चीनी उद्योग में बिहार की लंबी छलांग, इस बार 809 लाख क्विंटल गन्ना की पेराई का लक्ष्य
बिहार ने 2026-27 सत्र के लिए अपनी 10 चीनी मिलों हेतु 809 लाख क्विंटल गन्ना पेराई का लक्ष्य निर्धारित किया है। यह पिछले वर्ष से काफी अधिक है, जिसमें पश ...और पढ़ें

सुगर मिल। फाइल फोटो
HighLights
बिहार ने 2026-27 के लिए 809 लाख क्विंटल गन्ना पेराई लक्ष्य रखा।
पश्चिम चंपारण की मिलों को सर्वाधिक 526 लाख क्विंटल लक्ष्य मिला।
दरभंगा, मधुबनी में नई चीनी मिलों का शिलान्यास नवंबर में।
राज्य ब्यूरो, पटना। गन्ना उद्योग पर फोकस किए हुए बिहार ने अपनी कार्यशील चीनी मिलों के लिए 2026-27 के सत्र के पेराई का लक्ष्य निर्धारित कर दिया है। सभी 10 मिलें मिलकर कुल 809 लाख क्विंटल गन्ना की पेराई करेंगी।
इसमें पश्चिम चंपारण की पांच चीनी मिलों को सबसे अधिक 526 लाख क्विंटल का लक्ष्य मिला है। उल्लेखनीय है कि 2025-26 में इन्हीं चीनी मिलों ने संयुक्त रूप से 569 लाख क्विंटल से थोड़ा अधिक गन्ने की पेराई की।
इस बार पेराई के लक्ष्य में अप्रत्याशित वृद्धि का कारण उन जिलों के लिए भी गन्ना की खेती का लक्ष्य निर्धारण है, जहां चीनी मिलें नहीं हैं। उन क्षेत्रों से कुछ गन्ना अगल-बगल की चीनी मिलों को जाएगा और बाकी गुड़ उद्योग के काम आएगा।
दरभंगा जिला में सकरी और मधुबनी जिला में रैयाम चीनी मिलों का भी शिलान्यास इसी वर्ष नवंबर में होना है। हालांकि, उनके लिए पेराई का लक्ष्य तय नहीं हुआ है, क्योंकि वहां अगले सीजन से पहले पेराई की संभावना नहीं।
ऐसे में उस परिक्षेत्र का गन्ना रीगा चीनी मिल को जाएगा। रीगा सबसे कम पेराई लक्ष्य वाली दो मिलों में से एक है। उल्लेखनीय है कि अभी बिहार के मात्र पांच जिलों में चीनी मिलें संचालित हो रहीं।
उनमें से सर्वाधिक पांच मिले पश्चिम चंपारण में हैं। गोपालगंज जिला में दो और बाकी तीन जिलों में एक-एक। राज्य के कुल पेराई लक्ष्य में उसकी बड़ी हिस्सेदारी स्वाभाविक है, क्योंकि बिहार में गन्ना उद्योग का वह सबसे बड़ा केंद्र है।
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मिलवार पेराई का लक्ष्य
1. हरिनगर (पश्चिम चंपारण) : 165 लाख क्विंटल
2. नरकटियागंज (पश्चिम चंपारण) : 126 लाख क्विंटल
3. बगहा (पश्चिम चंपारण) : 115 लाख क्विंटल
4. मझौलिया (पश्चिम चंपारण) : 77 लाख क्विंटल
5. हसनपुर (समस्तीपुर) : 70 लाख क्विंटल
6. सिधवलिया (गोपालगंज) : 66 लाख क्विंटल
7. गोपालगंज : 57 लाख क्विंटल
8. सुगौली (पूर्वी चंपारण) : 45 लाख क्विंटल
9. रीगा (सीतामढ़ी) : 45 लाख क्विंटल
10. लौरिया (पश्चिम चंपारण) : 43 लाख क्विंटल