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पूरी तरह प्राइवेट हो जाएगा IDBI Bank, फिर कर्मचारियों की पेंशन और हितों का क्या होगा? सरकार ने दिया ये जवाब

Published: Fri, 16 Oct 2026 06:51 PM (IST)

भारत सरकार ने IDBI बैंक की रणनीतिक बिक्री को मंजूरी दे दी है, जिसके बाद यह निजी हाथों में चला ...और पढ़ें

सरकार IDBI बैंक की रणनीतिक बिक्री को मंजूरी दे चुकी है।

सरकार IDBI बैंक की रणनीतिक बिक्री को मंजूरी दे चुकी है।

HighLights

  1. सरकार ने IDBI बैंक की रणनीतिक बिक्री को मंजूरी दी।

  2. कर्मचारियों की सेवा शर्तें और पेंशन लाभ सुरक्षित रहेंगे।

  3. बैंक यूनियनों ने निजीकरण के फैसले का कड़ा विरोध किया।

नई दिल्ली। भारत सरकार ने IDBI बैंक की रणनीतिक बिक्री को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही यह बैंक अब पूरी तरह से निजी हाथों में चला जाएगा। सवाल है कि बैंक के कर्मचारियों के हितों और पेंशन का क्या होगा। इस मुद्दे पर सरकार ने जवाब दिया है। मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार, IDBI बैंक के बैंक कर्मचारियों की चिंताओं पर बात करते हुए, निवेश और सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग (DIPAM) के सचिव अरुणिश चावला ने कहा कि शेयर-खरीद समझौते की शर्तों के जरिए उनके मुद्दों का पूरी तरह से समाधान कर दिया गया है।

DIPAM सचिव ने क्या कहा?

मनीकंट्रोल को दिए एक इंटरव्यू में अरुणिश चावला ने कहा, "IDBI बैंक आज भी एक बैंकिंग कंपनी है। यह अन्य राष्ट्रीयकृत बैंकों से अलग है, इसे LIC द्वारा प्रमोट किया गया है। यहां RBI की मंजूरी से प्रबंधन (मैनेजमेंट) नियुक्त किया जाता है। आज भी, इसके कर्मचारियों की सेवा शर्तें बोर्ड द्वारा संबंधित कर्मचारी संघों के साथ परामर्श करके तय की जाती हैं। IDBI को एक 'गोइंग कंसर्न' (चालू इकाई) के रूप में पुनर्गठित किया जा रहा है।"

अरुणिश चावला ने कहा, "शेयर खरीद समझौते के तहत सभी मौजूदा कर्मचारियों की सेवा शर्तें पूरी तरह सुरक्षित हैं। साथ ही, सभी मौजूदा पेंशनभोगियों के पेंशन लाभ भी इस शेयर खरीद समझौते के जरिए पूरी तरह सिक्योर हैं।"

उन्होंने ने आगे कहा, "एक चालू इकाई के रूप में जब नया प्रमोटर आएगा, तब भी यह तथ्य नहीं बदलेगा कि यह एक बैंक द्वारा संचालित बैंकिंग कंपनी है। प्रबंधन और कर्मचारी संघों के बीच आपसी समझ, बातचीत और भरोसे के जरिए, यह बैंक कंपनी कानूनों और श्रम कानूनों के तहत काम करना जारी रखेगा।"

फैसले के विरोध में बैंक यूनियन

उधर, बैंक यूनियनों ने IDBI बैंक के निजीकरण के सरकार के फैसले का विरोध किया है। उनका आरोप है कि किसी विदेशी निवेशक को हिस्सेदारी बेचे जाने से सार्वजनिक क्षेत्र की बैंकिंग व्यवस्था कमजोर होगी। उन्होंने सरकार से इस फैसले को वापस लेने की मांग की है।

2019 में LIC ने खरीदा था स्टैक

IDBI बैंक जनवरी 2019 में ही प्राइवेट हो गया था। दरअसल,  2019 में जीवन बीमा निगम (LIC) ने IDBI बैंक में 51% हिस्सेदारी खरीद ली थी। क्योंकि भारत सरकार की प्रत्यक्ष (Direct) हिस्सेदारी 50% से कम हो गई थी, इसलिए भारतीय रिजर्व बैंक ने इसे नियमों के तहत 'प्राइवेट सेक्टर बैंक' की कैटेगरी में डाल दिया था।

चूंकि LIC खुद एक सरकारी संस्था है, इसलिए बैंक का असल कंट्रोल सरकार के पास ही रहा और इसकी कार्यप्रणाली काफी हद तक सरकारी बैंक जैसी ही बनी रही। लेकिन, अब सरकार के स्ट्रेटेजिक सेल के तहत इस बैंक का पूरी तरह से निजीकरण हो जाएगा।

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बता दें कि केंद्र सरकार ने 14 अक्टूबर को IDBI बैंक में 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी को कनाडा इंक (फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स की एक इकाई) को लगभग 53,000 करोड़ रुपये (5.6 अरब डॉलर) में बेचने की मंजूरी दे दी।