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    बिहार कैबिनेट की मंजूरी के बाद लागू हुआ नया नियम, कैदियों की अप्राकृतिक मौत पर स्वजन को मिलेंगे 5 लाख रुपये

    Updated: Sat, 18 Jul 2026 09:51 PM (IST)

    बिहार सरकार ने जेलों में कैदियों की अप्राकृतिक मौत पर उनके परिजनों को आर्थिक सहायता देने के लिए नई मुआवजा नीति लागू की है। ...और पढ़ें

    चार सदस्यीय कमेटी करेगी जांच

    चार सदस्यीय कमेटी करेगी जांच

    HighLights

    1. कैदियों की अप्राकृतिक मौत पर नई मुआवजा नीति लागू।

    2. यातना से मौत पर 5 लाख, आत्महत्या पर 2 लाख।

    3. डीएम की अध्यक्षता में समिति करेगी मामलों की जांच।

    राज्य ब्यूरो, पटना। बिहार सरकार ने जेलों में बंद कैदियों की अप्राकृतिक मौत के मामलों में उनके स्वजनों को आर्थिक सहायता देने के लिए नई मुआवजा नीति लागू कर दी है। राज्य कैबिनेट की मंजूरी के बाद गृह विभाग (कारा) के कारा एवं सुधार सेवाएं निरीक्षणालय ने संकल्प जारी करते हुए इसे तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया।

    अब तक ऐसी कोई स्थायी नीति नहीं थी। मानवाधिकार आयोग या अन्य जांच एजेंसियों की अनुशंसा के आधार पर ही मुआवजा दिया जाता था।

    मौत की वजह के अनुसार तय होगी मुआवजे की राशि

    नई नीति के तहत यदि किसी कैदी की मौत कारा कर्मचारियों की यातना या मारपीट के कारण होती है तो उसके विधिक उत्तराधिकारी को पांच लाख रुपये का मुआवजा मिलेगा।

    चिकित्सा पदाधिकारी की लापरवाही, कारा कर्मियों की लापरवाही, कैदियों के आपसी विवाद या अन्य अप्राकृतिक कारणों से मौत होने पर चार लाख रुपये की सहायता राशि दी जाएगी।

    आत्महत्या के मामलों में भी मिलेगी आर्थिक सहायता

    यदि कोई कैदी जेल में आत्महत्या करता है तो उसके निकटतम स्वजन को दो लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा।

    सरकार का उद्देश्य ऐसे मामलों में पीड़ित परिवारों को तय समय सीमा के भीतर आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है।

    चार सदस्यीय कमेटी करेगी जांच

    मुआवजा देने से पहले जिले के डीएम की अध्यक्षता में गठित चार सदस्यीय समिति पूरे मामले की जांच करेगी।

    समिति में एसएसपी या एसपी, सिविल सर्जन सदस्य होंगे, जबकि संबंधित जेल के काराधीक्षक सदस्य सचिव की भूमिका निभाएंगे।

    जेल आईजी को भेजी जाएगी रिपोर्ट

    जांच पूरी होने के बाद समिति अपनी अनुशंसा जेल आईजी को भेजेगी। इसके बाद गृह विभाग मुआवजा राशि की स्वीकृति देगा।

    स्वीकृति मिलने के बाद राशि जिला प्रशासन को उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि भुगतान की प्रक्रिया पूरी की जा सके।

    30 दिनों के भीतर खाते में पहुंच जाएगी राशि

    नई व्यवस्था के तहत मुआवजे की राशि स्वीकृति के बाद 30 दिनों के भीतर मृतक कैदी के विधिक उत्तराधिकारी या निकटतम स्वजन के बैंक खाते में भेज दी जाएगी।

    सरकार का मानना है कि नई नीति लागू होने से ऐसे मामलों में मुआवजा देने की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, समयबद्ध और व्यवस्थित होगी।