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न सड़कें होंगी छलनी, न गंगा में गिरेगा गंदा पानी; पटना के 31 नाले I&D तकनीक से होंगे डायवर्ट

Published: Mon, 14 Sep 2026 08:53 AM (IST)

पटना में गंगा में सीधे गिरने वाले सीवेज को रोकने के लिए अब सड़कों की खुदाई के बिना इंटरसेप्शन एंड ...और पढ़ें

कंकड़बाग एसटीपी। सौ. बुडको

कंकड़बाग एसटीपी। सौ. बुडको

HighLights

  1. I&D तकनीक से गंगा में सीवेज गिरना रुकेगा।

  2. तीन नए STP और सात IPS बनेंगे पटना में।

  3. सड़कों की खुदाई के बिना प्रदूषण नियंत्रण होगा।

मनीष कुमार, पटना। बिहार की राजधानी पटना में गंगा में सीधे गिर रहे सीवेज पर रोक लगाने के लिए अब सड़कों और घनी गलियों में बड़े पैमाने पर खोदाई की जरूरत नहीं होगी।

दानापुर कैंट से मित्तन घाट तक गंगा में मिलने वाले 31 प्रमुख नालों को इंटरसेप्शन एंड डायवर्जन (आइएंडडी) तकनीक से जोड़ा जाएगा। नालों के पानी को गंगा में पहुंचने से पहले ही रोककर एसटीपी ले जाया जाएगा।

वहां उपचार के बाद ही पानी को नदी में छोड़ा जाएगा। इस परियोजना के तहत तीन नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) बनाने का प्रस्ताव है। इनकी उपचार क्षमता 34.8 करोड़ लीटर प्रतिदिन (एमएलडी) होगी।

प्रस्तावित एसटीपी दीघा नहर, मंदिरी और मित्तन घाट में बनाए जाएंगे। बिहार शहरी आधारभूत संरचना विकास निगम लिमिटेड (बुडको) के अनुसार, परियोजना का काम मानसून के बाद शुरू होगा। 2028 की शुरुआत तक काम पूरा करने का लक्ष्य है।

आइएंडडी तकनीक में नालों के अंतिम छोर पर विशेष इंटरसेप्शन स्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा। इससे गंदा पानी गंगा में सीधे गिरने के बजाय वहीं रोक लिया जाएगा। इसके बाद डाइवर्जन चैनल के माध्यम से सीवेज को एसटीपी तक पहुंचाया जाएगा।

इस व्यवस्था में शहर की सड़कों को खोदकर हर जगह नई सीवेज लाइन बिछाने की जरूरत कम होगी। परियोजना के तहत दीघा नहर, मंदिरी और मित्तन घाट के पास एसटीपी प्रस्तावित है।

तीनों प्लांट में सीवेज के उपचार के लिए एसबीआर (सीक्वेंसिंग बैच रिएक्टर) तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे नालों से आने वाले सीवेज का वैज्ञानिक तरीके से उपचार किया जा सकेगा।

सीवेज को नालों से एसटीपी तक पहुंचाने के लिए परियोजना में सात स्थानों दानापुर कैंट, दीघा घाट नाला, कुर्जी नाला, राजापुर नाला, मंदिरी नाला, अंटा घाट तथा मित्तन घाट पर इंटरमीडिएट पंपिंग स्टेशन (आइपीएस) बनाने का भी प्रस्ताव है, जिसकी कुल क्षमता प्रतिदिन 40.89 करोड़ लीटर होगी।

अलग-अलग इलाकों से आने वाले सीवेज को इन पंपिंग स्टेशनों पर एकत्र किया जाएगा। इसके बाद पंपिंग सिस्टम के माध्यम से उसे संबंधित एसटीपी तक पहुंचाया जाएगा।

कुर्जी और राजापुर नाले की सफल टैपिंग

कुर्जी और राजापुर नाले की टैपिंग सफल होने के बाद नई व्यवस्था की जा रही है। क्योंकि, इन दोनों नाले का गंदा पानी सीधे दीघा एसटीपी तक पहुंच रहा है। यहां रोजाना 4.50 करोड़ लीटर गंदे पानी का वैज्ञानिक तरीके से शोधन किया जा रहा है।

परियोजना का मुख्य उद्देश्य गंगा में सीधे गिरने वाले अनुपचारित सीवेज को रोकना है। 34.8 करोड़ लीटर प्रतिदिन की अतिरिक्त उपचार क्षमता तैयार होने से राजधानी में सीवेज शोधन की व्यवस्था मजबूत होगी।

इससे गंगा में प्रदूषण का दबाव कम होने के साथ पानी की गुणवत्ता में सुधार की उम्मीद है। साथ ही, तेजी से बढ़ते राजधानी के लिए भविष्य में सीवेज प्रबंधन की स्थायी व्यवस्था तैयार करने में भी मदद मिलेगी।

प्रस्तावित सात इंटरमीडिएट पंपिंग स्टेशन का विवरण

जगह क्षमता (प्रतिदिन करोड़ लीटर में)
दानापुर कैंट 1.05
दीघा घाट नाला 8.15
कुर्जी नाला 6.25
राजापुर नाला 8.67
मंदिरी नाला 13.69
अंटा घाट 2.21
मित्तन घाट 0.85

प्रस्तावित तीन एसटीपी का विवरण

जगह क्षमता (प्रतिदिन लीटर में) लागत (करोड़ में)
दीघा नहर 8.5 करोड़ 187.17
मंदिरी 24.5 करोड़ 616.55
मित्तन घाट 1.8 करोड़ 39.95

फायदे

  • गंगा में गंदा पानी जाने से रुकेगा, जलीय जीवों को मिलेगा लाभ।
  • नई सड़क और गलियों की बार-बार खुदाई से बचेगा शहर का इंफ्रास्ट्रक्चर।
  • नई पाइपलाइन का बड़ा नेटवर्क बिछाने के बजाय टैपिंग से लागत घटेगी।
  • सीवेज का वैज्ञानिक उपचार होने से संक्रमण और जलजनित बीमारियों का खतरा कम होगा।

एसटीपी की कुल क्षमता का 60.65 प्रतिशत ही उपयोग

राजधानी में निकलने वाले गंदे पानी के शोधन के लिए बनाए गए आठ सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) की कुल क्षमता 36.75 करोड़ लीटर प्रतिदिन है। वर्तमान में प्रतिदिन 22.29 करोड़ लीटर लीटर गंदे पानी का शोधन किया जा रहा है।

एसटीपी की कुल क्षमता का करीब 60.65 प्रतिशत उपयोग हो रहा है। एसटीपी के माध्यम से शहर के विभिन्न इलाकों से निकलने वाले सीवेज को ट्रीट किया जाता है, ताकि बिना शोधन के गंदा पानी सीधे नदियों और जलस्रोतों में नहीं पहुंचे।

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