ईरान के बाद अमेरिका ने भी दी गुड न्यूज, रूसी तेल के लिए बढ़ाई छूट; कच्चा तेल धड़ाम, पेट्रोल डीजल सस्ता होगा?
वैश्विक तेल बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच ईरान और अमेरिका के फैसलों से कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई है। ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को व्यावसायिक जह ...और पढ़ें

अमेरिका ने कुछ रूसी तेल व्यापारों के लिए छूट बढ़ाई।
नई दिल्ली। वैश्विक तेल बाजार इन दिनों उतार-चढ़ाव के दौर से गुजर रहा है। इसी बीच दो बड़ी खबरें सामने आई हैं, जिन्होंने कच्चे तेल की कीमतों पर असर डालने की उम्मीद बढ़ा दी है। पहले ईरान की ओर से राहत भरी खबर आई और अब अमेरिका ने भी रूसी तेल को लेकर एक अहम फैसला लिया है। इन दोनों खबर के बद कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट देखी गई है। इससे यह कयास लगाए जा रहे हैं कि पेट्रोल-डीजल (Petrol Diesel Price) सस्ता होगा।
सबसे पहले बात करें ईरान की, तो वहां के विदेश मंत्री ने कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) अब फिर से व्यावसायिक जहाजों के लिए खोल दिया गया है। हालांकि, उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि जहाजों को सुरक्षित तय रास्तों (safe lanes) का ही इस्तेमाल करना होगा। यह रास्ता दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है, इसलिए इसके खुलने से वैश्विक सप्लाई में सुधार की उम्मीद है।
अमेरिका ने रूसी तेल के लिए छुठ बढ़ाई
अब बात अमेरिका की। अमेरिकी प्रशासन ने रूस के तेल को लेकर एक महत्वपूर्ण छूट (US extends waiver for some Russian oil trades) को बढ़ा दिया है। इसके तहत उन देशों को राहत दी गई है, जो पहले से समुद्र में लदे रूसी तेल और पेट्रोलियम उत्पाद खरीदना चाहते हैं। नई छूट के अनुसार, 17 अप्रैल तक जहाजों पर लोड किए गए रूसी तेल को 16 मई तक खरीदा जा सकेगा।
US ट्रेजरी डिपार्टमेंट ने शुक्रवार देर रात एक नया लाइसेंस जारी किया, जिससे देशों को 17 अप्रैल से 16 मई के बीच जहाज़ों पर लादे गए रूसी तेल को खरीदने की अनुमति मिल गई। इस कदम से 11 अप्रैल को खत्म हुई पिछली 30-दिन की छूट को रिन्यू और रिप्लेस किया गया है।
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट
अंतर्राष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 10% से ज्यादा गिरकर $88.8 प्रति बैरल (Crude Oil Price Crashes) पर आ गया। यह पिछले महीने के $119 के उच्चतम स्तर से काफी नीचे है, लेकिन फिर भी युद्ध से पहले के $72 के स्तर से काफी ऊपर है।
ईरान और अमेरिका द्वारा ऐसे समय में फैसला लिया गया है जब वैश्विक ऊर्जा बाजार पहले से ही तनाव में है। इससे पहले भी एक महीने की छूट दी गई थी, जो 11 अप्रैल को खत्म हो गई थी। दिलचस्प बात यह है कि कुछ दिन पहले अमेरिकी अधिकारियों ने संकेत दिया था कि इस राहत को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा, लेकिन अब फैसले में बदलाव देखने को मिला है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के फैसले का मकसद वैश्विक बाजार में सप्लाई को बनाए रखना और कीमतों को नियंत्रित करना है। इससे पहले मार्च में ईरान से जुड़े एक फैसले के तहत करीब 14 करोड़ बैरल तेल बाजार में पहुंचा था, जिससे सप्लाई का दबाव कुछ हद तक कम हुआ था।
हालांकि, इन राहतों को लेकर अमेरिका के अंदर भी विरोध देखने को मिला है। कुछ नेताओं का कहना है कि इससे रूस और ईरान जैसे देशों की अर्थव्यवस्था को अप्रत्यक्ष रूप से फायदा मिल सकता है, जबकि उन पर पहले से ही प्रतिबंध लगे हुए हैं।
10 करोड़ बैरल कच्चा तेल बाजार में आ सकता है
रूस की ओर से भी दावा किया गया था कि इस तरह की छूट से करीब 10 करोड़ बैरल कच्चा तेल बाजार में आ सकता है, जो वैश्विक उत्पादन के एक दिन के बराबर है।
इन सबके बावजूद, तेल की कीमतें अभी भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। इसकी बड़ी वजह हाल ही में होर्मुज जलडमरूमध्य में आई बाधाएं हैं, जिसने सप्लाई चेन को प्रभावित किया।
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