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Tata Sons में 'चंद्र' राज रहेगा बरकरार! 5 साल के एक्सटेंशन को बोर्ड की मंजूरी, नोएल टाटा ने विरोध में किया वोट

Published: Thu, 17 Sep 2026 02:59 PM (IST)Updated: Thu, 17 Sep 2026 03:23 PM (IST)

टाटा संस के बोर्ड ने एन. चंद्रशेखरन का कार्यकाल पांच साल के लिए बढ़ा दिया है। बोर्ड की बैठक में ...और पढ़ें

एन. चंद्रशेखरन का कार्यकाल पांच साल के लिए बढ़ा।

एन. चंद्रशेखरन का कार्यकाल पांच साल के लिए बढ़ा।

HighLights

  1. एन. चंद्रशेखरन का कार्यकाल पांच साल के लिए बढ़ा।

  2. टाटा संस की लिस्टिंग पर भी चर्चा।

  3. नोएल टाटा को बोर्ड वोटिंग में हार मिली।

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। टाटा संस के बोर्ड ने एन. चंद्रशेखरन को टाटा संस का चेयरमैन बनाए रखने के लिए पांच साल के कार्यकाल को मंजूरी दे दी है। इस मामले की जानकारी रखने वाले लोगों ने बताया कि बोर्ड की वोटिंग में टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा को दूसरों से हार का सामना करना पड़ा।  

ये फैसला गुरुवार, 17 सितंबर को मुंबई में हुई टाटा संस की बोर्ड मीटिंग में लिया गया। इस मीटिंग पर सबकी नजरें टिकी थीं। इस प्रस्तावित विस्तार की सिफारिश मूल रूप से सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट ने की थी और बाद में टाटा संस की नॉमिनेशन एंड रेम्यूनरेशन कमिटी और बोर्ड ने इस पर विचार किया था। 

नोएल टाटा ने प्रस्ताव के खिलाफ वोट किया

टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा अकेले ऐसे सदस्य थे जिन्होंने चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति के प्रस्ताव के खिलाफ वोट दिया। CNBC-TV18 की रिपोर्ट के मुताबिक, टाटा संस के बोर्ड ने कंपनी को लिस्ट करने के मुद्दे पर भी विचार किया, लेकिन इस पर कोई प्रस्ताव पास नहीं हुआ।

हालांकि, होल्डिंग कंपनी में बहुमत हिस्सेदारी रखने वाले कई टाटा ट्रस्ट, चेयरमैन के तौर पर चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति को चुनौती दे सकते हैं।

इस फेसले से चंद्रशेखरन एग्जीक्यूटिव चेयरमैन बने रहेंगे, जबकि टाटा संस रेगुलेटरी मामलों को सुलझाएगी और अपनी लिस्टिंग की प्रक्रिया पर काम करेगी। चंद्रशेखरन ने 12 अगस्त को घोषणा की थी कि 20 फरवरी, 2027 को उनका मौजूदा कार्यकाल खत्म होने पर वे तीसरा कार्यकाल नहीं लेंगे।

RBI ने टाटा संस की याचिका की थी खारिज

सितंबर 2022 में, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने टाटा संस को 'अपर-लेयर नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी' के तौर पर वर्गीकृत किया, जिसके तहत उसे तीन साल के भीतर लिस्ट होना जरूरी था। इसके बाद टाटा संस ने अपना कर्ज चुका दिया और प्राइवेट कंपनी बने रहने के लिए अपनी 'कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी' का रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने की कोशिश की, लेकिन RBI ने 11 सितंबर, 2026 को इस आवेदन को खारिज कर दिया और कंपनी को तुरंत लिस्टिंग की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया।

लिस्टिंग का मुद्दा टाटा ग्रुप के अंदर तनाव की मुख्य वजह रहा है। टाटा संस में लगभग 66 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाले टाटा ट्रस्ट्स ने इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) का विरोध किया था, जबकि लगभग 18.4 प्रतिशत हिस्सेदारी वाले शापूरजी पलोनजी ग्रुप ने वैल्यू अनलॉक करने और लिक्विडिटी बेहतर बनाने के लिए लिस्टिंग पर जोर दिया।

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