Mark Mobius Dead: नहीं रहे भारत के मुरीद विदेशी अरबपति, रिस्की और डूबते बाजारों से कमाते थे अकूत दौलत!
उभरते बाजारों के दिग्गज निवेशक मार्क मोबियस का 89 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उन्हें 'इमर्जिंग मार्केट्स का इंडियाना जोन्स' कहा जाता था क्योंकि वे नि ...और पढ़ें

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
आईएएनएस, नई दिल्ली। उभरते बाजारों में निवेश की दुनिया के दिग्गज और मशहूर निवेशक मार्क मोबियस का 89 वर्ष की आयु में गुरुवार को निधन हो गया। उनके निधन से वैश्विक निवेश जगत को बड़ा झटका लगा है। डॉ. मोबियस को इमर्जिंग मार्केट्स का इंडियाना जोन्स कहा जाता था क्योंकि वे निवेश से पहले खुद उन देशों में जाकर हालात को समझने में विश्वास रखते थे। उनकी यही ऑन-ग्राउंड रिसर्च आधारित रणनीति उन्हें दूसरों से अलग बनाती थी।
आधिकारिक बयान के अनुसार, डॉ. मोबियस को उभरते बाजारों में शुरुआती निवेशकों में गिना जाता है। उन्होंने उन बाजारों में संभावनाएं खोजीं, जिन्हें दुनिया के बड़े निवेशक अक्सर नजरअंदाज कर देते थे।
अब कौन संभालेगा जिम्मेदारी?
मोबियस के निधन के बाद मोबियस इन्वेस्टमेंट्स में नेतृत्व की जिम्मेदारी अब पार्टनर जॉन निनिया और एरिक गुयेन संभालेंगे। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि निवेश की रणनीति और रोजमर्रा के कामकाज में कोई बदलाव नहीं होगा।
डॉ. मोबियस ने फ्रैंकलिन टेम्पलटन इन्वेस्टमेंट्स के साथ 30 से अधिक वर्षों तक काम किया और टेम्पलटन इमर्जिंग मार्केट्स ग्रुप के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन के रूप में पहचान बनाई। 1987 में उन्हें प्रसिद्ध निवेशक सर जॉन टेम्पलटन ने दुनिया के शुरुआती इमर्जिंग मार्केट फंड्स में से एक का नेतृत्व करने की जिम्मेदारी दी थी।
कंपनी की संपत्ति कई गुना बढ़ी
मोबियस के नेतृत्व में कंपनी की संपत्ति 100 मिलियन डॉलर से बढ़कर 50 बिलियन डॉलर तक पहुंच गई। उन्होंने एशिया, लैटिन अमेरिका, अफ्रीका और पूर्वी यूरोप में कई सफल निवेश फंड्स लॉन्च किए। डॉ. मोबियस ने वैश्विक नीतियों के निर्माण में भी योगदान दिया। वे विश्व बैंक के ग्लोबल कॉर्पोरेट गवर्नेंस फोरम से जुड़े रहे और 1999 में निवेशक उत्तरदायित्व कार्य बल के सह-अध्यक्ष भी रहे।
शिक्षा के क्षेत्र में भी उनका मजबूत आधार था। उन्होंने 1964 में मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से इकोनॉमिक्स और पॉलिटिकल साइंस में पीएचडी की। इसके अलावा उन्होंने बोस्टन यूनिवर्सिटी, यूनिवर्सिटी ऑफ विस्कॉन्सिन, सिरैक्यूज़ यूनिवर्सिटी, क्योटो यूनिवर्सिटी और यूनिवर्सिटी ऑफ़ न्यू मैक्सिको में भी अध्ययन किया।
भारत पर था भरोसा
मोबियस हमेशा से युवा आबादी और मजबूत खपत के कारण भारत पर बुलिश थे। मोबियस ईएम अपॉर्चुनिटी फंड फॉर इमर्जिंग मार्केट्स (ईएम) फंड चलाने वाले अरबपति कारोबारी का मानना था कि मौजूदा सुधारों और नीतिगत निरंतर के बने रहने से आने वाले समय में भारत तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है।
इस साल फरवरी में आईएएनएस के साथ हुई एक हालिया बातचीत में उन्होंने कहा कि युवा आबादी और तेजी से हो रहे शहरीकरण के साथ, भारत निर्यात बढ़ाने के अलावा उपभोक्ताओं का एक विशाल समूह तैयार कर रहा है। मोबियस ने अन्य प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में भारत की मजबूत विकास गति की ओर इशारा करते हुए कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापार को और अधिक विस्तार देगा और मजबूत करेगा।
''भारत की रहेगी हाई ग्रोथ रेट''
मोबियस ने कहा था, "युवा आबादी, तीव्र शहरीकरण, उच्च उपभोक्ता वृद्धि और मजबूत निर्यात भारत को उच्च विकास दर बनाए रखने में सक्षम बनाएंगे।" मोबियस के अनुसार, उन्हें विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की सूची में भारत की निरंतर बढ़ती रैंकिंग पर कोई आश्चर्य नहीं है।
दिग्गज निवेशक ने कहा था, "मुझे आश्चर्य नहीं है कि भारत विश्व की शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं की रैंकिंग में ऊपर चढ़ रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में 140 करोड़ की आबादी अब वैश्विक मानचित्र पर अपना उचित स्थान पुनः प्राप्त करने के लिए उत्सुक है।"
यूरोप के साथ डील पर क्या थी राय?
मोबियस ने आगे कहा था कि भारत जिस तरह की जीडीपी वृद्धि देख रहा है, उससे उसे जल्द ही विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने में मदद मिलेगी। मोबियस ने कहा, "वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद देश 6-7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज कर रहा है, जो इसकी अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शाता है। इससे भारत को आर्थिक विकास की सीढ़ियां चढ़ने में मदद मिलेगी।"
उन्होंने यह भी कहा था कि यूरोपीय संघ के साथ भारत के हालिया व्यापारिक संबंधों ने अमेरिका को भारत के साथ अपने समझौते को गति देने के लिए प्रेरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जब उनसे पूछा गया कि क्या प्रधानमंत्री मोदी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ अपने सौहार्दपूर्ण संबंधों के कारण अमेरिका से अनुकूल समझौता हासिल करने में सफल रहे, तो मोबियस ने कहा कि यह समझौता दोनों पक्षों के वार्ताकारों की टीमों द्वारा तैयार किया गया था।
''भारत में विश्व की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की भी क्षमता''
मोबियस ने कहा था, "हालांकि, दोनों नेताओं (मोदी-ट्रंप) के बीच मैत्रीपूर्ण संबंधों ने निश्चित रूप से प्रक्रिया को सुगम बनाने में मदद की।" मोबियस ने कहा कि भारत में विश्व की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की भी क्षमता है।
उनकी फर्म द्वारा जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया,“प्रसिद्ध निवेशक और उभरते बाजारों में निवेश के क्षेत्र में अग्रणी डॉ. मार्क मोबियस का 15 अप्रैल, 2026 को 89 वर्ष की आयु में निधन हो गया। डॉ. मोबियस को उभरते बाजारों में शुरुआती निवेशकों में से एक माना जाता था। वे उन बाजारों में निवेश करने के लिए जाने जाते थे, जिन्हें अकसर वैश्विक निवेशक अनदेखा कर देते थे।”
बयान में आगे कहा गया है, “मोबियस इन्वेस्टमेंट्स के पार्टनर जॉन निनिया और एरिक गुयेन फर्म की जिम्मेदारी संभालेंगे। फर्म अपने निवेश दृष्टिकोण या दैनिक कार्यों में बिना किसी बदलाव के काम करना जारी रखेगी।”
कमेंट्स
सभी कमेंट्स (0)
बातचीत में शामिल हों
कृपया धैर्य रखें।