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    Gold Loan India: कौन ले रहा सबसे ज्यादा गोल्ड लोन? 3 साल में 4 गुना बढ़ी मांग, लोग औसतन ₹2 लाख तक कर्ज ले रहे!

    Updated: Tue, 14 Apr 2026 09:14 PM (IST)

    Gold Loan vs Personal Loan: भारत में गोल्ड लोन का बाजार पिछले तीन सालों में चार गुना बढ़ गया है। अब यह भारतीयों के लिए एक भरोसेमंद एटीएम बन गया है, जह ...और पढ़ें

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    भारत में गोल्ड लोन की मांग 3 साल में 4 गुना बढ़ी, औसत कर्ज ₹2 लाख

    नई दिल्ली| अगर आपके घर में सोना रखा है, तो वह अब सिर्फ तिजोरी की शोभा नहीं बढ़ा रहा, बल्कि भारतीयों के लिए सबसे भरोसेमंद एटीएम बनता जा रहा है। पिछले तीन सालों के आंकड़े गवाह हैं कि देश में गोल्ड लोन का बाजार रॉकेट (Gold Loan India) की रफ्तार से बढ़ा है। मंगलवार को आई 'ट्रांसयूनियन सिबिल' की ताजा रिपोर्ट ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं।

    3 साल में 4 गुना बढ़ा कारोबार

    रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च 2022 के मुकाबले गोल्ड लोन का बैलेंस करीब चार गुना बढ़ चुका है। भारत के कुल रिटेल लोन पोर्टफोलियो में गोल्ड लोन की हिस्सेदारी, जो पहले महज 5.9% थी, वह दिसंबर 2025 तक बढ़कर 11% के करीब पहुंच गई है। यानी लोग अब पर्सनल लोन या दूसरे रास्तों के बजाय अपने सोने पर कर्ज लेना ज्यादा सुरक्षित और आसान मान रहे हैं।

    बढ़ गया 'टिकट साइज'

    दिलचस्प बात यह है कि अब लोग पहले के मुकाबले मोटा कर्ज ले रहे हैं। मार्च 2022 में जहां प्रति खाता औसत गोल्ड लोन 1.1 लाख रुपए था, वहीं दिसंबर 2025 में यह बढ़कर 1.9 लाख रुपए (करीब 2 लाख) हो गया है। अगर लोन वैल्यू की बात करें, तो यह 2022 की पहली तिमाही के 90 हजार रुपए से उछलकर 2025 के अंत तक 1.96 लाख रुपए तक पहुंच गई है।

    कौन ले रहा है सबसे ज्यादा लोन?

    अब गोल्ड लोन लेने वालों का प्रोफाइल पूरी तरह बदल चुका है। पहले इसे मजबूरी का सौदा माना जाता था, लेकिन अब महिलाएं और बेहतर 'क्रेडिट स्कोर' वाले लोग भी इसमें निवेश कर रहे हैं।

    • प्राइम कस्टमर्स: अच्छे क्रेडिट प्रोफाइल वाले ग्राहकों की हिस्सेदारी 43% से बढ़कर 52% हो गई है।
    • बैंकों का दबदबा: सरकारी बैंकों की हिस्सेदारी इस बाजार में 57% से बढ़कर 62% हो गई है।
    • NBFC की ग्रोथ: नॉन-बैंकिंग कंपनियों की हिस्सेदारी भी 7% से बढ़कर 11% पर पहुंच गई है।

    बड़े लोन की बढ़ती चाहत

    रिपोर्ट बताती है कि अब उधार लेने वाले ग्राहकों का भरोसा बढ़ रहा है। दिसंबर 2022 में एक ग्राहक पर औसतन 1.9 लाख रुपए का बकाया था, जो अब 3.1 लाख रुपए हो चुका है। साथ ही, 2.5 लाख रुपए से ज्यादा का बड़ा लोन लेने वाले लोगों की तादाद भी 10% से बढ़कर 14% हो गई है।

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    क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

    ट्रांसयूनियन सिबिल के एमडी और सीईओ भावेश जैन के अनुसार,

    भारत में सोने का हमेशा से सांस्कृतिक महत्व रहा है, लेकिन अब इसके इस्तेमाल के तरीके में बड़ा 'स्ट्रक्चरल बदलाव' आया है। अब गोल्ड लोन एक संगठित और आसानी से मिलने वाला 'सेफ लोन' बन चुका है। यह तेजी दिखाती है कि बैंकों का भरोसा और आम लोगों की जरूरत, दोनों इस पर टिके हैं।"

    सीधे शब्दों में कहें तो सोना अब केवल शादी-ब्याह के लिए नहीं, बल्कि बिजनेस बढ़ाने और जरूरी जरूरतों को पूरा करने का सबसे बड़ा सहारा बन गया है।

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