JP Associates: 'वेदांता को कभी विजेता घोषित नहीं किया गया', NCLAT के सामने किसने कही यह बात?
JP Associates: जयप्रकाश एसोसिएट्स की नीलामी में वेदांता के सबसे ऊंची बोली लगाने वाले होने के दावे पर रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल (RP) ने NCLAT को बताया कि ऐस ...और पढ़ें
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रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल ने कहा- वेदांता को JP Associates के लिए कभी सबसे बड़ा बोलीदाता घोषित नहीं किया
भाषा, नई दिल्ली। दिवालिया होकर अदाणी के हाथों बिकने को तैयार जयप्रकाश एसोसिएट्स (JP Associates) की नीलामी प्रक्रिया को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। दरअसल, वेदांता के अनिल अग्रवाल ने आरोप लगाया था कि उन्हें पहले सबसे ऊंची बोली लगाने वाला घोषित किया गया था और बाद में अदाणी ग्रुप को बोली जीतने वाला घोषित किया गया है। अब अनिल अग्रवाल के इन्हीं आरोपों को लेकर रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल (RP) ने नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) के सामने ऐसी बात रखी है कि कहानी में नया मोड़ आ गया है।
कर्ज में डूबी कंपनी जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (JAL) के रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल (RP) ने नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) को बताया कि दिवालियापन की प्रक्रिया में वेदांता को सबसे ज्यादा बोली लगाने वाला घोषित करने के संबंध में कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है।
रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल ने क्या बताया?
जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (JAL) के रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि 5 सितंबर की तारीख वाला एक ईमेल, जो सभी बोलीदाताओं को भेजा गया था, उसमें केवल चुनौती प्रक्रिया के दौरान सामने आई सबसे ज्यादा वित्तीय राशि की जानकारी दी गई थी।
RP ने NCLAT को बताया कि इस इमेल में सफल बोलीदाता की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई थी। इसलिए इस इमेल के जरिए दी गई जानकारी को सफल बोलीदाता की आधिकारिक घोषणा नहीं माना जा सकता। ई-मेल में यह नहीं कहा गया है कि वेदांता सबसे ऊंची बोली लगाने वाला है।
वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने आरोप लगाते हुए कहा कि वेदांता का यह दावा कि वह सबसे ऊंची बोली लगाने वाला था, "महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाने" के बराबर है। वेदांता की याचिका का कोई कानूनी और तथ्यात्मक आधार नहीं है।
एनसीएलएटी की दो सदस्यीय पीठ ने कहा कि ईमेल ''केवल यह बताता है कि पहचान किए गए मानदंडों के अनुसार उच्चतम शुद्ध संपत्ति मूल्य (NAV) के आधार पर 12,505 करोड़ रुपये है।''
वेदांता ने दी है चुनौती
वेदांता ने अपनी दो याचिकाओं में ऋणदाताओं द्वारा अदाणी के अधिग्रहण प्रस्ताव को स्वीकार करने के फैसले को चुनौती दी है। कंपनी का दावा है कि उसकी बोली अदाणी समूह की तुलना में सकल मूल्य में लगभग 3,400 करोड़ रुपये और एनपीवी (शुद्ध वर्तमान मूल्य) में लगभग 500 करोड़ रुपये अधिक है।
सिंघवी ने कहा कि वेदांता द्वारा आठ नवंबर को दिया गया संशोधित प्रस्ताव नियमों के खिलाफ था। यदि एक आवेदक को प्रक्रिया बंद होने के बाद संशोधन की अनुमति दी जाती, तो सभी को वही मौका देना पड़ता। इससे प्रक्रिया की अंतिम परिणति कभी नहीं हो पाती।
चेयरमैन न्यायमूर्ति अशोक भूषण और सदस्य (तकनीकी) बरुण मित्रा की पीठ ने मामले की अगली सुनवाई सोमवार के लिए तय की है। बैंकों की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता सोमवार से अपनी दलीलें शुरू करेंगे।
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