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    Gold नहीं Copper Silver में आने वाली है तूफानी तेजी! अजय केडिया ने दिया टारगेट, खरीदें या नहीं? 12 सवालों में जानें

    Updated: Wed, 15 Apr 2026 03:47 AM (IST)

    Gold vs Copper Silver Investment: अजय केडिया के अनुसार, निवेशकों को सोने के बजाय कॉपर और सिल्वर पर ध्यान देना चाहिए। ये धातुएं 'क्रिटिकल मेटल्स' बन चु ...और पढ़ें

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    Gold नहीं Copper Silver में आने वाली है तूफानी तेजी! अजय केडिया ने दिया टारगेट, खरीदें या नहीं? 12 सवालों में जानें

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    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

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    नई दिल्ली| शेयर बाजार की हलचल और सोने-चांदी की चमक के बीच एक ऐसी कमोडिटी है, जो साइलेंट किलर की तरह ऊपर बढ़ रही है- वह है कॉपर, यानी तांबा। निवेशकों का ध्यान अक्सर पीली धातु यानी गोल्ड पर रहता है।

    लेकिन एक्सपर्ट्स की मानें तो असली खेल अब बेस मेटल्स, खासकर कॉपर और सिल्वर में होने (Copper Silver Investment) वाला है। चांदी की किल्लत और माइनिंग में आ रही दिक्कतों ने बाजार का समीकरण बदल दिया है।

    केडिया एडवाइजरी के डायरेक्टर अजय केडिया के मुताबिक, कॉपर और सिल्वर अब 'क्रिटिकल मेटल्स' (critical metals investment India) की श्रेणी में आ चुके हैं और आने वाले दो-तीन महीनों में इनमें ऐसी रैली दिख सकती है जो पिछले कई रिकॉर्ड तोड़ देगी।

    आइए अजय केडिया से 12 सवालों में समझते हैं कि आखिर कमोडिटी बाजार में क्या बड़ा होने वाला है। और आने वाले दिनों में सोना-चांदी और कॉपर के दाम कहां पहुंच सकते हैं, टारगेट प्राइस क्या है, निवेश करें या नहीं।

    सवाल 1: कॉपर और सिल्वर को लेकर इतना उत्साह क्यों है? क्या ये गोल्ड से बेहतर प्रदर्शन करेंगे?

    अजय केडिया: देखिए, हमने पिछले साल ही कॉपर और चांदी को 'क्रिटिकल मेटल' की लिस्ट में शामिल होते देखा है। बाजार में एक खास रेशियो होता है- सिल्वर कॉपर रेशियो (copper vs silver ratio)। फिलहाल इस रेशियो में एक बड़ा बदलाव यानी ब्रेकडाउन होने की तैयारी है। इसका सीधा मतलब यह है कि या तो चांदी में गिरावट आएगी और कॉपर बढ़ेगा, या फिर अगर चांदी बढ़ी भी, तो कॉपर उससे कहीं ज्यादा तेज रफ्तार से भागेगा।

    सवाल 2: घरेलू बाजार (MCX) में कॉपर के क्या टारगेट दिख रहे हैं?

    अजय केडिया: डोमेस्टिक मार्केट में कॉपर फिलहाल ₹1,280 के करीब है। चार्ट्स पर एक बहुत ही मजबूत 'राउंडिंग बॉटम' बन रहा है। अगर कीमतें ₹1,372 के ऊपर टिकी रहती हैं, तो हम बहुत जल्द ₹1,480 से लेकर ₹1,500 के पार का भाव देखेंगे। यह अब तक का सबसे स्ट्रॉन्ग स्ट्रक्चर है।

    सवाल 3: LME पर कॉपर का टारगेट प्राइस क्या है?

    अजय केडिया: लंदन मेटल एक्सचेंज (LME) पर कॉपर में बड़ी ब्रेकआउट की तैयारी है। अगर यह 13,500 डॉलर के लेवल को पार करता है, तो बेस केस में यह 14,500-14,600 डॉलर तक जाएगा। लेकिन अगर तेजी और बढ़ी (बुल केस), तो यह 16,000 डॉलर से लेकर 16,300 डॉलर प्रति टन (भारतीय करेंसी में करीब 15 लाख रुपए प्रति टन) तक का स्तर छू सकता है।

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    सवाल 4: कॉपर की इस तेजी के पीछे माइनिंग से जुड़ा क्या संकट है?

    अजय केडिया: एक बड़ी खबर 'सल्फ्यूरिक एसिड' को लेकर है। चीन इस एसिड के एक्सपोर्ट पर बैन लगाने की सोच रहा है। सल्फ्यूरिक एसिड माइनिंग ऑपरेशंस के लिए बहुत जरूरी होता है। इसकी कमी से कॉपर, जिंक और सिल्वर की माइनिंग प्रभावित होगी। जब सप्लाई कम होगी, तो भाव अपने आप आसमान छुएंगे।

    सवाल 5: क्या चीन की अर्थव्यवस्था में सुधार से कॉपर को सपोर्ट मिल रहा है?

    अजय केडिया: बिल्कुल। चीन का मैन्युफैक्चरिंग PMI (PMI) अब विस्तार (Expansionary) जोन में आ गया है। वहां इंडस्ट्रियल एक्टिविटी में रिकवरी दिख रही है। चूंकि दुनिया का सबसे बड़ा कॉपर कंज्यूमर चीन है, इसलिए वहां की मांग बढ़ने का सीधा असर ग्लोबल कीमतों पर पड़ रहा है।

    सवाल 6: माइनिंग कंपनियों और स्मेल्टर्स की हालत कैसी है?

    अजय केडिया: इस वक्त कॉपर कॉन्सेंट्रेट के 'ट्रीटमेंट चार्जेस' रिकॉर्ड निचले स्तर यानी लगभग जीरो पर पहुंच गए हैं। यह स्मेल्टर्स के लिए अच्छा नहीं है। साथ ही, माइनिंग एरिया में बार-बार होने वाली हड़ताल और अनरेस्ट की वजह से रॉ मटेरियल की भारी कमी है, जो कीमतों को नीचे नहीं आने देगी।

    सवाल 7: नए जमाने की टेक्नोलॉजी जैसे AI और डेटा सेंटर्स का कॉपर पर क्या असर पड़ेगा?

    अजय केडिया: यह बहुत महत्वपूर्ण है। AI इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा सेंटर्स में कॉपर का भारी इस्तेमाल होता है। जैसे-जैसे डिजिटल क्रांति बढ़ रही है, कॉपर की डिमांड 'स्ट्रक्चरल' रूप से बढ़ रही है। कॉपर सिर्फ एक धातु नहीं, बल्कि भविष्य की एनर्जी का स्रोत बन गया है।

    सवाल 8: कॉपर-गोल्ड रेशियो क्या संकेत दे रहा है?

    अजय केडिया: कॉपर-गोल्ड रेशियो पिछले 50 साल के निचले स्तर पर आ चुका है। इसका मतलब है कि सोने के मुकाबले तांबा इस वक्त बहुत सस्ता है। इतिहास गवाह है कि जब भी यह रेशियो इतना गिरता है, तो कॉपर में एक 'मैसिव' जंप आता है। अगले कुछ सेशन में यह तेजी शुरू हो सकती है।

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    सवाल 9: क्या कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें कॉपर को प्रभावित करेंगी?

    अजय केडिया: हां, कच्चा तेल और कॉपर अक्सर एक ही दिशा में चलते हैं। तेल की कीमतें बढ़ना कॉपर के लिए पॉजिटिव है, क्योंकि यह एनर्जी कॉस्ट और इंडस्ट्रियल सेंटीमेंट को बढ़ाता है।

    सवाल 10: गोल्ड को लेकर आपका क्या नजरिया है? क्या यह ₹1.25 लाख तक जाएगा?

    अजय केडिया: गोल्ड में फिलहाल एक रिट्रेसमेंट यानी हल्की गिरावट या ठहराव दिख रहा है। इंटरनेशनल मार्केट में गोल्ड $5,000 तक जा सकता है, जिसके बाद ही कोई बड़ी गिरावट आएगी। डोमेस्टिक मार्केट में अगर $4,100 का सपोर्ट लेवल टूटता है, तो कीमतें $3,450 तक (भारतीय करेंसी में करीब 1.03 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम) भी आ सकती हैं। लेकिन लॉन्ग टर्म में 1.25 लाख रुपए का स्तर नामुमकिन नहीं है।

    सवाल 11: क्या अगले 2-3 महीनों के लिए कॉपर खरीदना सही रहेगा?

    अजय केडिया: मेरा व्यू पूरी तरह बुलिश है। दो से तीन महीने का नजरिया रखकर खरीदारी की जा सकती है। हालांकि भाव सीधे ऊपर नहीं जाएंगे। मार्केट 14,000 डॉलर जाएगा, फिर थोड़ा नीचे आएगा, फिर 14,500 के पार निकलेगा। गिरावट पर खरीदारी करना ही सही रणनीति होगी।

    सवाल 12: चांदी के निवेशकों के लिए क्या सलाह है?

    अजय केडिया: चांदी में सप्लाई की भारी कमी है। माइनिंग हर्डल्स और इंडस्ट्रियल डिमांड (सोलर और इलेक्ट्रॉनिक्स) की वजह से चांदी आने वाले समय में आउटपरफॉर्म करेगी। निवेशकों को बेस मेटल्स और सिल्वर के कॉम्बो पर ध्यान देना चाहिए।

    अजय केडिया ने निवेशकों का साफ सलाह दी है कि सिर्फ सोना-चांदी ही नहीं, बल्कि कॉपर पर भी पैनी नजर रखें। सप्लाई का संकट और बढ़ती औद्योगिक मांग तांबे को 'नया सोना' बनाने की राह पर है। निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से जरूर चर्चा करें, क्योंकि कमोडिटी बाजार में जोखिम भी अधिक होता है।

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