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धान की बुवाई में कमी के चलते किसानों की चांदी! ग्लोबल मार्केट में तेजी से बढ़ रहे बासमती के दाम! कितनी पहुंची कीमत?

Published: Fri, 18 Sep 2026 01:55 PM (IST)Updated: Fri, 18 Sep 2026 01:59 PM (IST)

भारत में बासमती चावल की बुवाई का रकबा घटने से इस साल उत्पादन पर चिंता है, जिससे वैश्विक बाजार में ...और पढ़ें

बासमती की कमी के कारण दाम में बढ़ोतरी

बासमती की कमी के कारण दाम में बढ़ोतरी

HighLights

  1. बासमती की बुवाई का रकबा करीब 4% घटा।

  2. वैश्विक बाजार में बासमती चावल के दाम बढ़े।

  3. किसानों और निर्यातकों को बेहतर आय की उम्मीद।

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| भारत बासमती चावल का बड़ा उत्पादक और निर्यातक देश हैं। लेकिन इस साल इसके उत्पादन को लेकर चिंता जताई जा रही है। इसकी मुख्य वजह पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हरियाणा में बासमती की बुवाई के क्षेत्रफल में कमी होना है। उद्योग सूत्रों के अनुसार, बासमती का कुल रकबा पिछले साल के मुकाबले करीब 4 प्रतिशत घटा है। ऐसे में पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारतीय निर्यातकों को विदेशी खरीदारों से बेहतर कीमत मिलने की उम्मीद है। पश्चिम एशिया भारतीय बासमती चावल का सबसे बड़ा बाजार है। पिछले साल देश में बासमती का उत्पादन करीब 1 करोड़ टन (10 मिलियन टन) रहा था।

उद्योग से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, इस साल बासमती का रकबा 2025 के 24.9 लाख हेक्टेयर की तुलना में करीब 1 लाख हेक्टेयर कम है। हालांकि पंजाब में बासमती का रकबा पिछले साल के बराबर बना हुआ है, जो एक पॉजिटिव संकेत माना जा रहा है। पिछले साल पंजाब में भारी बारिश और बाढ़ से फसल को नुकसान हुआ था, इसलिए इस बार राज्य में उत्पादन बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

हालांकि 2024 में बासमती का रकबा करीब 27.5 लाख हेक्टेयर था। ऐसे में लगातार दूसरे साल रकबा घटने से इस साल बासमती की कीमतों पर असर पड़ सकता है।

गैर-जीआई राज्यों में भी घटी खेती

बासमती की खेती कुछ गैर-जीआई राज्यों जैसे मध्य प्रदेश में भी होती है। वहां कम बारिश के कारण बासमती का रकबा कम हुआ है। 4 सितंबर तक के आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश में कुल धान (बासमती और गैर-बासमती) का रकबा पिछले साल की तुलना में 1.75 लाख हेक्टेयर कम रहा। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2025 खरीफ सीजन में राज्य में धान का कुल रकबा 42.10 लाख हेक्टेयर था।

उद्योग के अनुमान के अनुसार, मध्य प्रदेश में बासमती का रकबा 6-7 लाख हेक्टेयर के बीच है और इस साल धान के रकबे में जो कमी आई है, उसका बड़ा हिस्सा बासमती क्षेत्र में ही माना जा रहा है।

निर्यात में बढ़ी कीमत व कमाई

APEDA के आंकड़ों से मिली जानकारी के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने 6.52 मिलियन टन बासमती चावल का एक्सपोर्ट किया, जिससे 5.67 अरब डॉलर की कमाई हुई। इस दौरान औसत निर्यात मूल्य करीब 870 डॉलर प्रति टन रहा। वहीं चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही में 1.54 मिलियन टन बासमती चावल का निर्यात हुआ, जिससे 1.44 अरब डॉलर की आय हुई। इस दौरान औसत निर्यात मूल्य बढ़कर लगभग 938 डॉलर प्रति टन पहुंच गया।

ग्लोबल मार्केट में बढ़े बासमती के दाम

हरियाणा के करनाल मंडी में किसानों ने बासमती की पूसा-1509 किस्म की आवक शुरू कर दी है। यह कम अवधि में तैयार होने वाली किस्म है, इसलिए सबसे पहले बाजार में आती है। मौजूदा समय में इसकी कीमत करीब ₹3,950 प्रति क्विंटल चल रही है।

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व्यापारियों का कहना है कि हरियाणा के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के शामली जिले से आने वाली फसल की भी अच्छी मांग है। इसकी एक वजह यह है कि यहां भी प्रीमियम किस्म पूसा-1121 का रकबा कम बताया जा रहा है, जिससे आगे कीमतों में और बढ़ोतरी की उम्मीद बन रही है।

किसानों को भी मिलेगा फायदा

धान के क्षेत्रफल में कमी के कारण इसकी कीमतों को समर्थन मिल रहा है। आंकड़ों के मुताबिक फिलहाल भारतीय बासमती चावल का एक्सपोर्ट प्राइस लगभग 1,160 डॉलर प्रति टन पर कोट किया जा रहा है। यह पिछले साल की तुलना में 15-20 प्रतिशत अधिक है। इससे आने वाले महीनों में किसानों और निर्यातकों दोनों को बेहतर दाम मिलने की संभावना जताई जा रही है।