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    स्टार्टअप को ₹10000 करोड़ का बूस्टर 'डोज', क्या बदलेगा इंडिया का डीप-टेक गेम? समझें पूरा प्लान

    By Jagran BusinessEdited By: Ankit Kumar Katiyar
    Updated: Fri, 13 Feb 2026 09:33 PM (IST)

    Startup India Fund of Funds 2.0: सरकार ने 'स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स' के दूसरे चरण को मंजूरी दी है। इसमें ₹10,000 करोड़ का नया कोष बनेगा, जो शुरुआ ...और पढ़ें

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    स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स का दूसरा चरण मंजूर, ₹10000 करोड़ से डीप-टेक को मिलेगी नई उड़ान

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    नई दिल्ली| सरकार ने स्टार्टअप्स को बड़ा तोहफा देते हुए 'स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स' (Startup India Fund of Funds) के दूसरे चरण को मंजूरी दे दी है। इस फेज में 10,000 करोड़ रुपए का नया कोष (Rs 10000 crore startup fund) बनाया जाएगा, जिससे शुरुआती चरण के स्टार्टअप और डीप-टेक रिसर्च को ताकत मिलेगी।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi startup initiative) ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए जानकारी दी कि यह फैसला देश में नवाचार और नई तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए अहम कदम है।

    उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री कार्यालय 'सेवा तीर्थ' में पहले दिन जिन फाइलों पर हस्ताक्षर किए गए, उनमें गरीबों, किसानों, युवाओं और महिलाओं के सशक्तीकरण से जुड़े फैसले शामिल थे। इन्हीं में यह 10,000 करोड़ रुपए का स्टार्टअप फंड भी शामिल है।

    सरकार ने 2016 में पहली बार ₹10,000 करोड़ के कोष के साथ 'फंड ऑफ फंड्स' योजना शुरू की थी। पहले चरण के सफल उपयोग के बाद बजट 2025-26 में दूसरी किस्त को मंजूरी दी गई।

    2 लाख से ज्यादा इकाइयों को स्टार्टअप की मान्यता

    उद्योग संवर्धन एवं आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT) के मुताबिक, अब तक 2 लाख से ज्यादा इकाइयों को स्टार्टअप के रूप में मान्यता मिल चुकी है। ये सभी 'स्टार्टअप इंडिया' कार्ययोजना के तहत विभिन्न प्रोत्साहनों के पात्र हैं।

    AIF को पूंजी उपलब्ध कराता है सिडबी

    इस योजना का संचालन भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (SIDBI) करता है। सिडबी, सेबी में पंजीकृत वैकल्पिक निवेश कोष (AIF) को पूंजी उपलब्ध कराता है, जो आगे स्टार्टअप कंपनियों में निवेश करते हैं। खास बात यह है कि जिन एआईएफ को इस फंड से पैसा मिलता है, उन्हें कम से कम दोगुना निवेश स्टार्टअप्स में करना अनिवार्य होता है।

    डीपीआईआईटी इस योजना की निगरानी करता है, जबकि सिडबी परिचालन एजेंसी है। कुल मिलाकर, यह कदम भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम को नई रफ्तार देने और टेक्नोलॉजी आधारित कारोबार को वैश्विक स्तर पर मजबूत करने की दिशा में बड़ा संकेत माना जा रहा है।