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बिल गेट्स: कंप्यूटर के लिए जुनून ने बनाया दुनिया का सबसे अमीर शख्स, कभी सड़क के ट्रैफिक का डेटा करते थे रिकॉर्ड

Published: Wed, 28 Oct 2026 12:32 PM (IST)

बिल गेट्स की कहानी सिर्फ अमीरी की नहीं, बल्कि सही समय पर बदलती दुनिया को पहचानने की है। उन्होंने माइक्रोसॉफ्ट ...और पढ़ें

आज है बिल गेट्स का बर्थडे

आज है बिल गेट्स का बर्थडे

HighLights

  1. बदलती दुनिया को पहचान कर माइक्रोसॉफ्ट की नींव रखी

  2. Altair 8800 ने पर्सनल कंप्यूटिंग की दिशा बदली

  3. IBM डील से माइक्रोसॉफ्ट वैश्विक सॉफ्टवेयर दिग्गज बनी

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। एक समय दुनिया के सबसे अमीर शख्स रहे बिल गेट्स की कहानी सिर्फ अमीरी की कहानी नहीं, बल्कि सही समय पर बदलती दुनिया को पहचान लेने की कहानी है। 28 अक्टूबर 1955 को जन्मे विलियम हेनरी गेट्स III ने कंप्यूटर को महज मशीन नहीं, बल्कि आने वाले दौर का सबसे बड़ा औजार माना।
स्कूल के दिनों से शुरू हुई उनकी कंप्यूटर में दिलचस्पी आगे चलकर माइक्रोसॉफ्ट और पर्सनल कंप्यूटिंग की दुनिया बदलने वाली ताकत बनी। कैसा रहा उनका सफर, आइए बताते हैं।

कंप्यूटर की दुनिया का एक बड़ा नाम

28 अक्टूबर 1955 को अमेरिका के सिएटल में जन्मे बिल गेट्स ने बचपन में ही यह समझ लिया था कि कंप्यूटर आने वाले समय को बदल सकते हैं। लेकसाइड स्कूल में पढ़ाई के दौरान महज 13 साल की उम्र में उन्हें कंप्यूटर के साथ काम करने का मौका मिला।
यहीं उनकी मुलाकात पॉल एलन से हुई और दोनों की दोस्ती आगे चलकर कारोबारी साझेदारी में बदल गई। गेट्स घंटों कंप्यूटर पर प्रोग्रामिंग करते और नई चीजें सीखते रहते थे।

क्या था पहला कारोबार?

माइक्रोसॉफ्ट से पहले गेट्स और पॉल एलन ने Traf-O-Data नाम का कारोबार शुरू किया था। इसका मकसद सड़कों पर गुजरने वाले ट्रैफिक के आंकड़ों को रिकॉर्ड और प्रोसेस करना था, ताकि ट्रैफिक व्यवस्था की योजना बनाने में मदद मिल सके।
कारोबार बहुत बड़ी आर्थिक सफलता नहीं बना, लेकिन इसने दोनों को यह सिखाया कि कंप्यूटर प्रोग्रामिंग को वास्तविक कारोबारी समस्या के समाधान में कैसे बदला जा सकता है। यही अनुभव आगे माइक्रोसॉफ्ट की नींव मजबूत करने में काम आया।

Altair 8800 ने बदल दी दिशा

1975 में एक पत्रिका के कवर पर Altair 8800 नाम का शुरुआती पर्सनल कंप्यूटर किट आया। गेट्स और एलन ने इसमें भविष्य देख लिया। दोनों ने Altair के लिए BASIC प्रोग्रामिंग भाषा का संस्करण तैयार किया और उसके निर्माता MITS को सॉफ्टवेयर उपलब्ध कराया।
इसी मौके ने उन्हें यह भरोसा दिया कि भविष्य सिर्फ कंप्यूटर बनाने वालों का नहीं, बल्कि कंप्यूटर चलाने वाले सॉफ्टवेयर का भी है। 1975 में दोनों ने उस कारोबार को औपचारिक रूप से Micro-Soft के रूप में आगे बढ़ाया।

IBM के साथ सौदा और Microsoft की उड़ान

गेट्स की असली कारोबारी सफलता सिर्फ अच्छा सॉफ्टवेयर बनाने में नहीं, बल्कि उसे सही बाजार तक पहुंचाने में थी। 1980 में माइक्रोसॉफ्ट ने IBM के पहले पर्सनल कंप्यूटर के लिए ऑपरेटिंग सिस्टम उपलब्ध कराने का समझौता किया। इसके बाद कंपनी का सॉफ्टवेयर तेजी से कंप्यूटर उद्योग में फैलने लगा।
इसके बाद 1985 में Windows आया और अगले कुछ वर्षों में माइक्रोसॉफ्ट पर्सनल-कंप्यूटर सॉफ्टवेयर की दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों में शामिल हो गई। गेट्स ने टेक्नोलॉजी, कारोबार और बाजार की जरूरत - इन तीनों को एक साथ जोड़कर अपनी कंपनी को असाधारण ऊंचाई तक पहुंचाया।

कारोबारी साम्राज्य से चैरिटी तक

माइक्रोसॉफ्ट की कामयाबी ने गेट्स को दुनिया के सबसे अमीर लोगों में शामिल कर दिया और वह कई बार दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति भी रहे। लेकिन उनकी कहानी का दूसरा बड़ा अध्याय चैरिटी है। माइक्रोसॉफ्ट की रोजमर्रा की जिम्मेदारियों से पीछे हटने के बाद उन्होंने अपना अधिक समय वैश्विक स्वास्थ्य, शिक्षा और गरीबी जैसे मुद्दों पर काम करने में लगाया।
आज बिल गेट्स की विरासत सिर्फ Windows या Microsoft तक सीमित नहीं है। उनकी सबसे बड़ी सीख यह है कि भविष्य की दिशा को दूसरों से पहले पहचानना, लगातार सीखना और उस विचार को बड़े पैमाने पर लागू करना सफलता की ताकत बन सकता है। आज बिल गेट्स दुनिया के 16वें सबसे अमीर शख्स हैं। उनकी दौलत 11.3 लाख करोड़ रुपये है।

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