बिहार में जमीन उपलब्ध नहीं तो टेंडर होगा रद, शहरी परियोजनाओं में देरी होने पर बुडको का सख्त निर्देश
बुडको ने बिहार में शहरी परियोजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन के लिए कड़ा रुख अपनाया है। प्रबंध निदेशक ने निर्देश दिया कि जमीन उपलब्ध हुए बिना किसी भी परि ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर

समय कम है?
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जागरण संवाददाता, पटना। राज्य में शहरी आधारभूत संरचना से जुड़ी परियोजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन को लेकर बिहार शहरी आधारभूत संरचना विकास निगम लिमिटेड (बुडको) ने सख्त रुख अपनाया है।
मौर्यालोक काम्प्लेक्स स्थित मौर्य मंडपम में आयोजित तीन दिवसीय राज्यस्तरीय कार्यशाला के दूसरे दिन प्रबंध निदेशक अनिमेष कुमार पराशर ने स्पष्ट निर्देश दिया कि जमीन उपलब्ध हुए बिना किसी भी परियोजना का टेंडर फाइनल नहीं किया जाएगा।
उन्होंने पाया कि कुछ परियोजनाओं में हो रही देरी का सबसे बड़ा कारण भूमि की अनुपलब्धता है। ऐसे में सभी जिलों को निर्देश दिया गया है कि प्रस्तावित योजनाओं की जिलावार सूची तैयार कर समय रहते भूमि उपलब्धता सुनिश्चित करें।
कार्यशाला के दौरान राज्य के सभी 38 जिलों के अधिकारियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में चल रही परियोजनाओं की प्रगति, वास्तविक स्थिति और बाधाओं की विस्तृत प्रस्तुति दी। इन प्रस्तुतियों के आधार पर जिलों की रैंकिंग तैयार की जाएगी और बेहतर प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों को प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया जाएगा।
जलजमाव रोकने पर विशेष फोकस
एमडी ने सभी जिलों को निर्देश दिया कि ड्रेनेज पंपिंग स्टेशन का निर्माण मानसून से पहले हर हाल में पूरा करें, ताकि बारिश के दौरान जलजमाव की समस्या से लोगों को राहत मिल सके। यह कार्य प्राथमिकता में होना चाहिए और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
जिलों की प्रगति पर समीक्षा
समीक्षा के दौरान कई जिलों की स्थिति पर चिंता जताई गई। नालंदा में 62 में से 58 परियोजनाएं पूर्ण पाई गईं, जबकि एक परियोजना भूमि उपलब्ध नहीं होने के कारण लंबित है। लंबित भुगतान शीघ्र करने का निर्देश दिया गया।
नवादा में परियोजनाओं की धीमी प्रगति पर सख्त नाराजगी जताते हुए कार्रवाई की चेतावनी दी गई। भागलपुर में 56 परियोजनाओं में से 37 पर कार्य प्रगति पर है, जबकि शेष पूर्ण बताया गया। यहां एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) परियोजना की स्थिति संतोषजनक नहीं पाई गई।
एमडी ने स्वयं स्थल निरीक्षण करने की बात कही। मुंगेर में 42 परियोजनाओं में केवल 11 के पूर्ण होने पर असंतोष जताते हुए संबंधित टीम के विरुद्ध प्रपत्र ‘क’ गठित करने का निर्देश दिया गया।
अधिकारियों की जवाबदेही तय
एमडी ने स्पष्ट किया कि परियोजनाओं की समयसीमा का पालन कराना अधिकारियों की जिम्मेदारी है। निर्माण एजेंसियों से तय समय में कार्य पूरा कराना सुनिश्चित किया जाए। मुख्यालय स्तर पर फाइल लंबित रहने पर भी उन्होंने नाराजगी जताई और प्रक्रिया में तेजी लाने को कहा।
जून में फिर होगी समीक्षा
एमडी ने बताया कि जून माह में एक बार फिर कार्यशाला आयोजित की जाएगी, जिसमें विशेष रूप से समय पर परियोजनाएं पूर्ण करने वाले जिलों को पुरस्कृत किया जाएगा।
साथ ही, जिलों में पदाधिकारियों की असमान संख्या को लेकर समानीकरण की आवश्यकता पर भी बल दिया गया। कार्यशाला की शुरुआत रविवार सुबह आर्ट आफ लिविंग सत्र से हुई, जिसके बाद तकनीकी सत्रों में परियोजनाओं की विस्तृत समीक्षा की गई।
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