फूड PLI के जरिए आया 9207 करोड़ का निवेश, 3.29 लाख लोगों को मिला रोजगार; सरकार ने दी जानकारी
खाद्य प्रसंस्करण उद्योग की PLI योजना ने ₹9,207 करोड़ का निवेश आकर्षित किया है, जिससे 3.29 लाख नौकरियां पैदा हुई हैं। 2021-22 से 2026-27 तक चलने वाली इ ...और पढ़ें

फूड PLI के जरिए आया 9207 करोड़ का निवेश, 3.29 लाख लोगों को मिला रोजगार
आईएएनएस, नई दिल्ली। मिनिस्ट्री ऑफ फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री की प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना के तहत अब तक 9,207 करोड़ रुपए का निवेश आकर्षित हुआ है और करीब 3.29 लाख नौकरियां पैदा हुई हैं। यह जानकारी केंद्र सरकार ने मंगलवार को दी।
यह योजना वित्त वर्ष 2021-22 से 2026-27 तक छह साल के लिए लागू की गई है, जिसका कुल बजट 10,900 करोड़ रुपए है। इस योजना का उद्देश्य वैल्यू एडिशन बढ़ाना, प्रोसेसिंग क्षमता का विस्तार करना और खासकर ग्रामीण व गैर-कृषि क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा करना है।
इस योजना के तहत रेडी-टू-कुक और रेडी-टू-ईट (आरटीसी/आरटीई) फूड, प्रसंस्कृत फल और सब्जियां, समुद्री उत्पाद और मोजरेला चीज जैसे प्रमुख सेक्टर शामिल हैं। इसके अलावा MSME सेक्टर के इनोवेटिव और ऑर्गेनिक प्रोडक्ट्स को भी बढ़ावा दिया जा रहा है, साथ ही ब्रांडिंग और मार्केटिंग के जरिए भारतीय फूड प्रोडक्ट्स की वैश्विक पहचान मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।
MSME सेक्टर की मजबूत भागीदारी
इस योजना के तहत अब तक 128 कंपनियों को मंजूरी दी गई है, जो देशभर में 274 यूनिट्स चला रही हैं। इसमें MSME सेक्टर की मजबूत भागीदारी है, जहां 68 एमएसएमई कंपनियां और 40 कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स शामिल हैं। सरकार के अनुसार, इस योजना से कई राज्यों में फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स की क्षमता बढ़ी है, तकनीक में सुधार हुआ है और आधुनिकीकरण को बढ़ावा मिला है।
₹7722 करोड़ के लक्ष्य के मुकाबले ₹9207 करोड़ का निवेश
इस योजना के तहत कुल निवेश शुरुआती अनुमान से ज्यादा रहा है, और 22 राज्यों में 7,722 करोड़ रुपए के लक्ष्य के मुकाबले अब तक 9,207 करोड़ रुपए का निवेश हो चुका है। इसके साथ ही करीब 34 लाख मीट्रिक टन प्रति वर्ष की प्रोसेसिंग और स्टोरेज क्षमता भी जोड़ी गई है।
सरकार ने बताया कि PLI स्कीम के तहत आने वाले उत्पादों की बिक्री में 10.58 प्रतिशत की सालाना वृद्धि (CGR) दर्ज की गई है, जबकि निर्यात में 7.41 प्रतिशत की सालाना वृद्धि हुई है, वो भी वैश्विक चुनौतियों के बावजूद।
इस योजना के तहत मिलेट (मोटे अनाज) से बने उत्पादों की मांग में भी तेज बढ़ोतरी हुई है। इनकी बिक्री वित्त वर्ष 2023 में 345.73 करोड़ रुपए से बढ़कर वित्त वर्ष 2025 में 1,845.25 करोड़ रुपए तक पहुंच गई है। इस अवधि के दौरान बाजरा (मिलेट) की खरीद में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
कमेंट्स
सभी कमेंट्स (0)
बातचीत में शामिल हों
कृपया धैर्य रखें।