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    GST कटौती नहीं आई काम! अचानक 15% तक महंगे हुए फ्रिज-AC-TV, लैपटॉप और रोजमर्रा के सामान?

    Updated: Sat, 18 Apr 2026 01:20 PM (IST)

    पिछले साल की GST कटौती का लाभ खत्म हो रहा है, क्योंकि अप्रैल तक AC, रेफ्रिजरेटर, वाशिंग मशीन, टीवी और स्मार्टफोन महंगे हो जाएंगे। कच्चे तेल के डेरिवेट ...और पढ़ें

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    नई दिल्ली। पिछले साल खपत कर (GST) में हुई कटौती के बाद ग्राहकों को जो राहत मिली थी, वह अब पूरी तरह से खत्म होती दिख रही है। अप्रैल के अंत तक एयर कंडीशनर (AC), रेफ्रिजरेटर, वाशिंग मशीन, टेलीविजन और स्मार्टफोन की कीमतों में भारी उछाल आने वाला है। कच्चे तेल के डेरिवेटिव (जैसे प्लास्टिक) और मेमोरी चिप्स जैसे महत्वपूर्ण पुर्जों की बढ़ती लागत के कारण यह पिछले चार महीनों में कीमतों में होने वाली तीसरी बढ़ोतरी है।

    इलेक्ट्रॉनिक्स और गैजेट्स की कीमतों में कितनी होगी बढ़ोतरी?

    लगातार बढ़ रही निर्माण लागत के कारण कंपनियों के पास दाम बढ़ाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। एक प्रमुख राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स रिटेल चेन के मुख्य कार्यकारी के अनुसार कीमतों में कुछ इस प्रकार इजाफा होने वाला है।

    • घरेलू उपकरण और टेलीविजन: 5-7% की बढ़ोतरी।
    • स्मार्टफोन और मोबाइल: 10-15% का भारी उछाल।
    • लैपटॉप: 8-10% की वृद्धि।
    • लगातार हो रही इस मूल्य वृद्धि से चिंताएं बढ़ रही हैं, क्योंकि इससे ग्राहकों की मांग पर नकारात्मक असर पड़ने का पूरा खतरा है।

    प्रमुख कंपनियों की क्या है तैयारी?

    ब्लू स्टार

    ब्लू स्टार (Blue Star) कंपनी के प्रबंध निदेशक बी. त्यागराजन ने बताया कि हाल ही में 6% की बढ़ोतरी के बाद, जल्द ही 6-7% की और बढ़ोतरी की जा सकती है। उन्होंने कहा, "कच्चे तेल से जुड़े प्लास्टिक जैसे डेरिवेटिव्स की कीमतें अभी भी उच्च स्तर पर हैं। यदि गर्मियों में मांग बढ़ती है, तो अगले सप्ताह ही कीमतों में अगला उछाल आ सकता है।"

    हायर इंडिया

    हायर इंडिया (Haier India) के अध्यक्ष सतीश एनएस ने कहा कि कंपनी 21 अप्रैल से सभी उत्पादों पर 4-7% अतिरिक्त मूल्य वृद्धि लागू करने की योजना बना रही है। टीवी निर्माता भी अगले महीने की शुरुआत तक 6-8% बढ़ोतरी का दबाव बना रहे हैं।

    आखिर क्यों लग रहा है महंगाई का यह तीसरा झटका?

    1. जनवरी-फरवरी के समय इनपुट लागत में वृद्धि, रुपये में गिरावट और AC के लिए नए ऊर्जा रेटिंग नियमों के कारण पहली बढ़ोतरी होना।

    2. मार्च-अप्रैल के समय माल ढुलाई की उच्च लागत, रुपये की अतिरिक्त कमजोरी और खाड़ी देशों में भू-राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे तेल से जुड़े इनपुट्स और महंगे हो गए।

    3. मेमोरी चिप्स का संकट से लैपटॉप, स्मार्टफोन और टीवी के लिए, मेमोरी चिप्स की कीमतों में तेज उछाल एक बड़ी चुनौती बन गया है। यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी मजबूत मांग और सप्लाई चेन की बाधाओं का नतीजा है।

    क्या स्मार्टफोन बाजार पर पड़ेगा इसका भारी असर?

    काउंटरपॉइंट रिसर्च के डायरेक्टर तरुण पाठक के अनुसार, इसका सीधा और नकारात्मक असर स्मार्टफोन बाजार पर देखने को मिलेगा। अप्रैल-जून की अवधि में स्मार्टफोन की बिक्री में दोहरे अंकों (double-digit) की गिरावट आने की आशंका है, क्योंकि महंगी मेमोरी और एंट्री-लेवल ग्राहकों की कमजोर मांग बाजार पर भारी पड़ रही है।

    पूरे साल के लिए बाजार में लगभग 10% की कमी का अनुमान है। लगातार बढ़ती कंपोनेंट लागत (विशेषकर मेमोरी) के कारण स्मार्टफोन खरीदना महंगा हो रहा है, जिससे लोग अपने पुराने फोन को ही ज्यादा लंबे समय तक इस्तेमाल करने पर मजबूर हैं।

    क्या रोजमर्रा के सामान और साबुन-सर्फ भी हो रहे हैं महंगे?

    महंगाई का यह ट्रेंड केवल महंगे इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स तक सीमित नहीं है; रोजमर्रा के उपयोग की वस्तुएं (FMCG) भी इसकी चपेट में हैं। पाम ऑयल और कच्चे तेल से जुड़े डेरिवेटिव जैसे पॉलीप्रोपाइलीन और लीनियर अल्काइल बेंजीन की लागत बढ़ने से कंपनियां इसका बोझ ग्राहकों पर डाल रही हैं।

    हिंदुस्तान यूनिलीवर (HUL) ने चुनिंदा साबुन और डिटर्जेंट की कीमतों में 1 रुपये से लेकर 20 रुपये तक की बढ़ोतरी की है। डिटर्जेंट के मामले में जनवरी के बाद यह दूसरी बढ़ोतरी है। कई कंपनियां छोटे पैकेट्स की कीमतें तो नहीं बढ़ा रही हैं, लेकिन ग्राहकों को बिना बताए पैकेट के अंदर सामान (वजन) कम कर रही हैं।

    विप्रो कंज्यूमर केयर के मुख्य कार्यकारी नीरज खत्री ने बताया, "पाम ऑयल और इसके डेरिवेटिव्स की कीमतों में तेज उछाल के कारण साबुन निर्माताओं को कीमतें बढ़ाने के लिए मजबूर होना पड़ा है। पाम ऑयल की कीमतें 20% से अधिक बढ़ गई हैं। इसके अलावा कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण पैकेजिंग, ऊर्जा और परिवहन लागत का भी भारी दबाव है।"