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    RBI का बड़ा प्लान, शहरी सहकारी बैंक अब ज्यादा बिना गारंटी लोन दे सकेंगे; क्या है नियम और किसे होगा फायदा?

    Updated: Wed, 11 Feb 2026 02:22 AM (IST)

    भारतीय रिजर्व बैंक ने शहरी सहकारी बैंकों के लिए नए नियम प्रस्तावित किए हैं, जिससे बिना गारंटी वाले कर्ज देना आसान होगा। कुल परिसंपत्तियों का 10% से 20 ...और पढ़ें

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    RBI का बड़ा प्लान, शहरी सहकारी बैंक अब ज्यादा बिना गारंटी लोन दे सकेंगे; क्या है नियम और किसे होगा फायदा?

    नई दिल्ली| शहरी सहकारी बैंकों से लोन लेना अब आसान हो सकता है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने नए ड्राफ्ट नियम जारी किए हैं, जिनमें इन बैंकों को बिना गारंटी वाले कर्ज ज्यादा देने की छूट देने का प्रस्ताव है। अगर ये नियम लागू होते हैं, तो आम ग्राहकों, खासकर छोटे कारोबारियों और मध्यम वर्ग को सीधा फायदा मिल सकता है।

    सबसे बड़ा बदलाव ये है कि बैंकों की कुल परिसंपत्तियों (टोटल एसेट्स) में असुरक्षित यानी बिना गारंटी वाले लोन की सीमा 10% से बढ़ाकर 20% करने का प्रस्ताव है। यानी अब शहरी सहकारी बैंक पहले के मुकाबले दोगुना बिना गारंटी कर्ज दे सकेंगे। हालांकि RBI ने साफ किया है कि 20% से ऊपर का अतिरिक्त असुरक्षित लोन सिर्फ प्राथमिकता क्षेत्र (जैसे छोटे किसान, सूक्ष्म उद्यम) में ही दिया जा सकेगा, वो भी प्रति उधारकर्ता ₹50,000 की सीमा तक।

    ड्राफ्ट में व्यक्तिगत लोन की सीमा बढ़ाने और असुरक्षित कर्ज की परिभाषा को ज्यादा स्पष्ट बनाने की भी बात कही गई है। इसका मतलब है कि छोटे टिकट लोन लेने वालों के लिए प्रोसेस आसान हो सकता है।

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    उपभोक्ता टिकाऊ सामान- जैसे फ्रिज, वॉशिंग मशीन, टीवी खरीदने के लिए मिलने वाले लोन की सीमा भी बढ़ाने का प्रस्ताव है। इसे प्रति उधारकर्ता ₹2.5 लाख तक किया जा सकता है। इससे मध्यम आय वाले परिवारों को राहत मिल सकती है।

    तीसरे और चौथे स्तर के शहरी सहकारी बैंकों को होम लोन के कार्यकाल और मोरेटोरियम से जुड़े कुछ नियमों में ढील देने की भी तैयारी है। इससे हाउसिंग लोन प्रोडक्ट्स ज्यादा लचीले हो सकते हैं।

    RBI ने इस मसौदे पर 4 मार्च 2026 तक सुझाव मांगे हैं। साथ ही, सहकारी बैंकों की कार्यप्रणाली सुधारने के लिए एक क्षमता निर्माण मिशन भी शुरू किया जाएगा, जिसके तहत बड़ी संख्या में कर्मचारियों को ट्रेनिंग दी जाएगी।

    यानी मकसद साफ है कि शहरी सहकारी बैंकों को मजबूत बनाना और छोटे ग्राहकों तक कर्ज की पहुंच बढ़ाना।