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    'ऐन वक्त पर...', JP Associates मामले में वेदांता को झटका; अदाणी से कहां पीछे रहे अनिल अग्रवाल? CoC ने किया क्लियर

    Updated: Mon, 20 Apr 2026 09:15 PM (IST)

    Adani Vedanta JP Associates: कर्ज में डूबी जयप्रकाश एसोसिएट्स को खरीदने की रेस में वेदांता को झटका लगा है। एनसीएलएटी में बैंकों ने अदाणी को चुनने में ...और पढ़ें

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    JP Associates मामले में वेदांता को झटका; अदाणी से कहां पीछे रहे अनिल अग्रवाल?

    नई दिल्ली| कर्ज में डूबी जयप्रकाश एसोसिएट्स (Adani Vedanta JP Associates) को खरीदने की रेस अब अदालती दांव-पेंच में फंस गई है। सोमवार को नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) में बैंकों और वित्तीय संस्थानों (CoC) ने साफ कर दिया कि उन्होंने गौतम अदाणी की कंपनी को चुनने में (Adani wins Jaypee bid) कोई पक्षपात नहीं किया है। 

    सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बैंकों का पक्ष रखते हुए कहा कि पूरी प्रक्रिया एकदम पारदर्शी और निष्पक्ष थी।

    वेदांता और अदाणी के बीच फंसा पेंच

    इस मामले में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब अनिल अग्रवाल की 'वेदांता लिमिटेड' ने इस नीलामी को चुनौती दी। वेदांता का दावा है कि उनका संशोधित ऑफर अदाणी एंटरप्राइजेज की तुलना में 3,400 करोड़ रुपये ज्यादा है। लेकिन बैंकों ने इसे मानने से इनकार कर दिया।

    इन 3 पॉइंट्स से जीते गौतम अदाणी

    सॉलिसिटर जनरल ने ट्रिब्यूनल को 3 पॉइंट्स में समझाया कि आखिर गौतम अदाणी ने बोली कैसे जीती।

    • अदाणी की बढ़त: कुल मूल्यांकन (Total Evaluation) में गौतम अदाणी की कंपनी सबसे आगे रही।
    • अनिल अग्रवाल का स्कोर: हालांकि वेदांता को 'नेट प्रेजेंट वैल्यू' (NPV) के आधार पर ज्यादा नंबर मिले थे, लेकिन ओवरऑल स्कोर में अदाणी ने बाजी मार ली।
    • देरी से आया ऑफर: वेदांता ने अपना नया और बढ़ा हुआ ऑफर तब दिया, जब बोली लगाने की समय सीमा (चैलेंज प्रोसेस) खत्म हो चुकी थी।

    बैंकों ने क्यों ठुकराया अनिल अग्रवाल का ऑफर?

    अनिल अग्रवाल की कंपनी ने 8 नवंबर, 2025 को अपनी बोली में सुधार किया था। उन्होंने इक्विटी निवेश को 400 करोड़ से बढ़ाकर 800 करोड़ रुपए करने का प्रस्ताव दिया। लेकिन बैंकों की समिति (CoC) का कहना है कि,

    अगर वे इस स्तर पर वेदांता की बात मान लेते, तो पूरी नीलामी प्रक्रिया फिर से शुरू करनी पड़ती। इससे जेपी एसोसिएट्स के कर्ज समाधान में भारी देरी होती।"

    "प्रक्रिया को चुनौती नहीं दे सकते..."

    तुषार मेहता ने सख्त लहजे में कहा कि, कोई भी कंपनी सिर्फ इसलिए पूरी प्रक्रिया को चुनौती नहीं दे सकती कि वह बाद में ज्यादा पैसे देने को तैयार है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि ऐन वक्त पर बोली बदलना दिवालिया प्रक्रिया की मर्यादा को खत्म करता है।

    कानूनी पक्ष और अगली सुनवाई

    वरिष्ठ वकील निरंजन रेड्डी ने भी स्पष्ट किया कि बोली लगाने के नियम पहले से तय थे। सभी कंपनियों को पता था कि अंतिम वित्तीय प्रस्ताव के बाद कोई बदलाव नहीं होगा। वेदांता ने फिलहाल NCLT के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें 14,535 करोड़ रुपए की अदाणी की बोली को मंजूरी दी गई थी। अब मंगलवार को गौतम अदाणी की कंपनी अपना पक्ष रखेगी।

    अब देखना यह होगा कि कोर्ट अनिल अग्रवाल की 'ज्यादा पैसे' वाली दलील को मानता है या बैंकों के 'नियमों' वाले तर्क को।