"हमारे खिलाफ कोई सुबूत नहीं, तुरंत बंद हो जांच"...भारत ने किया अमेरिका का विरोध; सेक्शन 301 से जुड़ा है मामला
भारत ने अमेरिका की 'सेक्शन 301' जांच का कड़ा विरोध किया है, जिसमें अनुचित व्यापारिक तरीकों के आरोप लगाए गए हैं। भारत ने इन आरोपों को खारिज करते हुए जा ...और पढ़ें

भारत ने अमेरिका को दिया जवाब

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नई दिल्ली। भारत ने अमेरिका की 'सेक्शन 301' जांच का कड़ा विरोध किया है। भारत ने अनुचित व्यापारिक तरीकों (Unfair Trade Practices) के आरोपों को खारिज करते हुए, इन जांचों को तत्काल समाप्त करने की मांग की है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) को सौंपे गए अपने जवाब में भारत ने मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर्स में एक्सेस स्ट्रक्चरल कैपेसिटी और उत्पादन से जुड़े आरोपों की जांच शुरू करने के नोटिस में लगाए गए सभी इल्जामों को पूरी तरह से खारिज किया है।
"कोई सबूत नहीं दिया गया"
भारत की ओर से कहा गया है कि "यह शुरुआती नोटिस कुल मैक्रोइकोनॉमिक संकेतकों पर आधारित है, जिसमें भारत सरकार के किसी भी विशेष काम, नीति या तरीके की पहचान नहीं की गई है, जिसे 'अनुचित या भेदभावपूर्ण' माना जा सके और जो 'अमेरिका के व्यापार पर बोझ डाले या उसे सीमित करे', जैसा कि एक्ट की धारा 301(b) के तहत जरूरी है,"।
भारत ने कहा है कि इस नोटिस में आरोपों के समर्थन में कोई "ठोस तर्क" या पहली नजर में कोई सबूत नहीं दिया गया है कि देश में ढांचागत रूप से जरूरत से ज्यादा क्षमता है, जिसकी वजह से अमेरिका के साथ व्यापार में बढ़त (Trade Surplus) हो रही है।
दोनों देश द्विपक्षीय व्यापार समझौते के लिए चर्चा में शामिल
भारत का कहना है कि मौजूदा जाँच, 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 301 और 302 के तहत इस जाँच को शुरू करने की जरूरतों को पूरा नहीं करती है। भारत USTR से आग्रह करता है कि वह इस पर नकारात्मक फैसला ले और इस जाँच को तुरंत समाप्त कर दे।
सरकार ने यह भी आग्रह किया कि व्यापार संबंधी चिंताओं का समाधान एकतरफा उपायों के बजाय चल रही द्विपक्षीय वार्ताओं के माध्यम से किया जाए, और यह भी बताया कि दोनों देश एक द्विपक्षीय व्यापार समझौते के लिए चर्चा में शामिल हैं।
भारत सहयोग को है तैयार
भारत के जवाब में आगे कहा गया है कि "भारत इस चल रही जाँच में, जिसमें कोई भी परामर्श शामिल है, अमेरिका के साथ रचनात्मक रूप से जुड़ने के लिए तैयार है।" इसके अलावा, 12 मार्च को शुरू की गई एक अन्य 'धारा 301' (Section 301) जाँच के जवाब में (जो जबरन मजदूरी के खिलाफ कार्रवाई करने में विफलता को लेकर है) भारत ने कहा कि यह जाँच शुरू करने के लिए जरूरी कानूनी शर्तों को पूरा नहीं करती है।
सरकार की ओर से वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने ये जवाब दाखिल किए हैं। भारत ने कहा कि उसके जवाबों में उसके उत्तर का पब्लिक और नॉन-कॉन्फिडेंशियल समरी शामिल है, जबकि इसका पूरा संस्करण अलग से गोपनीय रूप में दाखिल किया गया है।
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