RBI Monetary Policy: बुधवार से मॉनेटरी पॉलिसी पर चर्चा शुरू करेगा आरबीआई, रेपो रेट में कटौती की गुंजाइश कम
भारतीय रिजर्व बैंक बुधवार से मॉनेटरी पॉलिसी पर तीन दिवसीय चर्चा शुरू करेगा, जिसका फैसला गुरुवार को आएगा। रेपो रेट में कटौती की उम्मीद है, हालांकि विशे ...और पढ़ें

RBI Monetary Policy: बुधवार से मॉनेटरी पॉलिसी पर चर्चा शुरू करेगा आरबीआई, रेपो रेट में कटौती की गुंजाइश कम
नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक बुधवार से मॉनेटरी पॉलिसी (RBI RBI Monetary Policy) पर तीन दिवसी चर्चा शुरू करेगी। गुरुवार को इस पर फैसला आएगा। सभी की निगाहें RBI के फैसले पर होगी। उम्मीद जताई जा रही है कि आरबीआई रेपो रेट (Repo Rate Cut) में कटौती कर सकता है।
यह चर्चा ग्रोथ पर फोकस वाले यूनियन बजट, कम महंगाई और हाल ही में लंबे समय से अटके भारत-अमेरिका ट्रेड डील के बैकग्राउंड में होगी, जिससे बाहरी मोर्चे पर लंबे समय से चली आ रही अनिश्चितता खत्म हो गई है।
Repo Rate पर क्या फैसला लेगा RBI?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने पिछले फरवरी से मुख्य शॉर्ट-टर्म लेंडिंग रेट (Repo Rate) में पहले ही 125 बेसिस पॉइंट्स की कमी की है, और रेट्स पर यथास्थिति बनाए रख सकता है क्योंकि ग्रोथ या महंगाई को लेकर कोई बड़ी चिंता नहीं है।
हालांकि, कुछ लोगों का मानना है कि सेंट्रल बैंक उधार लेने की लागत को और कम करने के लिए एक और रेट कट कर सकता है। दिसंबर में, RBI ने पिछली दो MPC मीटिंग में रेट को अपरिवर्तित रखने के बाद रेपो रेट को 25 बेसिस पॉइंट्स घटाकर 5.25 प्रतिशत कर दिया था।
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता वाली छह सदस्यीय मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) का फैसला शुक्रवार को घोषित किया जाएगा।
BOB के अर्थशास्त्री बोले कटौती की गुंजाइश कम
बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा, "MPC के रेपो रेट को बनाए रखने की संभावना है और यह रेट-कटिंग साइकिल का अंत भी हो सकता है।"
उन्होंने कहा कि इसका कारण यह है कि बॉन्ड यील्ड्स ने शायद यह संकेत दिया है कि अब कोई कमी नहीं हो सकती है, यह देखते हुए कि सरकार का नेट उधार कार्यक्रम पिछले साल जैसा ही है, और यह भी कहा कि काफी टाइट लिक्विडिटी की स्थिति को देखते हुए, बैंक सभी जगह रेट कम नहीं कर सकते हैं।
सबनवीस ने कहा, "इसलिए, एक ठहराव की सबसे अधिक संभावना है। RBI लिक्विडिटी बढ़ाने के उपायों पर विचार करेगा और जबकि OMO और फॉरेक्स स्वैप जारी रहेंगे, जरूरत पड़ने पर CRR कम करने पर भी विचार किया जा सकता है।"
ICRA की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा कि यूनियन बजट की रूपरेखा के बावजूद, रेटिंग एजेंसी ICRA का मानना है कि जनवरी 2026 के आने वाले रिटेल महंगाई (CPI) डेटा और FY24 से FY26 तक के GDP डेटा का आकलन करने के लिए इस समय एक ठहराव जरूरी है। जनवरी 2026 के लिए CPI डेटा 12 फरवरी को जारी होने वाला है, जिसमें 2024 को नया बेस ईयर माना जाएगा, जबकि FY24 से FY26 तक का GDP डेटा 27 फरवरी को जारी होने वाला है, जिसमें 2022-23 को बेस ईयर माना जाएगा।
नायर ने कहा, "ये डेटा सीरीज मिलकर मौजूदा ग्रोथ-इन्फ्लेशन मिक्स को तय करने में मदद करेंगी और एक नया आउटलुक बनाने में सपोर्ट करेंगी।"
क्रिसिल के अर्थशास्त्री बोले हो सकती है कटौती
क्रिसिल के चीफ इकोनॉमिस्ट धर्मकीर्ति जोशी ने कहा कि कम इन्फ्लेशन RBI को रेट में कटौती पर विचार करने का मौका देता है।
उन्होंने कहा, "बजट भी फिस्कल कंट्रोल के कारण इन्फ्लेशन बढ़ाने वाला नहीं है। साथ ही, इकॉनमी भी अच्छा कर रही है। इन फैक्टर्स को देखते हुए, फैसला रेट को बनाए रखने या कम करने के बीच कड़ा मुकाबला होने की संभावना है। हालांकि, हम इस बार रेट को बनाए रखने के पक्ष में हैं और RBI भविष्य की पॉलिसी एक्शन के लिए अपने पास विकल्प रखना पसंद कर सकता है।"


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