महारत्न ONGC की बड़ी तैयारी! क्रूड ऑयल ट्रेडिंग में रखेगी कदम, इस शहर में बनाएगी 1.75 मिलियन टन का विशाल ऑयल रिजर्व
ONGC crude oil trading: ओएनजीसी इस साल के अंत तक कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की वैश्विक ट्रेडिंग में कदम ...और पढ़ें
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क्रूड ऑयल ट्रेडिंग में रखेगी कदम, इस शहर में बनाएगी 1.75 मिलियन टन का विशाल ऑयल रिजर्व

समय कम है?
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बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| सार्वजनिक क्षेत्र की दिग्गज तेल कंपनी ओएनजीसी (ONGC) अपने मुनाफे और ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ाने के लिए एक बड़ा गेमचेंजर कदम उठाने जा रही है। इस साल के अंत तक कंपनी कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की ग्लोबल ट्रेडिंग में एंट्री करने वाली है।
ओएनजीसी के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक (CMD) अरुण कुमार सिंह ने बताया कि कंपनी की इस नई ट्रेडिंग इकाई का 95 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। इस साल के अंत तक इसके चालू होने की पूरी उम्मीद है।
दुबई या सिंगापुर में खुलेगा ऑफिस
यह नया ट्रेडिंग डेस्क दुबई या सिंगापुर में खोला जा सकता है। शुरुआती दौर में यह इकाई सिर्फ ओएनजीसी समूह (HPCL, MRPL, OVL, OPaL) की जरूरतें पूरी करेगी, लेकिन बाद में यह थर्ड-पार्टी के लिए भी ट्रेडिंग का काम करेगी। अरुण सिंह के मुताबिक,
सही समय पर कच्चे तेल की खरीद, माल ढुलाई में बचत और बेहतर रिस्क मैनेजमेंट के जरिए कंपनी को हर साल करीब 1 अरब डॉलर (लगभग 8,400 करोड़ रुपए) का अतिरिक्त फायदा हो सकता है। इस वेंचर में HPCL, MRPL के साथ एक विदेशी पार्टनर भी शामिल हो सकता है।"
मंगलुरु में बनेगा विशाल इमरजेंसी रिजर्व
ट्रेडिंग के अलावा ओएनजीसी भारत की ऊर्जा सुरक्षा भी मजबूत कर रही है। सरकार के कहने पर कंपनी मंगलुरु में 17.5 लाख टन क्षमता का रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) बनाने जा रही है। इसका पूरा खर्च ओएनजीसी खुद उठाएगी। इससे भारत की मौजूदा 53.3 लाख टन की आपातकालीन भंडारण क्षमता में करीब एक-तिहाई का इजाफा होगा। ओएनजीसी इसमें से आधा तेल आपात स्थिति के लिए रखेगी और बाकी का कमर्शियल इस्तेमाल करना चाहती है। अभी भारत का इमरजेंसी रिजर्व 9.5 दिन का आयात कवर देता है।
प्रोजेक्ट डीपएक्स: 1 लाख करोड़ का निवेश
ट्रेडिंग में उतरने के बावजूद तेल और गैस खोजना ओएनजीसी का मुख्य काम बना रहेगा। कंपनी ने 2031 तक समुद्र की गहराइयों में 87 नए कुएं खोदने के लिए 1 लाख करोड़ रुपए खर्च करने का प्लान बनाया है। वहीं, प्रोजेक्ट डीपएक्स के तहत अगले दो सालों में गहरे समुद्र में खुदाई दोगुनी की जाएगी। इसके अलावा, सरकार की ओर से अपतटीय खोज के लिए 84,000 करोड़ रुपए की मदद मिलने से ओएनजीसी का आर्थिक बोझ भी काफी कम हो जाएगा।
