सर्च करे
Home
फोकस
विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

119 साल पहले खर्च किए थे 23 करोड़, मेहनत से जंगल में बसाया 'टाटा नगर', ये कहानी है Tata की तीसरी सबसे पुरानी कंपनी की

Updated: Wed, 26 Aug 2026 04:47 PM (IST)

टाटा समूह की प्रतिष्ठित कंपनी टाटा स्टील ने 26 अगस्त को अपनी स्थापना के 119 साल पूरे कर लिए हैं, जिसकी शुरुआत 1907 में TISCO के रूप में हुई थी।

26 अगस्त 1907 को TISCO की स्थापना हुई थी।

26 अगस्त 1907 को TISCO की स्थापना हुई थी।

HighLights

  1. टाटा स्टील ने 26 अगस्त को पूरे किए 119 साल।

  2. 1907 में TISCO के रूप में हुई थी स्थापना।

  3. साकची गांव बना जमशेदपुर, टाटा नगर से मशहूर।

नई दिल्ली। टाटा समूह (Tata Group) भारत का दिग्गज और 150 साल से ज्यादा पुराना औद्योगिक घराना है जिसकी नींव 1868 में रखी थी। 158 साल पहले 29 वर्षीय जमशेदजी नुसरवानजी टाटा ने इस इंडस्ट्रियल ग्रुप की स्थापना की। उस समय उन्होंने 21000 रुपये की पूंजी से एक ट्रेडिंग कंपनी शुरू की और यही वह कारोबार था जिसने टाटा समूह की नींव रखी। 26 अगस्त का दिन टाटा ग्रुप के लिए बेहद खास है क्योंकि इस दिन इस समूह की एक नामी कंपनी ने काम करना शुरू किया था, जो इस ग्रुप की तीसरी सबसे पुरानी कंपनी है।

दरअसल, आज के दिन टाटा स्टील ने अपनी स्थापना के 119 साल पूरे कर लिए हैं। 26 अगस्त 1907 में भारत में अंग्रेजी हुकूमत के दौरान टाटा स्टील की शुरुआत हुई थी, जिसे 'टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी' (TISCO) के नाम से जाना गया। आइये आपको बताते हैं टाटा आयरन एंड स्टील के बनने और बुलंदियों तक पहुंचने की कहानी।

किसने शुरू की TISCO?

स्टील के निर्माण में भारत को आत्मनिर्भर बनाने का सपना, इसके संस्थापक जमशेदजी टाटा का था, जिसे उनके बेटे सर दोराबजी टाटा ने साकार किया। भारत में एक स्वदेशी स्टील प्लांट लगाने के लिए जमशेदजी नुसीरवानजी टाटा ने अमेरिका और यूरोप की यात्राएं कीं और आधुनिक तकनीक का अध्ययन किया। लेकिन दुर्भाग्य से, स्टील प्लांट शुरू होने से पहले ही 1904 में उनका निधन हो गया।

पिता के निधन के बाद, उनके बड़े बेटे सर दोराबजी टाटा ने इस जिम्मेदारी को उठाया और 1907 में TISCO (टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी) की स्थापना की। सिर्फ़ 3 हफ़्तों में कुल ₹2,31,75,000 की शुरुआती पूंजी से यह कंपनी शुरू की गई और 1912 तक अंग्रेजी राज में ही भारत स्टील बनाने वाला देश बन गया। 1907 में स्थापना के बाद साल 1911 में टिस्को में लोहे का उत्पादन शुरू हुआ, और साल 1912 में कंपनी ने अपना पहला स्टील तैयार किया।

गांव का नाम रखा जमशेदपुर

टाटा समूह ने स्टील प्लांट लगाने के लिए काफी रिसर्च की। इस दौरान भारतीय भूविज्ञानी प्रमथ नाथ बोस ने टाटा परिवार को एक पत्र लिखा और बताया कि मयूरभंज (ओडिशा) के पास बेहतरीन गुणवत्ता वाले लोहे के भंडार हैं। इसके बाद अमेरिकी भूविज्ञानी चार्ल्स पेज पेरिन की मदद से बंगाल के साकची गांव ( जो अब झारखंड में है) को प्लांट के लिए चुना गया। क्योंकि, यहां सुवर्णरेखा और खरकई नदियों का पानी, लोहा और कोयले की पर्याप्त उपलब्ताध थी, जो प्लांट के लिए जरूरी थी।

साकची गांव में उस समय टिस्को के प्लांट और उसके कर्मचारियों के लिए एक पूरा शहर बसाया गया। खास बात है कि 1919 में भारत के तत्कालीन वायसराय लॉर्ड चेम्सफोर्ड ने जमशेदजी टाटा के सम्मान में साकची गांव का नाम 'जमशेदपुर' रख दिया और आज इसे 'टाटानगर' के उपनाम से भी जाना जाता है।

TISCO से कैसे बनी टाटा स्टील?

1907 में जब टाटा समूह ने इस स्टील कंपनी की स्थापना की तब इसे TISCO यानी Tata Iron and Steel Company के नाम से जाना जाता था। लेकिन, 98 साल बाद अगस्त 2005 में इसका नाम बदलकर 'टाटा स्टील' किया गया। इसका मुख्य कारण कंपनी को एक वैश्विक पहचान देना था, और इसे टाटा समूह के मुख्य ब्रांड के साथ सीधे तौर पर जोड़ना और नाम को अंतरराष्ट्रीय बाजार के हिसाब से सरल बनाना था।

ये भी पढ़ें - भारत का पहला Soft Drink Brand कौन-सा था? कोका-कोला से भी दो साल पुराना; इस ईरानी का था दिमाग

टाटा स्टील ग्रुप दुनिया की टॉप स्टील कंपनियों में से एक है, जिसकी सालाना कच्चा स्टील बनाने की क्षमता 34 मिलियन टन से ज्यादा है। यह कंपनी शेयर मार्केट में लिस्टेड है और इसका बाजार पूंजीकरण 2 लाख 35 हजार करोड़ से ज्यादा है।