'मास्टर साहब रील्स देख रहे हैं, परेशान मत करो!' पूर्णिया के सरकारी स्कूल से सामने आई शर्मनाक तस्वीर
Purnia Government School Teacher Viral Photo: पूर्णिया के एक सरकारी स्कूल में शिक्षकों की घोर लापरवाही सामने आई है, जहां ...और पढ़ें

Purnia Government School Teacher Viral Photo: क्लास में खर्राटे और मोबाइल पर रील्स
HighLights
शिक्षक क्लास में सोते और मोबाइल पर रील्स देखते मिले।
मध्याह्न भोजन के समय बच्चों की निगरानी में लापरवाही।
ग्रामीणों ने दोषी शिक्षकों के निलंबन की कड़ी मांग की।
जागरण संवाददाता, पूर्णिया। Purnia Government School Teacher Viral Photo: "मास्टर साहब रील्स देख रहे हैं और खर्राटे ले रहे हैं, कोई इन्हें परेशान मत करो!" यह तंज उन आक्रोशित ग्रामीणों का है, जिन्होंने पूर्णिया जिले के रुपौली प्रखंड स्थित बड़ी शिशवा प्राथमिक विद्यालय में शिक्षकों की घोर लापरवाही को रंगे हाथ पकड़ा।
शिक्षा के मंदिर में जब बच्चों के हाथों में किताबें और स्लेट होनी चाहिए थी, तब शिक्षक क्लासरूम को ही अपना बेडरूम बनाकर बेपरवाह सोते और मोबाइल स्क्रीन स्क्रॉल करते कैमरे में कैद हुए।
मंगलवार को जब ग्रामीणों की शिकायत पर विद्यालय का औचक जायजा लिया गया, तो भीतर का नजारा किसी को भी हैरान कर देने वाला था। एक शिक्षक कक्षा की बेंच पर टांगें पसारकर और डेस्क पर बच्चों की किताबें रखकर गहरी नींद में खर्राटे ले रहे थे। वहीं, उनके बगल में बैठे दूसरे शिक्षक अपने स्मार्टफोन पर रील्स देखने में इतने खोए थे कि सामने से तस्वीरें और वीडियो बनाए जाने पर भी उनकी तंद्रा भंग नहीं हुई।
मध्याह्न भोजन के समय भटकते रहे भूखे नौनिहाल
यह शर्मनाक स्थिति उस समय देखने को मिली, जब स्कूल में मध्याह्न भोजन (MDM) परोसा जा रहा था। नियमानुसार शिक्षकों को बच्चों की कतारों के पास खड़े होकर भोजन की गुणवत्ता और वितरण की निगरानी करनी चाहिए थी।
मगर हकीकत यह थी कि बच्चे बिना किसी देखरेख के स्कूल परिसर में इधर-उधर लावारिसों की तरह भटक रहे थे। ग्रामीणों का कहना है कि यह इस विद्यालय की कोई एक दिन की कहानी नहीं है, बल्कि यहां का यही रोज का ढर्रा बन चुका है। शिक्षक या तो खर्राटे लेते मिलते हैं या फिर पूरा दिन मोबाइल चलाने में गुजार देते हैं।
लोकल हैं शिक्षक, मेरी सुनते ही नहीं'- प्रधानाध्यापिका
मामले की गंभीरता तब और बढ़ गई जब विद्यालय की प्रधानाध्यापिका श्वेता भारती ने अपनी बेबसी सार्वजनिक कर दी। उन्होंने बताया, "मैं एक साल से यहां प्रधानाध्यापिका हूं और इन शिक्षकों की कार्यप्रणाली को लेकर कई बार नोटिस देकर थक चुकी हूं। मैं खुद बाहर की रहने वाली हूं, जबकि ये दोनों शिक्षक स्थानीय (लोकल) हैं।
इसी क्षेत्रीय रसूख के कारण ये कभी बच्चों को पढ़ाते ही नहीं हैं; सिर्फ कुर्सियों और बेंचों पर आराम फरमाते हैं।" प्रधानाध्यापिका के इस बयान ने यह स्पष्ट कर दिया कि विभागीय अनुशासन स्थानीय दबंगई के आगे पूरी तरह लाचार हो चुका है।
ग्रामीणों ने की निलंबन और कठोर कार्रवाई की मांग
शिक्षकों के इस गैर-जिम्मेदाराना रवैये की तस्वीर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है, जिससे शिक्षा विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अभिभावकों का कहना है कि गरीब तबके के बच्चे बेहतर भविष्य की उम्मीद लेकर सरकारी स्कूल आते हैं, लेकिन शिक्षकों की यह संवेदनहीनता नौनिहालों के भविष्य को अंधकार में धकेल रही है।
ग्रामीणों ने जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO), पूर्णिया और प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (BEO), रुपौली से मांग की है कि मामले की अविलंब जांच कराकर दोनों दोषी शिक्षकों को निलंबित किया जाए ताकि स्कूल की शैक्षणिक व्यवस्था पटरी पर लौट सके।
