₹67 से ₹47 पर आ गए चीनी के दाम, मगर आम जनता को अभी भी क्यों नहीं मिल रही सस्ती?
मिलों में चीनी की कीमतें रिकॉर्ड ₹67 से गिरकर ₹47 प्रति किलो हो गई हैं, जिसमें 30% की गिरावट दर्ज ...और पढ़ें
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चीनी की मिलों में कीमतें कम होने के बाद भी खुदरा बाजार में नहीं कम हो रही कीमत
HighLights
मिलों में चीनी की कीमत ₹67 से ₹47 हुई।
खुदरा बाजार में अभी भी पुरानी दरों पर बिक रही।
आम जनता को सस्ती चीनी के लिए 10 दिन इंतजार।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| चीनी की कीमतों में भारी-भरकम उछाल देखने को मिला है, खुले बाजारों में चीनी ₹80 प्रति किलो तक भी पहुंच गई है। वहीं मिलों में भी ₹67 प्रति किलो कीमतें पहुंची थीं जो अब तक का रिकॉर्ड प्राइस रहा है। हालांकि अब चीनी की कीमतों में काफी गिरावट देखी गई है। 31 अगस्त को कीमतों में 30 फीसदी की तगड़ी गिरावट देखने को मिला है, इस गिरावट का असर थोक बाजार में लगभग तुरंत दिखता है।
₹67 से ₹47 पहुंचे चीनी के दाम
18 अगस्त को मिलों में चीनी की कीमत अब तक के सबसे उच्चतम स्तर पर पहुंची थीं और दाम ₹67 प्रति किलो तक पहुंच गए थे। अब कीमतों में 30 फीसदी की कमी आई है और 31 अगस्त 2026 को मौजूदा कीमत ₹47 प्रति किलो रह गई है। उद्योग सूत्रों का कहना है कि इस गिरावट का असर अभी तक खुदरा बाजार में देखने को नहीं मिला है।
रिटेल प्राइज में भी आएगी कमी?
मिलों में आई गिरावट का असर अभी तक खुदरा बाजार में नहीं दिखा है। मीडिया के सूत्रों ने बताया कि जिन खुदरा विक्रेताओं ने पहले ऊंची दरों पर स्टॉक खरीदा था, वे नुकसान में इसे बेचना नहीं चाहते और जब तक उनका मौजूदा स्टॉक खत्म नहीं हो जाता, वे उसे पुरानी दरों पर ही बेचते रहेंगे। आमतौर पर एक खुदरा विक्रेता के पास चीनी के 10-15 बैग होते हैं, जिनमें से हर एक का वजन 50 किलोग्राम होता है। जब कम दर पर नया स्टॉक खरीदा जाएगा, तभी खुदरा कीमतों में उसी हिसाब से बदलाव होगा।
चीनी उद्योग के एक सूत्र ने कहा, ‘‘खुदरा कीमतों में बदलाव दिखने में कम से कम 10 दिन लगते हैं।’’ चीनी की मिल कीमतों में गिरावट सरकार के उस फैसले के बाद आई है जिसमें उन मिलों को निर्यात के लिए रिफाइंड की गई चीनी को घरेलू बाजार में बेचने की इजाजत दी गई है।
थोक उपभोक्ताओं के मासिक मात्रा की होगी जांच
अनुमान लगाया गया है कि अगले दो महीने में लगभग 3-3.5 लाख टन रिफाइंड चीनी घरेलू बाजार में आएगी। इसके अलावा, बड़े पैमाने पर चीनी इस्तेमाल करने वाले थोक उपभोक्ता जिन्होंने 15 दिन से ज्यादा समय से स्टॉक रखा हुआ था, उन्होंने सरकार के नए नियमों का पालन करने के लिए अपना स्टॉक कम कर दिया है।
1 सितंबर से, महीने में 10 टन से ज्यादा चीनी इस्तेमाल करने वाले थोक उपभोक्ताओं को लगातार 15 दिन से ज्यादा समय तक स्टॉक रखने की इजाजत नहीं होगी। हर मिल द्वारा थोक उपभोक्ताओं को बेची जाने वाली मासिक मात्रा चाहे सीधे हो या डीलर के जरिये की अब जांच की जाएगी।
चीनी के स्टॉक पर नियम सख्स
चीनी उद्योग के सूत्रों ने बताया कि एक्स-मिल और थोक कीमतों के बीच ₹2-₹3 प्रति किलोग्राम का अंतर और मिल और रिटेल प्राइस के बीच ₹7-₹8 प्रति किलोग्राम का अंतर होना आम बात है। आयात खोलने के अलावा, सरकार ने थोक ग्राहकों और डीलर के लिए स्टॉक रखने के नियमों को सख्त कर दिया है और पहले ही चीनी के निर्यात पर रोक लगा दी थी।
