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चना, अरहर और मूंग जैसी दालों की कीमतें फिर बढ़ेंगी? RBI की रिसर्च में सामने आया सरकार का प्लान

Updated: Tue, 18 Aug 2026 08:13 PM (GMT+05:30)

भारतीय रिजर्व बैंक की रिसर्च के अनुसार, दालों का पर्याप्त स्टॉक होने से कीमतों में तेजी की संभावना कम है। सरकार ने उत्पादन बढ़ाने, बफर स्टॉक मजबूत करने और 'भारत दाल' जैसी योजनाओं से महंगाई नियंत्रित की है।

दालों पर सामने आई RBI की रिसर्च

दालों पर सामने आई RBI की रिसर्च

HighLights

  1. दालों का पर्याप्त स्टॉक, कीमतों में तेजी की संभावना कम।

  2. उत्पादन में जबरदस्त बढ़ोतरी, बाजार में आपूर्ति हुई मजबूत।

  3. सरकार के हस्तक्षेप से दालों की महंगाई पर नियंत्रण संभव।

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| दालों की बढ़ती कीमतें आम लोगों पर सीधा असर डालती हैं। हालांकि बढ़ती कीमतों से परेशान उपभोक्ताओं के लिए राहत की खबर है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के रिसर्च पेपर “Pulses Inflation in India: A Study of Gram, Tur and Moong” के अनुसार दालों की कीमतें मुख्य रूप से उत्पादन, उपलब्ध स्टॉक (Pulses Stock), आयात और सरकारी हस्तक्षेप पर निर्भर करती हैं। रिपोर्ट में पाया गया है कि दाल का स्टॉक पर्याप्त है जिससे कीमतों में तेजी की संभावना कम हो जाती है।

दाल उत्पादन में जबरदस्त बढ़ोतरी

RBI की स्टडी बताती है कि पिछले डेढ़ दशक में दाल उत्पादन में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। देश का कुल दाल उत्पादन 2007-08 के 14.8 मिलियन टन से बढ़कर 2023-24 में 23.4 मिलियन टन तक पहुंच गया। चना उत्पादन 5.7 मिलियन टन से बढ़कर 12.1 मिलियन टन हो गया, जबकि मूंग का उत्पादन भी दोगुने से अधिक बढ़ा है। उत्पादन में इस बढ़ोतरी ने बाजार में आपूर्ति को मजबूत किया है।

महंगाई कंट्रोल करने के लिए सरकार का कदम

रिपोर्ट के मुताबिक सरकार ने दालों की महंगाई को नियंत्रित करने के लिए कई कदम उठाए हैं। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (NFSM) के जरिए उत्पादन बढ़ाने, न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में वृद्धि, बफर स्टॉक बनाने और जरूरत पड़ने पर बाजार में दाल जारी करने जैसी रणनीतियां अपनाई गई हैं। 2015-16 में दालों की कीमतों में भारी उछाल के बाद सरकार ने बफर स्टॉक नीति को मजबूत किया और NAFED के जरिए बड़े पैमाने पर खरीद शुरू की।

रिसर्च में बताया गया है कि NAFED जरूरत पड़ने पर अपने स्टॉक को बाजार में उतारकर कीमतों को नियंत्रित करता है। सरकार ने ‘भारत दाल’ (Bharat Dal Scheme) जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से उपभोक्ताओं को सस्ती दाल उपलब्ध कराने की भी पहल की है। इसके अलावा जमाखोरी रोकने के लिए समय-समय पर स्टॉक सीमा लागू की गई और आयात नियमों में भी बदलाव किए गए।

स्टॉक-टू-यूज के रेश्यू से घटा दाम

RBI ने रिसर्च में पाया कि दालों के स्टॉक और कीमतों के बीच सीधा संबंध है। जब स्टॉक-टू-यूज (STU) अनुपात बढ़ता है, तब कीमतों पर दबाव कम होता है। यानी बाजार में पर्याप्त उपलब्धता होने पर महंगाई नियंत्रित रहती है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि दालों की कीमतों को स्थिर रखने के लिए घरेलू उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ आयात और बफर स्टॉक का प्रभावी प्रबंधन बेहद जरूरी है।

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इस साल का दाल स्टॉक

साल 2026 में अलनीनो के असर से कम बारिश और सूखे का अनुमान पहले ही लगाया जा चुका था, जिसके चलते सरकार ने अपनी तैयारी कर ली थी। सरकार की ओर से दालों का बफर स्टॉक मजबूत बनाया जा चुका था। कृषि मंत्रालय की ओर से मिली जानकारी के मुताबिक साल 2026-27 के लिए दालों का स्टॉक 43 लाख मीट्रिक टन रहा है।