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BSE का इतिहास: न दफ्तर था, न ट्रेडिंग स्क्रीन! 170 साल पहले पेड़ के नीचे शुरू हुआ कारोबार, बना एशिया का सबसे पुराना एक्सचेंज

Updated: Sat, 29 Aug 2026 05:23 PM (IST)

BSE History: बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सफर 1855 में मुंबई में एक पेड़ के नीचे 22 ब्रोकर्स की बैठक ...और पढ़ें

जिस BSE में आज होते हैं करोड़ों के सौदे, कभी बरगद के नीचे सजता था उसका दरबार; कैसे बना एशिया का सबसे पुराना एक्सचेंज?

जिस BSE में आज होते हैं करोड़ों के सौदे, कभी बरगद के नीचे सजता था उसका दरबार; कैसे बना एशिया का सबसे पुराना एक्सचेंज?

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बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| साल-1855। जगह- मुंबई का टाउन हॉल। जहां न कोई चमचमाती स्क्रीन थी, न एयर कंडीशनर वाला दफ्तर, न इंटरनेट और न ही पलक झपकते होने वाले सौदे। स्टॉक मार्केट का नाम सुनते ही आज जो तस्वीर हमारे जहन में उभरती है, आज से करीब 171 साल पहले उसकी हकीकत बिल्कुल उलट थी। मुंबई में टाउन हॉल के सामने एक पेड़ के नीचे 22 स्टॉकब्रोकर्स की एक छोटी सी बैठक से जो सिलसिला शुरू हुआ, उसने आगे चलकर एशिया के सबसे पुराने स्टॉक एक्सचेंज की नींव रखी। जिसे आज हम और आप बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज यानी BSE के नाम से जानते हैं।

यह कहानी सिर्फ एक बिल्डिंग या संस्था की नहीं है, बल्कि इंडियन कैपिटल मार्केट के 171 सालों से ज्यादा के संघर्ष, बदलाव और कायापलट की है। डॉ. मयूर शाह ने अपनी किताब 'स्थितप्रज्ञ' में BSE के इसी इतिहास (BSE History) का पूरा वर्णन किया है। चलिए समझते हैं कि BSE का पूरा इतिहास।

पेड़ के नीचे से दलाल स्ट्रीट तक का सफर

शुरुआती दौर में दलालों की संख्या बढ़ने लगी, तो जगह कम पड़ने लगी। कई बार स्थान बदलने के बाद आखिरकार 1874 में यह बाजार दलाल स्ट्रीट में ट्रांसफर हो गया। इसके अगले ही साल 1875 में एक आधिकारिक संगठन का गठन किया गया, जिसे नाम दिया- द नेटिव शेयर एंड स्टॉक ब्रोकर्स एसोसिएशन।

सालों तक इसी नाम से काम करने के बाद 31 अगस्त 1957 को (आज से करीब 140 साल पहले) भारत सरकार ने इसे सिक्योरिटीज कॉन्ट्रैक्ट्स रेगुलेशन एक्ट, 1956 के तहत पहले स्टॉक एक्सचेंज के रूप में मान्यता दी। तब जाकर यह दलाल स्ट्रीट के फिरोज जीजीभॉय टावर्स में शिफ्ट हुआ, जो आज भारतीय शेयर बाजार का सबसे बड़ा प्रतीक है।"

जब 140 साल पुराना BSE बना हाई-टेक स्टार्टअप

समय बीतने के साथ BSE ने कई उतार-चढ़ाव देखे। 2009 आते-आते यह दिग्गज संस्था अपनी ही विरासत के बोझ तले दबने लगी थी। तकनीकी तौर पर यह पिछड़ रहा था और कई कर्मचारी व कंपनियां निराश होने लगे थे। ऐसे में जरूरत थी एक आमूलचूल बदलाव की।

नवंबर 2012 में जब नए प्रबंधन (प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी) ने कमान संभाली, तो एक नया विजन तैयार हुआ। लक्ष्य था- BSE को सिर्फ एक पुरानी संस्था से निकालकर एक अत्याधुनिक और पारदर्शी फिनटेक कंपनी बनाना। पुरानी सोच को बदला गया। इसका नतीजा यह हुआ कि 140 साल पुराना यह संगठन एक 9-वर्षीय हाई-टेक स्टार्टअप जैसी ऊर्जा के साथ काम करने लगा।

6 माइक्रोसेकंड की रफ्तार और ऐतिहासिक IPO

बदलाव के इस दौर ने BSE को दुनिया का सबसे तेज एक्सचेंज बना दिया, जिसका प्रतिक्रिया समय (Response Time) मात्र 6 माइक्रोसेकंड रह गया। 2012 में BSE का मूल्य 15 अरब रुपए था, जो 2014 तक 44 अरब रुपए, 2017 तक 64.6 अरब रुपए और आज करीब 5.8 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया।

इसी भरोसे का परिणाम था कि जब जनवरी 2017 में BSE ने अपना IPO लाने की घोषणा की, तो निवेशकों ने इसे हाथों-हाथ लिया। बिना किसी बड़े रोड-शो के भी 10 लाख से अधिक आवेदन आए और यह ऐतिहासिक IPO 51 गुना सब्सक्राइब हुआ।

शेयर ही नहीं, अब हर वित्तीय जरूरत का अड्डा

BSE सिर्फ इक्विटी तक सीमित नहीं रहा। इसने BSE SME प्लेटफॉर्म लॉन्च किया, जिसने 300 से ज्यादा छोटी-बड़ी कंपनियों को लिस्ट कर मार्केट लीडर का ताज पहना। वहीं, BSE स्टार MF के जरिए यह म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूशन का सबसे बड़ा डिजिटल प्लेटफॉर्म बन गया।

9 जनवरी 2017 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात की गिफ्ट सिटी (GIFT City) में भारत के पहले अंतरराष्ट्रीय एक्सचेंज इंडिया INX का उद्घाटन किया, जो BSE की ही पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी है। आज बीएसई का मार्केट कैप करीब ₹4,91,54,107 करोड़ है। इसमें करीब 5,213 कंपनियां लिस्टेड हैं। जिनमें से करीब 4724 कंपनियों में आप ट्रेडिंग कर सकते हैं।"

एक पेड़ के नीचे शुरू हुई यह कहानी आज पॉवर एक्सचेंज, इंश्योरेंस ब्रोकिंग और अत्याधुनिक कमोडिटी डेरिवेटिव्स तक पहुंच चुकी है। BSE का यह सफर बताता है कि अगर सही नीयत और नई तकनीक का साथ हो, तो इतिहास के पन्नों से निकलकर भविष्य की सबसे मजबूत इबारत लिखी जा सकती है।

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