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    कॉपर बनेगा नया गोल्ड, क्यों एक्सपर्ट 1-2 साल में बड़ी तेजी और सुपरसाइकिल की कर रहे भविष्यवाणी? अजय केडिया ने दिया टारगेट

    Updated: Tue, 02 Jun 2026 05:11 PM (IST)

    Copper Outlook 2026: सोने-चांदी के बाद अब कॉपर में बड़ी सुपरसाइकिल आने की संभावना है। अजय केडिया ने AI, EV और सीमित सप्लाई के कारण कॉपर को 'न्यू गोल्ड ...और पढ़ें

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    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

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    नई दिल्ली| अगर आप सोने और चांदी की हालिया गिरावट या महंगे स्तरों के कारण निवेश के नए विकल्प तलाश रहे हैं, तो कमोडिटी बाजार की एक धातु इन दिनों सबसे ज्यादा चर्चा में है। वह है- कॉपर, यानी तांबा। HDFC सिक्योरिटीज की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि गोल्ड और सिल्वर के बाद अब कॉपर में बड़ी सुपरसाइकिल देखने (copper supercycle 2025) को मिल सकती है। बढ़ती डिमांड, सीमित सप्लाई और AI, EV तथा डेटा सेंटर जैसे सेक्टरों की तेजी के बीच कॉपर को अगला बड़ा कमोडिटी स्टार माना जा रहा है।

    जागरण बिजनेस के वीकली शो 'प्रॉफिट की मंडी' में केडिया एडवाइजरी के डायरेक्टर अजय केडिया ने कॉपर की संभावनाओं, जोखिमों और निवेश के अवसरों पर विस्तार से चर्चा की। पेश हैं इस बातचीत के 11 बड़े सवाल और उनके जवाब। लेकिन पहले समझते हैं कि आखिर MCX पर कॉपर कहां ट्रेड कर रहा है?

    MCX पर कहां पहुंचें कॉपर के ताजा रेट?

    मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी एमसीएक्स पर जून डिलिवरी वाला कॉपर 0.75 फीसदी यानी 10.30 रुपए उछाल (copper price hike) के साथ 1376.10 रुपए प्रति किलोग्राम (copper price today) पर ट्रेड कर रहा है। मंगलवार, 2 जून को ट्रेडिंग के दौरान इसका हाई लेवल 1378 रुपए और लो लेवल 1364 रुपए (copper rate today) रहा। जबकि पिछले कारोबारी सत्र के दौरान यह 1365 रुपए पर क्लोज हुआ था। अब बात करते हैं कि अजय केडिया के 11 सवाल और उनके जवाबों की।

    सवाल 1: कमोडिटी मार्केट में सुपरसाइकिल क्या होती है और यह सामान्य तेजी से कैसे अलग है?

    अजय केडियाः सुपरसाइकिल किसी कमोडिटी में आने वाली सामान्य तेजी नहीं होती, बल्कि कई वर्षों तक चलने वाला एक बड़ा और संरचनात्मक बुल रन होता है। यह तब बनती है जब डिमांड तेजी से बढ़ने लगती है और सप्लाई उसके मुकाबले पीछे रह जाती है। सामान्य तेजी कुछ महीनों या एक-दो सीजन तक चल सकती है, लेकिन सुपरसाइकिल कई साल या एक दशक तक प्रभाव डाल सकती है। कोविड के बाद कई कमोडिटीज में आई तेजी और पिछले तीन वर्षों में सोने की मजबूत रैली इसके उदाहरण हैं। जब सप्लाई-डिमांड का अंतर लंबे समय तक बना रहता है, तब सुपरसाइकिल की स्थिति पैदा होती है।

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    सवाल 2: गोल्ड और सिल्वर के बाद अब कॉपर में सुपरसाइकिल की चर्चा क्यों हो रही है?

    अजय केडियाः पिछले कुछ वर्षों में गोल्ड ने करीब 60% और सिल्वर ने लगभग 140% का रिटर्न दिया है। अब निवेशकों की नजर उस कमोडिटी पर है जो अगले चरण की तेजी का नेतृत्व कर सकती है। कॉपर को आज "न्यू गोल्ड" कहा जा रहा है क्योंकि यह ग्रीन एनर्जी और डिजिटल इकोनॉमी का सबसे महत्वपूर्ण धातु बन चुका है। जिस तरह सोना आर्थिक अनिश्चितता में सुरक्षित निवेश माना जाता है, उसी तरह कॉपर औद्योगिक विकास और तकनीकी विस्तार का प्रतीक बन रहा है। AI, इलेक्ट्रिक व्हीकल, सोलर एनर्जी और पावर इंफ्रास्ट्रक्चर की बढ़ती जरूरतें इसे अगला कमोडिटी सुपरस्टार बना सकती हैं।

    सवाल 3: आखिर कॉपर की डिमांड इतनी तेजी से क्यों बढ़ रही है?

    अजय केडियाः कॉपर की सबसे बड़ी ताकत उसकी स्ट्रक्चरल डिमांड है। आज दुनिया डिजिटल और इलेक्ट्रिफिकेशन के दौर से गुजर रही है। इलेक्ट्रिक व्हीकल में पारंपरिक पेट्रोल या डीजल कारों की तुलना में कई गुना ज्यादा कॉपर का इस्तेमाल होता है। इसके अलावा AI आधारित डेटा सेंटर, हाई-परफॉर्मेंस सर्वर, पावर केबलिंग और ग्रिड इंफ्रास्ट्रक्चर में भी कॉपर की भारी जरूरत होती है। आने वाले वर्षों में AI, EV और पावर ग्रिड्स की वृद्धि सीधे तौर पर कॉपर की मांग को बढ़ाएगी। बिना कॉपर के न AI का विस्तार संभव है, न EV का और न ही पावर ग्रिड का आधुनिकीकरण।

    यह भी पढ़ें- गोल्ड-सिल्वर के बाद कॉपर में आने वाली है 'बड़ी सुपरसाइकिल', AI-EV और पावर ग्रिड की डिमांड से आएगा बूम; है कमाई का मौका?

    सवाल 4: चीन, अमेरिका और भारत इस बढ़ती मांग में क्या भूमिका निभा रहे हैं?

    अजय केडियाः चीन दुनिया का सबसे बड़ा मैन्युफैक्चरिंग हब है और कॉपर की खपत में उसकी हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है। यही कारण है कि वैश्विक मांग का बड़ा हिस्सा चीन से आता है। वहीं अमेरिका और भारत इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार, मैन्युफैक्चरिंग और औद्योगिक विकास के जरिए मांग को आगे बढ़ा रहे हैं। भारत में "मेक इन इंडिया" और अमेरिका में घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने वाली नीतियां कॉपर की खपत को बढ़ा रही हैं। भारत के संदर्भ में उन्होंने कहा कि पावर सेक्टर, निर्माण क्षेत्र, ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री और इलेक्ट्रिकल उपकरणों में कॉपर का उपयोग सबसे तेजी से बढ़ने वाला है।

    सवाल 5: क्या सप्लाई की कमी कॉपर में बड़ा बूम ला सकती है?

    अजय केडियाः कॉपर की कहानी केवल बढ़ती मांग की नहीं, बल्कि घटती सप्लाई की भी है। 2015 के बाद दुनिया में कोई बड़ी नई कॉपर खदान सामने नहीं आई है। दूसरी ओर, चिली जैसे बड़े उत्पादक देशों में उत्पादन घट रहा है। कई प्रमुख खदानों का आउटपुट कमजोर हुआ है। जब एक तरफ EV, डेटा सेंटर और ग्रीन एनर्जी की मांग लगातार बढ़ रही हो और दूसरी तरफ नई सप्लाई न जुड़ रही हो, तो कीमतों में तेजी आना स्वाभाविक है। यही वजह है कि पिछले ढाई वर्षों में कॉपर की कीमतों में उल्लेखनीय उछाल देखने को मिला है।

    सवाल 6: क्या बढ़ती उत्पादन लागत भी कॉपर की कीमतों को ऊपर ले जाएगी?

    अजय केडियाः कॉपर उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले सल्फ्यूरिक एसिड की कीमतों में 200% से ज्यादा वृद्धि हुई है। इसके अलावा ऊर्जा लागत, श्रम लागत और परिवहन खर्च भी बढ़े हैं। चीन द्वारा सल्फ्यूरिक एसिड के निर्यात पर प्रतिबंधात्मक कदमों ने उत्पादन लागत को और बढ़ा दिया है। जब किसी कमोडिटी की उत्पादन लागत तेजी से बढ़ती है, तो उसका असर अंततः बाजार कीमतों पर भी पड़ता है। बढ़ती लागत कॉपर की कीमतों को समर्थन देने वाले प्रमुख कारकों में से एक है।

    सवाल 7: कॉपर-टू-गोल्ड और कॉपर-टू-सिल्वर रेशियो मल्टी-डिकेड लो पर होने का क्या मतलब है?

    अजय केडियाः गोल्ड आमतौर पर भय, अनिश्चितता और सुरक्षित निवेश का प्रतिनिधित्व करता है, जबकि कॉपर आर्थिक गतिविधि और औद्योगिक विकास का प्रतीक है। जब कॉपर-टू-गोल्ड रेशियो बहुत नीचे होता है, तो इसका मतलब होता है कि गोल्ड की तुलना में कॉपर अपेक्षाकृत सस्ता है। गोल्ड और सिल्वर पहले ही बड़ी तेजी दिखा चुके हैं, जबकि कॉपर अभी उस रैली से पीछे है। इसलिए यह रेशियो संकेत देता है कि कॉपर में आगे की संभावनाएं अभी भी मजबूत हो सकती हैं।

    सवाल 8: क्या अमेरिका-ईरान तनाव, मंदी या सप्लाई सरप्लस कॉपर की सुपरसाइकिल रोक सकते हैं?

    अजय केडियाः ये सभी जोखिम मौजूद हैं, लेकिन ये लंबे समय की कहानी को पूरी तरह नहीं बदलते। जियोपॉलिटिकल तनाव, आर्थिक मंदी या नीतिगत बदलाव अल्पकालिक दबाव जरूर पैदा कर सकते हैं। इससे कीमतों में उतार-चढ़ाव और मांग में अस्थायी कमी आ सकती है। हालांकि, उनका मानना है कि दुनिया जिस तेजी से ऊर्जा संक्रमण और डिजिटलीकरण की ओर बढ़ रही है, उसमें कॉपर की भूमिका लगातार मजबूत होती जाएगी। इसलिए ये जोखिम सुपरसाइकिल को धीमा कर सकते हैं, लेकिन पूरी तरह खत्म नहीं कर सकते।

    सवाल 9: आम निवेशक कॉपर में निवेश कैसे कर सकता है?

    अजय केडियाः कॉपर केवल बड़े निवेशकों का खेल नहीं है। रिटेल निवेशक भी इसमें भागीदारी कर सकते हैं। भारत में कॉपर का सबसे सीधा निवेश विकल्प MCX (मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज) पर उपलब्ध फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट हैं। निवेशक कमोडिटी ट्रेडिंग अकाउंट के जरिए इसमें ट्रेड कर सकते हैं। हालांकि, फ्यूचर्स बाजार लीवरेज आधारित होता है, इसलिए इसमें जोखिम ज्यादा रहता है। निवेशकों को कॉन्ट्रैक्ट साइज, मार्जिन और डिलीवरी नियमों को समझकर ही निवेश करना चाहिए। जिन निवेशकों को कमोडिटी ट्रेडिंग का अनुभव नहीं है, उन्हें पहले पर्याप्त जानकारी हासिल करनी चाहिए।

    सवाल 10: कॉपर की सुपरसाइकिल का फायदा उठाने का सबसे अच्छा तरीका क्या है?

    अजय केडियाः यह निवेशक की प्रोफाइल पर निर्भर करता है। यदि कोई सक्रिय ट्रेडर है और कमोडिटी बाजार की समझ रखता है, तो MCX फ्यूचर्स सबसे शुद्ध और सीधा विकल्प हो सकता है। वहीं लंबी अवधि के निवेशक कॉपर से जुड़ी कंपनियों के शेयरों पर विचार कर सकते हैं।

    अजय केडिया ने उदाहरण देते हुए कहा कि हिंदुस्तान कॉपर और वेदांता जैसी कंपनियां कॉपर सेक्टर से जुड़ी हुई हैं। हालांकि शेयरों में निवेश करते समय कंपनी के प्रबंधन, बैलेंस शीट और बिजनेस मॉडल को भी समझना जरूरी है। भारत में फिलहाल कॉपर ETF का विकल्प सीमित है, इसलिए निवेशकों के पास MCX और कॉपर आधारित शेयर प्रमुख रास्ते हैं।

    सवाल 11: अगले 1-2 साल में कॉपर की कीमतें कहां तक जा सकती हैं?

    अजय केडियाः अगले एक से दो वर्षों में कॉपर की कीमतों में और तेजी की गुंजाइश बनी हुई है। सप्लाई की चुनौतियां अभी भी बरकरार हैं, जबकि मांग लगातार मजबूत हो रही है। यदि यही स्थिति बनी रहती है तो कॉपर की कीमतें मौजूदा स्तरों से काफी ऊपर जा सकती हैं।

    घरेलू बाजार में कॉपर के लिए 1,650 रुपए प्रति किलोग्राम तक का स्तर (copper price target 2026) दिखाई देता है। वहीं अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें 16,000 डॉलर प्रति टन तक पहुंच सकती हैं। सप्लाई और डिमांड के बीच बढ़ता अंतर आने वाले समय में कॉपर को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकता है।

    अजय केडिया ने दी क्या सलाह?

    कॉपर को लेकर बाजार में बढ़ता उत्साह केवल सट्टेबाजी नहीं, बल्कि मजबूत फंडामेंटल्स पर आधारित कहानी है। AI, डेटा सेंटर, इलेक्ट्रिक व्हीकल, रिन्यूएबल एनर्जी और पावर ग्रिड विस्तार जैसी वैश्विक थीम्स कॉपर की मांग को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा रही हैं। दूसरी तरफ नई खदानों की कमी और उत्पादन लागत में बढ़ोतरी सप्लाई पर दबाव बनाए हुए हैं।

    अजय केडिया का मानना है कि यदि मौजूदा रुझान जारी रहे तो कॉपर आने वाले वर्षों में कमोडिटी बाजार का नया स्टार बन सकता है। हालांकि निवेशकों को संभावित जोखिमों और उतार-चढ़ाव को ध्यान में रखते हुए ही निवेश का फैसला करना चाहिए।