मेट्रो और टनल मशीनें भी बनाएगा भारत! बजट में इन 7 सेक्टरों पर सबसे बड़ा दांव, चीन को मिलेगी कड़ी टक्कर
केंद्र सरकार ने बजट 2026-27 में मैन्युफैक्चरिंग को आर्थिक विकास का प्रमुख इंजन बनाने का संकेत दिया है। 12.2 लाख करोड़ रुपये के पूंजीगत व्यय के साथ, बा ...और पढ़ें

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने बजट 2026-27 में मैन्युफैक्चरिंग को आर्थिक विकास का प्रमुख इंजन बनाने का स्पष्ट संकेत दिया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए बजट में न केवल रिकॉर्ड 12.2 लाख करोड़ रुपये के सार्वजनिक पूंजीगत व्यय का ऐलान किया गया, बल्कि देश के विनिर्माण आधार को मजबूत करने के लिए कई नई और विस्तारवादी योजनाओं की घोषणा भी की गई।
सरकार ने कहा कि कोविड-19 के बाद बढ़े वैश्विक जोखिमों और अस्थिर आर्थिक माहौल के बीच भारत को तेज़ और टिकाऊ विकास पथ पर बनाए रखने के लिए घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को मजबूती देना अनिवार्य है। इसी रणनीति के तहत बजट में सात रणनीतिक और फ्रंटियर सेक्टरों में मैन्युफैक्चरिंग को बड़े पैमाने पर बढ़ाने का रोडमैप पेश किया गया है।
सात रणनीतिक सेक्टरों पर फोकस
बजट में बायोफार्मा, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स, रेयर अर्थ मिनरल्स, केमिकल्स, कैपिटल गुड्स और टेक्सटाइल सेक्टर को प्राथमिकता दी गई है। सरकार का मानना है कि इन क्षेत्रों में निवेश से भारत वैश्विक सप्लाई चेन में अपनी स्थिति मजबूत करेगा और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन होगा।
बायोफार्मा शक्ति योजना के तहत अगले पांच वर्षों में 10,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, ताकि भारत को वैश्विक बायोफार्मा मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में विकसित किया जा सके। इसके साथ ही फार्मास्यूटिकल शिक्षा और रिसर्च के लिए नए संस्थान और क्लिनिकल ट्रायल नेटवर्क स्थापित किए जाएंगे।
सेमीकंडक्टर क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के उद्देश्य से इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 लाने की घोषणा की गई है, जिसमें उपकरण, सामग्री और पूर्ण भारतीय बौद्धिक संपदा (IP) के विकास पर जोर होगा।
कंस्ट्रक्शन और कैपिटल गुड्स मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा
इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को घरेलू उद्योग से जोड़ने के लिए सरकार ने कंस्ट्रक्शन और इंफ्रास्ट्रक्चर इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरिंग के लिए विशेष योजना पेश की है। इसके तहत टनल बोरिंग मशीन, मेट्रो निर्माण उपकरण, ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सड़क निर्माण मशीनरी और फायर सेफ्टी सिस्टम जैसे उच्च तकनीक वाले उपकरणों का देश में ही उत्पादन बढ़ाया जाएगा।
चीन की साजिश का बनेगी काट
हाल ही में टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) के निर्माण और परिवहन पर चीनी नियंत्रण ने जर्मन निर्माताओं, विशेष रूप से हेरेनकनेक्ट, के कार्यों को बुरी तरह प्रभावित किया, जिससे परियोजनाओं में भारी देरी हुई है। चीनी सीमा शुल्क विभाग ने भारत जाने वाली टीबीएम मशीनों को रोक दिया, जिससे जर्मन कंपनियों को आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाने, चीन पर निर्भरता कम करने और बाधाओं से बचने के लिए भारत जैसे स्थानों पर विनिर्माण को स्थानांतरित करने के लिए मजबूर होना पड़ा।
कैपिटल गुड्स सेक्टर को मजबूती देने के लिए हाई-टेक टूल रूम स्थापित किए जाएंगे, जो डिजिटल और ऑटोमेटेड तकनीक से उच्च-परिशुद्धता वाले पुर्जों का बड़े पैमाने पर निर्माण करेंगे। इसके अलावा कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग के लिए 10,000 करोड़ रुपये से अधिक के बजटीय प्रावधान के साथ एक नई योजना लाई गई है।
इलेक्ट्रॉनिक्स, डेटा सेंटर और क्लीन टेक्नोलॉजी
बजट 2026 इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम का आकार बढ़ाकर 40,000 करोड़ रुपये कर दिया गया है, जिससे भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को और गति मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही भारत आधारित डेटा सेंटर्स से वैश्विक क्लाउड सेवाएं देने वाली विदेशी कंपनियों को 2047 तक टैक्स हॉलिडे देने का प्रस्ताव किया गया है, जिससे डिजिटल और एआई इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश को बढ़ावा मिलेगा।
ऊर्जा और औद्योगिक क्षेत्र में स्वच्छ तकनीक को प्रोत्साहित करने के लिए कार्बन कैप्चर, यूटिलाइजेशन और स्टोरेज पर अगले पांच वर्षों में 20,000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे, जिससे ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग और डिकार्बोनाइजेशन को बल मिलेगा।
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‘चैंपियन MSME’ तैयार करने की योजना
मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के लिए 10,000 करोड़ रुपये का एसएमई ग्रोथ फंड प्रस्तावित है। इसका उद्देश्य ऐसे छोटे और मध्यम उद्यमों को तैयार करना है, जो भविष्य में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बन सकें।
विकसित भारत की दिशा में कदम
वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार ने अब तक 350 से अधिक सुधार लागू किए हैं और ‘रिफॉर्म्स एक्सप्रेस’ पूरी गति से आगे बढ़ रही है। मैन्युफैक्चरिंग पर केंद्रित यह बजट न केवल इंफ्रास्ट्रक्चर और उद्योग के बीच तालमेल को मजबूत करेगा, बल्कि भारत को आत्मनिर्भर और वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाने की दिशा में एक अहम कदम साबित होगा।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट
सार्वजनिक पूंजीगत व्यय को ₹12 लाख करोड़ से अधिक तक बढ़ाने की सरकार की पहल इंफ्रास्ट्रक्चर आधारित विकास और आर्थिक मजबूती के प्रति एक सशक्त प्रतिबद्धता को दर्शाती है। इंफ्रास्ट्रक्चर रिस्क गारंटी फंड और REITs-InvITs के माध्यम से एसेट मोनेटाइजेशन जैसी योजनाएं निजी क्षेत्र का भरोसा बढ़ाएंगी और बड़े प्रोजेक्ट्स के काम में तेजी लाएंगी।
कंस्ट्रक्शन और रियल एस्टेट सेक्टर के लिए यह एक बड़ा मौका है जिससे बेहतर गुणवत्ता और आधुनिक तकनीक से जुड़ी परियोजनाओं को आगे बढ़ाया जा सकेगा। इससे न सिर्फ उत्पादकता बढ़ेगी बल्कि टिकाऊ शहरी विकास को भी बल मिलेगा। 5,000 से अधिक टियर-2 और टियर-3 शहरों तथा उभरते शहरी आर्थिक क्षेत्रों पर विशेष ध्यान के साथ यह इंफ्रास्ट्रक्चर अभियान रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा, कनेक्टिविटी सुधारेगा और देश के बिल्ट एनवायरनमेंट में लंबे समय तक विकास की राह खोलेगा।
- परवीन गुप्ता, डायरेक्टर, रामासिविल इंडिया
सोर्स- PIB


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