जेपी एसोसिएट्स के लिए अदाणी की बोली को वेदांता ने NCLAT में दी चुनौती; बताया 'कॉमर्शियल साजिश', क्या डील रुकेगी?
अनिल अग्रवाल की वेदांता ने जेपी एसोसिएट्स के लिए अदाणी एंटरप्राइजेज की ₹14,543 करोड़ की समाधान योजना को NCLAT में चुनौती दी है। वेदांता का आरोप है कि ...और पढ़ें


समय कम है?
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नई दिल्ली। अनिल अग्रवाल के नेतृत्व वाली वेदांता लिमिटेड (Vedanta Ltd) ने दिवालिया हो चुकी जेपी एसोसिएट्स लिमिटेड (JAL) के लिए अदाणी एंटरप्राइजेज (Adani Enterprises) की ₹14,543 करोड़ की समाधान योजना को दी गई मंजूरी के खिलाफ नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) का दरवाजा खटखटाया है।
वेदांता ने नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) की इलाहाबाद बेंच के 17 मार्च के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें गौतम अदाणी की कंपनी के प्लान को मंजूरी दी गई थी और खनन कंपनी (वेदांता) की आपत्तियों को खारिज कर दिया गया था। NCLAT के चेयरपर्सन जस्टिस अशोक भूषण की अगुवाई वाली बेंच सोमवार को इस मामले की सुनवाई कर सकती है।
'सबसे बड़ी बोली के बावजूद हमें दरकिनार किया गया'-वेदांता
वेदांता ने कर्जदाताओं की इस मंजूरी को एक "कॉमर्शियल साजिश" (Commercial Conspiracy) करार दिया है और अपनी बोली पर पुनर्विचार करने की मांग की है। इस विवाद के केंद्र में यह सवाल है कि इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) के तहत वैल्यू (मूल्य) का आकलन कैसे किया जाना चाहिए?
वेदांता ने क्या तर्क दिया?
वेदांता का तर्क है कि नेट प्रेजेंट वैल्यू (NPV) के आधार पर ₹12,505.85 करोड़ के ऑफर के साथ वह सबसे बड़ी बोली लगाने वाली कंपनी थी। उनका दावा है कि जिस प्रतिस्पर्धी (अदाणी) प्लान को मंजूरी दी गई, उसकी कुल वैल्यू वेदांता के मुकाबले लगभग ₹3,400 करोड़ और NPV में ₹500 करोड़ कम थी।
वेदांता ने नया ऑफर दिया था?
वेदांता ने बताया कि उसने 8 नवंबर 2025 को एक सुधरा हुआ ऑफर पेश किया था, जिसमें अपफ्रंट कैश (तुरंत दी जाने वाली नकद राशि) को बढ़ाकर लगभग ₹6,563 करोड़ और इक्विटी इंफ्यूजन को ₹800 करोड़ कर दिया गया था। कंपनी का कहना है कि इससे कर्जदाताओं को बेहतर रिकवरी मिलती।
वेदांता ने किस प्रक्रिया पर सवाल उठाए?
वेदांता कंपनी ने यह भी आरोप लगाया कि पूरी प्रक्रिया अनुचित थी और उन्हें अपने प्रस्ताव को स्पष्ट करने का मौका या कारण नहीं बताया गया।
कर्ज देने वालों ने क्या कहा?
कर्जदाताओं (CoC) के मुताबिक 'अदाणी का प्लान ज्यादा व्यावहारिक' है। कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स (CoC) ने अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा कि पूरी प्रक्रिया IBC के नियमों के तहत की गई है। उनका स्पष्ट कहना है कि सबसे बड़ी बोली लगाने वाले को भी जीत का कोई गारंटीशुदा अधिकार नहीं मिल जाता। कर्जदाताओं के अनुसार, अदाणी के प्लान को इसलिए प्राथमिकता दी गई क्योंकि उसमें लगभग ₹6,000 करोड़ का अपफ्रंट कैश शामिल था और भुगतान की समयसीमा (2 साल) वेदांता (5 साल) के मुकाबले काफी तेज थी।
कर्जदाताओं ने वेदांता के संशोधित ऑफर को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि यह बोली की समयसीमा खत्म होने के बाद जमा किया गया था। इसे स्वीकार करने का मतलब पूरी प्रक्रिया को दोबारा शुरू करना होता।
NCLT का क्या है फैसला?
NCLT ने अपने 17 मार्च के आदेश में कर्जदाताओं के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा था कि CoC का कॉमर्शियल विजडम (व्यावसायिक विवेक) अंतिम है और जब तक कोई स्पष्ट कानूनी उल्लंघन न हो, इसमें दखल नहीं दिया जा सकता। अदाणी के प्लान को वित्तीय कर्जदाताओं का लगभग 93.8% वोटिंग शेयर मिला था, जिसमें सबसे बड़े कर्जदाता नेशनल एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड (NARCL) की अहम भूमिका थी।
कानूनी जानकारों का मानना है कि यह चुनौती इस डील के पुनर्मूल्यांकन से ज्यादा एक वैधानिक 'स्ट्रेस टेस्ट' है। लॉ फर्म 'सर्वांक एसोसिएट्स' की संस्थापक अंकिता सिंह के मुताबिक, "NCLAT कोई सुपर-CoC नहीं है जो बोलियों की तुलना करे। इसकी भूमिका सिर्फ यह जांचने तक सीमित है कि क्या प्रक्रिया IBC के नियमों के तहत थी।"
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