्रक्रिया समझाई जा रही है। उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी और आमजन के हित में है।
उन्होंने बताया कि आवेदक अब घर बैठे ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं और अपनी सुविधानुसार रजिस्ट्री की तिथि व समय का स्लॉट चुन सकते हैं। तय समय पर कार्यालय पहुंचने पर महज 10 से 20 मिनट के भीतर सत्यापन व निबंधन की प्रक्रिया पूरी हो जाती है। सबसे बड़ी बात यह है कि रजिस्ट्री के बाद मूल दस्तावेज लेने के लिए दोबारा दफ्तर का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा; निबंधित दस्तावेज आवेदक के पंजीकृत ई-मेल और व्हाट्सएप पर स्वतः डिजिटल रूप से उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
