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Bihar Fertilizer Shortage: लखीसराय में 20800 MT लक्ष्य के मुकाबले मिली आधी उर्वरक, बिना फार्मर ID नहीं मिल रही यूरिया

Updated: Tue, 01 Sep 2026 09:54 AM (IST)

Lakhisarai Fertilizer Shortage लखीसराय जिले में धान की रोपनी के बाद उर्वरक की गंभीर किल्लत हो गई है, जिससे किसान ...और पढ़ें

Lakhisarai Fertilizer Shortage

Lakhisarai Fertilizer Shortage

HighLights

  1. लखीसराय में धान रोपनी के बाद खाद की भारी किल्लत।

  2. 20,800 मीट्रिक टन लक्ष्य के मुकाबले सिर्फ 12,246 मीट्रिक टन आपूर्ति।

  3. फार्मर आईडी के बिना किसानों को उर्वरक मिलना मुश्किल।

संवाद सहयोगी, लखीसराय। Lakhisarai Fertilizer Shortage : जिले में धान की रोपनी का कार्य संपन्न होने के बाद अब फसलों में रासायनिक उर्वरक डालने का अत्यंत महत्वपूर्ण समय शुरू हो चुका है। ऐसे नाजुक वक्त में लखीसराय जिले में खाद की गंभीर किल्लत ने अन्नदाताओं की चिंता बढ़ा दी है। एक तरफ प्रशासनिक स्तर पर उर्वरक की पर्याप्त उपलब्धता के दावे किए जा रहे हैं, तो दूसरी तरफ धरातल पर किसान खाद की एक-एक बोरी के लिए दुकानों के चक्कर काटने को विवश हैं। खाद की सीमित आपूर्ति के बीच ऑनलाइन आवेदन और 'फार्मर आईडी' (Farmer ID) की अनिवार्यता ने किसानों की मुश्किलों को और गहरा कर दिया है।

जिले के बड़ी संख्या में किसानों का अब तक विभागीय पोर्टल पर फार्मर आईडी का निबंधन नहीं हो सका है। डिजिटल व्यवस्था लागू होने के कारण बिना फार्मर आईडी के किसान ऑनलाइन आवेदन नहीं कर पा रहे हैं, जिससे उन्हें दुकानों से खाद नहीं मिल पा रही है। जिला कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार, खरीफ मौसम के तहत सितंबर माह तक जिले में कुल 20,800 मीट्रिक टन विभिन्न उर्वरकों की उपलब्धता का लक्ष्य रखा गया था, जिसके विरुद्ध अब तक मात्र 12,246 मीट्रिक टन ही खाद प्राप्त हो सकी है।

यूरिया और डीएपी की भारी कमी, एमओपी की आपूर्ति शून्य

धान की फसल के उचित बढ़वार और पैदावार के लिए यूरिया, डीएपी, एनपीके और एमओपी की सर्वाधिक जरूरत होती है। इनमें यूरिया का उपयोग रोपनी के बाद दो से तीन चरणों में टॉप ड्रेसिंग के रूप में किया जाता है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, जिले में यूरिया के 11,500 मीट्रिक टन लक्ष्य के मुकाबले आपूर्ति बेहद असंतोषजनक है।

अन्य उर्वरकों की स्थिति भी चिंताजनक है:

  • डीएपी: अगस्त तक के 3,400 मीट्रिक टन लक्ष्य के विरुद्ध केवल 2,392.50 मीट्रिक टन मिला।

  • एनपीके: 3,000 मीट्रिक टन के लक्ष्य के विरुद्ध मात्र 863.50 मीट्रिक टन की आपूर्ति हुई।

  • एसएसपी: 900 मीट्रिक टन के लक्ष्य के विरुद्ध महज 290 मीट्रिक टन उपलब्ध हो सका।

  • एमओपी (म्यूरेट ऑफ पोटाश): 2,000 मीट्रिक टन के लक्ष्य के विरुद्ध अब तक जिले को शून्य (एक भी मीट्रिक टन नहीं) आपूर्ति मिली है।

उत्पादन प्रभावित होने की आशंका से किसान हलकान

किसानों का कहना है कि खेती के कुल रकबे के हिसाब से जिले का प्रारंभिक लक्ष्य ही काफी कम तय किया जाता है। उस पर भी समय पर आपूर्ति न होने से कालाबाजारी की आशंका बढ़ जाती है। यदि धान की फसल को समय पर पोषण नहीं मिला, तो पौधों का विकास रुक जाएगा और उत्पादन में भारी गिरावट आएगी।

  • लखीसराय में धान की रोपनी के बाद खाद की भारी किल्लत; 20,800 मीट्रिक टन लक्ष्य के विरुद्ध अब तक केवल 12,246 मीट्रिक टन आपूर्ति

  • यूरिया, डीएपी और एनपीके की आपूर्ति लक्ष्य से काफी पीछे; एमओपी का 2,000 मीट्रिक टन लक्ष्य होने के बावजूद आपूर्ति शून्य

  • खाद खरीदारी के लिए ऑनलाइन आवेदन और फार्मर आईडी अनिवार्य; आईडी न होने से हजारों किसान पोर्टल पर नहीं कर पा रहे आवेदन

  • डीएओ कुंदन कुमार ने कहा— बिना फार्मर आईडी नहीं मिलेगी खाद, अतिरिक्त उर्वरक आवंटन के लिए विभाग को भेजा गया पत्र

बिना फार्मर आईडी नहीं मिलेगी खाद: डीएओ

जिला कृषि पदाधिकारी (DAO) कुंदन कुमार ने स्पष्ट किया कि पारदर्शिता बनाए रखने के लिए डिजिटल प्रणाली लागू की गई है। जिन किसानों ने पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन किया है, उन्हें नियमानुसार खाद उपलब्ध कराई जा रही है। जिन किसानों के पास फार्मर आईडी नहीं है, उन्हें इसे जल्द से जल्द बनवाना होगा, क्योंकि इसके बिना किसी भी स्थिति में खाद जारी नहीं की जा सकेगी। उन्होंने यह भी बताया कि जिले में खाद की किल्लत को दूर करने और निर्धारित लक्ष्य के अनुसार शेष उर्वरक जल्द मंगाने के लिए विभाग मुख्यालय को मांग पत्र भेजा गया है।