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    Silver Price Crash: जंग के बीच चांदी 10% क्रैश! बढ़ने के बजाय ₹20000 तक क्यों गिरे दाम? क्या करें निवेशक

    Updated: Tue, 03 Mar 2026 10:26 PM (IST)

    Silver Price Crash: मिडिल ईस्ट में तनाव के बावजूद चांदी की कीमतों में भारी गिरावट आई है, अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगभग 10% और MCX पर ₹20,000 तक की कमी ...और पढ़ें

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    चांदी की कीमत में बड़ी गिरावट: डॉलर की मजबूती और बॉन्ड यील्ड ने तोड़ा भाव, क्या करें निवेशक

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    नई दिल्ली| मिडिल ईस्ट में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने के बावजूद चांदी में जोरदार गिरावट (silver price crash) आई है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें करीब 10% टूट गई हैं। मंगलवार को सिल्वर लगभग 80-81 डॉलर के आसपास ट्रेड कर रही थी। भारतीय वायदा बाजार MCX शाम 5 बजे खुला, वहां भी चांदी में जोरदार गिरावट देखी गई।

    MCX पर चांदी की कीमतों में 20,000 रुपए तक गिरावट (silver rate crash) दर्ज हुई। अनुमान है कि बुधवार को भी सोने-चांदी में गिरावट आ सकती है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ रहा है तो चांदी क्यों गिर रही है? लेकिन पहले समझते हैं चांदी के ताजा रेट क्या हैं?

    MCX और कॉमोक्स पर क्या हैं चांदी के ताजा रेट?

    एमसीएक्स पर मई 2026 डिलिवरी वाली चांदी में 4.12 फीसदी की गिरावट आई और कीमत 11,482 रुपए सस्ती होकर 2,66,999 रुपए हो (silver price today) गई। इस दौरान इसका हाई लेवल 2,67,953 रुपए और लो लेवल 2,57,800 रुपए (silver rate today) रहा।

    जबकि पिछले कारोबारी सत्र के दौरान यह 2,78,481 रुपए पर क्लोज हुई थी। पिछले कारोबारी सत्र और आज के लो लेवल को देखें तो चांदी में 20,681 की भारी कमी आई।

    वहीं वैश्विक बाजार में चांदी 6.29 गिरावट के साथ 83.26 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रही थी। इस दौरान इसमें 5.58 डॉलर की कमी देखी गई।

    अब बड़ा सवाल: बढ़ने के बजाय क्यों आई गिरावट?

    दरअसल, इस बार सुरक्षित निवेश (सेफ हेवन) की डिमांड को मजबूत अमेरिकी डॉलर ने दबा दिया है। डॉलर इंडेक्स पिछले 5 दिनों में 1.4% चढ़ चुका है। यह इंडेक्स 96 तक गिरने के बाद अब 100 के करीब पहुंच गया है, जो आखिरी बार मई 2025 में देखा गया था। जब डॉलर मजबूत होता है तो सोना-चांदी जैसे नॉन-यील्डिंग एसेट्स पर दबाव आता है।

    साथ ही, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड भी बढ़ी हैं। बढ़ती ऊर्जा कीमतों और मिडिल ईस्ट तनाव (middile east tensions) के कारण महंगाई की चिंता बढ़ी है। इससे निवेशक अमेरिकी ट्रेजरी की ओर झुके हैं। बॉन्ड यील्ड बढ़ने का मतलब है कि सोना-चांदी जैसे बिना ब्याज वाले निवेश कम आकर्षक हो जाते हैं।

    यह भी पढ़ें- मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच सोने-चांदी में भारी गिरावट, एक झटके में ₹18000 तक गिरे दाम

    तेल की कीमतें उछलीं, गोल्ड में जोरदार गिरावट

    तेल की कीमतें मंगलवार को करीब 9% उछलकर 85 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गईं। उधर सोना भी दबाव में रहा और 4% गिरकर 5,111 डॉलर प्रति औंस (gold price crash) से नीचे चला गया। चांदी ने पिछले सत्र की गिरावट को आगे बढ़ाया।

    फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति भी अहम फैक्टर है। अब अगली दर कटौती की उम्मीद जुलाई से खिसककर सितंबर पर पहुंच गई है। 2026 में दो बार 25 बेसिस प्वाइंट की कटौती की उम्मीद है। लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरें बनी रहीं तो सोना-चांदी पर दबाव बना रह सकता है।

    इस बीच अमेरिका के ईरान पर हमले तेज होने की आशंका है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों पर खतरा मंडरा रहा है, जिससे ऊर्जा सप्लाई प्रभावित हो सकती है।

    निवेशकों के लिए क्या मतलब?

    अगर डॉलर और यील्ड मजबूत रहते हैं तो चांदी में और दबाव दिख सकता है। शॉर्ट टर्म ट्रेडर्स सतर्क रहें। लॉन्ग टर्म निवेशक गिरावट को चरणबद्ध खरीद के मौके के तौर पर देख सकते हैं, लेकिन उतार-चढ़ाव अभी जारी रह सकता है।