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ग्राहकों को क्यों महंगा मिल रहा अंडा और चिकन? असली वजह से पोल्ट्री सेक्टर की बढ़ी चिंता!

Updated: Sun, 30 Aug 2026 03:25 PM (IST)

देशभर में अंडे और चिकन की कीमतों में बढ़ोतरी का मुख्य कारण पोल्ट्री फीड की बढ़ती लागत है, जिसमें मक्का ...और पढ़ें

अंडे और चिकन की कीमतों में तेज उछाल

अंडे और चिकन की कीमतों में तेज उछाल

HighLights

  1. अंडे और चिकन की कीमतें पोल्ट्री फीड से बढ़ीं।

  2. मक्का और सोयाबीन मील की लागत में उछाल।

  3. एथेनॉल उत्पादन से मक्के की मांग में वृद्धि।

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| देशभर में इस साल अंडे और चिकन की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है, जिससे आम ग्राहक प्रोटीन के ये दो सबसे आसान सोर्स की महंगाई से परेशान हैं। मौसम संबंधी समस्याओं और मौसमी सप्लाई में दबावों के चलते चिकन और अंडे महंगे हुए हैं, लेकिन इसकी एक बड़ी वजह सप्लाई चेन के ऊपरी हिस्से में छिपी पोल्ट्री फीड है। मक्का, सोयाबीन मील और अन्य फीड सामग्री की बढ़ती कीमतें हर अंडे और हर किलोग्राम चिकन के उत्पादन की लागत बढ़ा रही हैं।

फीड की कीमतों में उछाल, कमी की चिंता

इस साल दबाव अधिक रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, पोल्ट्री फीड की कीमत लगभग 15% बढ़कर ₹4,400 प्रति क्विंटल पहुंच गई है, जो एक साल पहले करीब ₹3,600 प्रति क्विंटल थी। वहीं, सोयाबीन मील की कीमतें ₹62,000 से ₹65,000 प्रति टन के आसपास बनी हुई हैं। उद्योग का अनुमान है कि नई फसल आने से पहले लगभग 15 लाख टन की कमी रह सकती है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक देश में मक्के की पैदावार अच्छी स्थिति में है, इस फसल की मांग खाद्य और फीड क्षेत्र से आगे भी बढ़ी है। एथेनॉल निर्माताओं द्वारा मक्का की बढ़ती खपत ने उपलब्ध सप्लाई के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ा दी है।

पोल्ट्री खर्च बढ़ने से ग्राहकों पर पड़ता है असर

रिपोर्ट्स के मुताबिक जब मक्का महंगा होता है तो फीड बनाने वाले कीमतें बढ़ा देते हैं। इसके बाद पोल्ट्री किसानों के लिए ब्रॉयलर मुर्गियों को पालने और अंडा देने वाली मुर्गियों को बनाए रखने की लागत बढ़ जाती है। यदि पोल्ट्री फार्मर्स को मिलने वाली कीमतें उसी अनुपात में नहीं बढ़तीं, तो उनका मार्जिन तेजी से घटता है। ऐसे में उत्पादक या तो उत्पादन कम करते हैं या बढ़ी हुई लागत का कुछ हिस्सा ग्राहकों पर डालते हैं। दोनों ही स्थितियों में खुदरा कीमतों पर असर पड़ता है।

अंडे की कीमतें रिकॉर्ड लेवल पर

फीड कीमतों में बढ़ोतरी का असर हाल के बाजार भावों में भी दिखाई दिया। जुलाई में हैदराबाद में फार्म स्तर पर अंडों की कीमतें महीने-दर-महीने 15 प्रतिशत और साल-दर-साल लगभग 40 प्रतिशत बढ़ने की जानकारी मिली। कई बाजारों में खुदरा अंडों की कीमत ₹8.5 से ₹9 प्रति अंडा तक पहुंच गई। भीषण गर्मी ने ब्रॉयलर उत्पादन को भी प्रभावित किया, जिससे चिकन की कीमतों में बढ़ोतरी हुई।

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पशुपालन एवं डेयरी विभाग के अनुसार, भारत में 2024-25 के दौरान 149.11 अरब अंडों का उत्पादन हुआ। इसमें कॉमर्शियल पोल्ट्री की हिस्सेदारी 84.49 प्रतिशत रही।

मक्का और सोया पोल्ट्री फीड की रीढ़

मक्का और सोयाबीन मील पोल्ट्री फीड के दो सबसे महत्वपूर्ण घटक हैं। मक्का ऊर्जा देता है, जबकि सोयाबीन मील प्रोटीन का प्रमुख स्रोत है। हाल के उद्योग अनुमानों के अनुसार, पोल्ट्री फीड में मक्का की हिस्सेदारी लगभग 55-60 प्रतिशत होती है, जबकि प्रोटीन के लिए मुख्य रूप से सोयाबीन मील का उपयोग किया जाता है। इसका मतलब है कि कीमतों में थोड़े समय की बढ़ोतरी भी पोल्ट्री फार्म की इकॉनमी को काफी प्रभावित कर सकती है।