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    Mazagon Dock ही नहीं, भारत के ₹70000 करोड़ के शिपबिल्डिंग मेगा-प्लान के हैं ये 3 'अनमोल रत्न' दिग्गज कंपनियां

    Updated: Wed, 15 Apr 2026 08:42 AM (IST)

    भारतीय जहाज निर्माण उद्योग आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है, जिसमें 'मेक इन इंडिया' के तहत ₹70,000 करोड़ का आवंटन हुआ है। मझगांव डॉक ने श्रीलंका में पहला ...और पढ़ें

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    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

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    नई दिल्ली भारतीय जहाज निर्माण (Shipbuilding) उद्योग अब विदेशी निर्भरता से निकलकर आत्मनिर्भरता और महत्वाकांक्षा की ओर तेजी से बढ़ रहा है। भारत का लगभग 90% व्यापार विदेशी जहाजों के माध्यम से होता है, जिससे देश हमेशा वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में होने वाली उथल-पुथल के प्रति संवेदनशील रहा है। हालांकि, 'मेक इन इंडिया' पहल के तहत ₹70,000 करोड़ के हालिया आवंटन ने घरेलू क्षमता निर्माण, व्यापार मार्गों को सुरक्षित करने और रणनीतिक निर्भरता को कम करने की दिशा में एक स्पष्ट बदलाव का संकेत दिया है। यह बदलाव केवल नीतिगत नहीं है; यह घरेलू शिपयार्ड्स के लिए एक बहु-वर्षीय अवसर पैदा कर रहा है।

    सवाल अब यह नहीं है कि अवसर मौजूद है या नहीं, बल्कि यह है कि कौन सी कंपनियां इसका लाभ उठाने के लिए सबसे अच्छी स्थिति में हैं। आइए भारत के 'मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047' को साकार कर रहे इन 3 अनमोल रत्नों पर नजर डालते हैं।

    1. मझगांव डॉक पहले अंतरराष्ट्रीय अधिग्रहण से बनेगा समंदर का बादशाह?

    मझगांव डॉक का मार्केट कैप ₹1,00,639 करोड़ रुपये है। इसका मौजूदा शेयर प्राइस ₹2,495 है। भारत की दिग्गज नवरत्न कंपनी मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) ने श्रीलंका के सबसे बड़े शिपयार्ड 'कोलंबो डॉकयार्ड पीएलसी' (CDPLC) में 51% हिस्सेदारी खरीदकर अपना पहला अंतरराष्ट्रीय अधिग्रहण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। इसके अधिग्रहण की कीमत 2.68 करोड़ अमेरिकी डॉलर (करीब 250 करोड़ रुपये) है। MDL के CMD कैप्टन जगमोहन (सेवानिवृत्त) को CDPLC का गैर-कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।

    MDL भारत का एकमात्र सार्वजनिक क्षेत्र का रक्षा शिपयार्ड है जो विध्वंसक (Destroyers) और पारंपरिक पनडुब्बियों का निर्माण करता है। यह एक साथ 11 पनडुब्बियों और 10 युद्धपोतों को संभालने की क्षमता रखता है।

    मझगांव के पास मजबूत ऑर्डर बुक

    31 दिसंबर 2025 तक, MDL की कुल ऑर्डर बुक ₹23,758 करोड़ थी। इसमें P-17A फ्रिगेट्स का 42% और ONGC प्रोजेक्ट्स का 18% हिस्सा है। कंपनी की नजर प्रोजेक्ट-75I (₹70,000 करोड़), तीन अतिरिक्त कलवरी-क्लास पनडुब्बियों (₹30,000-40,000 करोड़), नेक्स्ट-जेन फ्रिगेट्स P-17B (₹70,000 करोड़) और नेक्स्ट-जेन डिस्ट्रॉयर P-18 (₹85,000 करोड़) जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स पर है। वित्तीय वर्ष 2026 के पहले 9 महीनों (9MFY26) में राजस्व 11% बढ़कर ₹9,156 करोड़ हो गया है।

    2. कैसे GRSE अपनी तेज डिलीवरी से रक्षा क्षेत्र में मचा रहा है हलचल?

    GRSE का मार्केट कैप ₹29,094 करोड़ और मौजूदा शेयर प्राइस ₹2,540 है। गार्डन रीच शिपबिल्डर्स (GRSE) ने अपनी तेज कार्यप्रणाली से सबका ध्यान खींचा है। 31 दिसंबर 2025 तक इसकी ऑर्डर बुक ₹18,482 करोड़ थी। ऑर्डर बुक का ₹20,000 करोड़ से नीचे आना प्रबंधन के अनुसार एक सकारात्मक संकेत है, जो दर्शाता है कि प्रोजेक्ट्स का निष्पादन (Execution) बेहद तेज़ी से हो रहा है।

    ₹50,000 करोड़ का लक्ष्य

    GRSE ₹33,000 करोड़ के नेक्स्ट-जेन 5-शिप प्रोजेक्ट के लिए सबसे कम बोली लगाने वाली (L1) कंपनी बनकर उभरी है। मार्च 2026 के अंत तक इस अनुबंध पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है, जिससे FY26 के अंत तक इसकी ऑर्डर बुक ₹50,000 करोड़ तक पहुंच जाएगी। अगले 12-18 महीनों के लिए रक्षा और गैर-रक्षा क्षेत्रों में ₹2.5 लाख करोड़ से अधिक की ऑर्डर पाइपलाइन है।

    वर्तमान में 28 जहाज एक साथ बनाने की क्षमता रखने वाली यह कंपनी, 2026 के अंत तक इसे 35 तक ले जाना चाहती है। इसके लिए कोलकाता पोर्ट से 3 साइट्स ली गई हैं और गुजरात में नए ग्रीनफील्ड साइट्स विकसित किए जा रहे हैं। GRSE के रिजल्ट की बात करें तो 9MFY26 में राजस्व में 42% का जबरदस्त उछाल (₹4,883 करोड़) देखा गया, जबकि शुद्ध लाभ 57% बढ़कर ₹445 करोड़ हो गया।

    3. क्या कोचीन शिपयार्ड ₹15,000 करोड़ के सालाना कमर्शियल बाजार पर काम करेगा?

    कोचीन शिपयार्ड का मार्केट कैप ₹38,531 करोड़ है। वहीं मौजूदा शेयर प्राइस ₹1,465 है। रक्षा क्षेत्र के साथ-साथ, कोचीन शिपयार्ड (CSL) कमर्शियल (व्यावसायिक) जहाज निर्माण में भारत का एक प्रमुख खिलाड़ी है। 1972 में स्थापित यह कंपनी सबसे बड़े जहाजों के निर्माण से लेकर उनकी मरम्मत और अपग्रेडेशन तक का काम करती है।

    भारतीय कमर्शियल शिपबिल्डिंग सेगमेंट सालाना ₹12,000 से ₹15,000 करोड़ का एक अत्यधिक आकर्षक बाजार है। कंटेनर वेसल, तटीय शिपिंग, ड्रेजर, फेरी, क्रूज़ और ऑयल एंड गैस कैरियर्स इस क्षेत्र में विकास को गति दे रहे हैं। CSL ने भारत के बाहर विभिन्न ग्राहकों को 45 से अधिक जहाजों का निर्यात किया है। यह बल्क कैरियर से लेकर प्लेटफॉर्म सप्लाई वेसल (PSV) और एंकर हैंडलिंग टग सप्लाई (AHTS) वेसल जैसे तकनीकी रूप से उन्नत जहाजों के निर्माण में विशेषज्ञ है।

    रक्षा सौदों में वृद्धि, व्यावसायिक जहाजों की बढ़ती मांग और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में बदलाव के इस दौर में, मझगांव डॉक, GRSE और कोचीन शिपयार्ड भारत की समुद्री ताकत के नए स्तंभ बन रहे हैं। अपनी बढ़ती क्षमताओं और भारी भरकम ऑर्डर बुक के साथ, ये तीनों कंपनियां भारत को समंदर का नया सिकंदर बनाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

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    (डिस्क्लेमर: यहां शेयरों को लेकर दी गई जानकारी ब्रोकरेज हाउस की रिपोर्ट पर आधारित है। चूंकि, स्टॉक मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है इसलिए निवेश करने से पहले किसी सर्टिफाइड इन्वेस्टमेंट एडवाइजर से परामर्श जरूर करें।)