मुंगेर के सदर अस्पताल में महिला की फूलती रही सांस, खाली था सिलेंडर; आखिर संध्या ने तोड़ा दम
मुंगेर सदर अस्पताल में प्रसव के बाद एक महिला की मौत हो गई जिसके बाद परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। परिजनों का कहना है कि ऑक्सीजन सिलेंडर खाली था और समय पर इलाज नहीं मिला। सिविल सर्जन ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं।

संवाद सहयोगी, मुंगेर। सदर अस्पताल में प्रसव के बाद प्रसूता संध्या कुमारी की जान चली गई। परिवार वालों ने ऑक्सीजन सिलेंडर खाली और उचित इलाज नहीं होने का आरोप लगाकर खूब बवाल काटा।
प्रसव वार्ड से महिला को लेकर परिवार वाले स्ट्रेचर इमरजेंसी पहुंचे जहां चिकित्सक ने मृत बताया। इसके बाद परिवार वाले इमरजेंसी के बाहर शव के साथ हंगामा करने लगे।
हंगामा की खबर सुनकर कोतवाली थाने की पुलिस पहुंची और मामले काे शांत कराने का प्रयास किया। परिवार वालों का हंगामा देख कर ड्यूटी में तैनात चिकित्सक डॉ. निधि कुमारी और स्टाफ नर्स अस्पताल से चली गई।
जांच के बाद होगी कार्रवाई
सिविल सर्जन डॉ. रामप्रवेश प्रसाद ने मामले काे गंभीरता से लेते हुए जांच की बात कही है। जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी। दरअसल, जमालपुर थाना क्षेत्र के छोटी गबन फुल्का निवासी पियूष कुमार रविवार की सुबह प्रसव कराने के लिए पत्नी काे भर्ती कराया।
शाम सात बजे के लगभग पत्नी ने बच्ची को जन्म दिया। यह महिला की पहली डिलीवरी थी। कुछ देर बाद संध्या के पेट में दर्द शुरू होने लगा। पत्नी ने पेट दर्द होने की डॉक्टर व नर्स को दी। कई बार कहने के बाद भी कोई देखने नहीं पहुंचा। इस बीच महिला की सांस फूलने लगी।
सिलेंडर में नहीं था ऑक्सीजन
एक नर्स पहुंची और वार्ड में रखे ऑक्सीजन सिलेंडर को लगा दिया, लेकिन सिलेंडर में आक्सीजन नहीं था। इस बीच रात 1.45 बजे महिला ने दम तोड़ दिया। महिला की मृत्यु के बाद परिवार वाले हंगामा करने लगे, हंगामा सुनकर ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक डॉ. निधि ब्लड बैंक चली गई और कुछ देर बाद गाड़ी से निकल गई।
पति का कहना था कि जब पेट में दर्द व सांस की समस्या कम नहीं हो रही थी तो उस स्थिति मरीज को रेफर कर देना चाहिए था।
पहले भी सामने आ चुके हैं इस तरह के मामले
महिलाओं की डिलीवरी को लेकर बरती जा रही लापरवाही के मामले पहले भी सामने आ चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद अस्पताल प्रशासन इसे लेकर गंभीर नहीं है।
इस कारण आए दिन डिलीवरी के दौरान महिला तो कभी नवजात बच्चों की मौत हो रही है। लोगों का कहना है कि ऐसे मामलों को देखते हुए सरकार व प्रशासन को ध्यान दिया जाना चाहिए।
इसी माह ऑक्सीजन नहीं मिलने के कारण आईसीयू में एक महिला मरीज की मौत हो गई थी। उस समय अस्पताल प्रशासन के द्वारा खानापूर्ति के लिए बोर्ड का गठन किया। उसके बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
रविवार को बंद था ऑक्सीजन प्लांट
कोरोना काल में ही सदर अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट स्थापित की गई थी। इस प्लांट से पाइप लाइन के जरिए इमरजेंसी, आईसीयू और महिला वार्ड में ऑक्सीजन की आपूर्ति होती है, अन्य वार्डों के लिए सिलेंडर से आक्सीजन उपलब्ध कराया जाता है।
रविवार को ऑक्सीजन प्लांट बंद रहने के कारण महिला और प्रसव वार्ड में सिलेंडर से आक्सीजन की आपूर्ति हुई। परिवार वालों का आरोप है कि जो सिलेंडर महिला को लगाया गया उसमें ऑक्सीजन नहीं था।
ऑपरेशन के बाद महिला ने रविवार की शाम बच्ची को जन्म दिया। सब कुछ सामान था। एक बजे के बाद स्थिति गंभीर हो गई। ऑक्सीजन सिलेंडर खाली नहीं था। महिला की स्थिति काफी गंभीर बन गई थी। मरीज के स्वजन हंगामा करने लगे, हम खुद को बचाने के लिए ब्लड बैंक चले गए। - डॉ. निधि कुमारी, महिला चिकित्सक

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