BAU की लापरवाही से युवाओं का कौशल प्रशिक्षण प्रभावित, पौने चार करोड़ रुपये अनुपयोगी; कृषि विभाग का राशि लौटाने का निर्देश
बिहार कौशल विकास मिशन के तहत कृषि प्रशिक्षण योजना बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर की लापरवाही के कारण विफल हो गई। युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देने के लिए ...और पढ़ें


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राज्य ब्यूरो, पटना। बिहार कौशल विकास मिशन योजना के तहत राज्य के सैकड़ों युवाओं को प्रशिक्षण देने की पहल कोताही की भेंट चढ़ गई। वित्तीय वर्ष 2025-26 समाप्त होने पर अब कृषि विभाग ने बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर को राशि लौटाने का निर्देश दिया है।
यही नहीं, शासन ने बिहार कृषि विश्वविद्यालय के लापरवाही को गंभीरता लिया है। लगभग पौने चार करोड़ रुपये विवि के खाते में अनुपयोगी रह गए। कृषि विभाग के प्रधान सचिव की समीक्षा में गड़बड़ी पकड़ में आने के उपरांत राशि लौटाने के निर्देश दिए गए हैं।
दरअसल, योजना का मुख्य उद्देश्य खेती किसानी से जुड़े युवा-युवतियों को कौशल प्रशिक्षण देकर कुशल तकनीकी एवं व्यावसायिक क्षमता का विकास एवं रोजगार/स्वरोजगार सृजन कराना है। पहल के पीछे लक्ष्य कुशल कामगारों का एक शृंखला विकसित करना है।
औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों को आधुनिक मशीनों से सुसज्जित करना तथा विशेषज्ञों के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण देकर कृषि क्षेत्र में उद्यमियों /किसानों के आमदनी में वृद्धि होगी। विशेषकर कृषि के क्षेत्र में काम करने वाले किसान एवं महिलाओं को प्रशिक्षण उपरांत कौशल का प्रमाण पत्र देकर पहचान दिलाना है ताकि स्वरोगार या रोजगार का सृजन हो।
विदित हो कि दो तिमाही समाप्त होने से पूर्व दो सितंबर को बिहार कृषि प्रबंधन एवं प्रसार प्रशिक्षण संस्थान (बामेती) के निदेशक धनन्जय पति त्रिपाठी ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को लेकर पत्र भी लिखा, लेकिन परिणाम सिफर रहा। उल्लेखनीय है कि योजना के तहत आरपीएल में आठ से दस दिन का प्रशिक्षण युवाओं को देने प्रविधान है।
इसमें अलग अलग जैसे मखाना ग्रोवर, गार्डनर सह नर्सरी, मशरूम ग्रोवर, मधुमक्खी पालन, बर्मी कंपोस्ट उत्पादन, दाल उत्पादक, सब्जी ग्रोवर, समेकित फसल प्रणाली, ट्रोपिकल/सब ट्रोपिकल फल उत्पादक, बांस उत्पादक आदि से संबंधित प्रशिक्षण सम्मिलित है।
वहीं, डोमेन में 50 से 60 दिन का प्रशिक्षण दिया जाना है। इसमें प्रोटेक्टेड कल्टिवेशन, मृदा एवं जल जांच परीक्षण टेक्नीशियन, मखाना ग्रोवर एवं प्रोसेसर, औषधीय एवं सुगंध पौधा उत्पादक, फ्लोरिकल्चरिस्ट, सब्जी उत्पादक, प्लांट टिशू कल्चर टेक्नीशियन के प्रशिक्षण सम्मिलित हैं।
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