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हर महीने ₹16 लाख की साड़ी बेचने पर बचते हैं सिर्फ इतने रुपये, सूरत के कारोबारी ने बताई साड़ी इंडस्ट्री के कमाई की सच्चाई!

Published: Fri, 16 Oct 2026 03:00 PM (GMT+05:30)

सूरत के साड़ी कारोबारी उमाशंकर तिवारी ने बताया कि ₹16 लाख की मासिक बिक्री पर भी साड़ी मैन्युफैक्चरिंग में कच्चे ...और पढ़ें

सूरत में क्या है साड़ी इंडस्ट्री का हाल?

सूरत में क्या है साड़ी इंडस्ट्री का हाल?

HighLights

  1. ₹16 लाख की मासिक बिक्री पर ₹1.5-2 लाख बचत।

  2. कच्चे माल, मशीन किस्त, लेबर कॉस्ट में भारी वृद्धि।

  3. सूरत के कारोबारी ने बताई साड़ी उद्योग की सच्चाई।

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई का कारोबार हमेशा से ही सबसे अधिक मुनाफे का बिजनेस माना जाता है। नए-नए बिजनेस शुरू करने वाले लोग भी ट्रेडिंग की बजाय मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ना चाहते हैं। हालांकि बिना मार्केट स्टडी और ग्राउंड रियलिटी को जाने बिना किसी भी कारोबार को सीधे शुरू करना सही नहीं है। कई बार कमाई और वास्तविक मुनाफे की तस्वीर एकदम उलट होती है।

सूरत के साड़ी मैन्युफैक्चरर और सप्लाई कारोबारी उमाशंकर तिवारी ने जागरण बिजनेस से बातचीत के दौरान साड़ी इंडस्ट्री की कमाई और बचत की जानकारी दी है। आइए समझते हैं साड़ी बनाने के कारोबार में कितनी लागत और कमाई है?

सूरत में साड़ी कारोबार का हाल

साड़ियों का समंदर कहे जाने वाले गुजरात का सूरत विश्व विख्यात है। यहां के रिंग रोड, स्टेशन एरिया, सारोली और सहारा दरवाजा जैसे इलाकों में खूब साड़ियां बनाई जाती हैं। हालांकि इन दिनों साड़ी कारोबारियों के सामने कई चुनौतियां है, कारोबारी के मुताबिक रॉ मैटेरिल से लेकर किराया और किस्त से लेकर लेबर कॉस्ट तक का हिसाब करने के बाद वास्तव में बचत सामान्य हो जाती है।

16 लाख के आउटपुट का हिसाब

उमाशंकर तिवारी बताते हैं कि सूरत में उनके पास साड़ी बनाने के 2 कारखाने हैं। वे महीने में औसतन ₹16 लाख की साड़ियां बनाते और सप्लाई करते हैं। उन्होंने बताया कि साड़ियों में इस्तेमाल होने वाले फैब्रिक, जरी, धागे, सितारा और अन्य सजावटी सामग्रियां जैसे जरूरी रॉ मटेरियल सहित डिजाइनिंग कॉस्ट में 30-35 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। लागत बढ़ने प्रोडक्शन कॉस्ट में भारी-भरकम वृद्धि हुई है।

40 फीसदी पैसा रॉ मैटेरियल में चला जात है जो करीब ₹6-7 लाख होता है। इसके बाद 1 मशीन की कीमत लगभग ₹35 लाख के करीब है। उसमें अगर 2 मशीनों की महीने की किस्त हर महीने ₹1 लाख (₹50,000 1 की) होती है। इसके अलावा फैक्ट्री का किराया करीब ₹75,000 और बिजली का बिल करीब ₹30 हजार होता है। इन सब में हर महीने करीब ₹9 लाख का खर्च आता है।

इसके अलावा उनके मिल में 8 लोग काम करते हैं जिन्हें हर महीने ₹30,000 की सैलरी और रहने का इंतजाम करते हैं। जिसमें हर महीने ₹3 लाख तक का खर्च आता है। मजदूरों के अलावा डिजाइनरों को करीब ₹50 हजार देना होता है। इन सब के अलावा 7 फीसदी बट्टा, कमीशन और टैक्स कटने की भी बात बताई है। इन सब खर्चों को काटने के बाद ₹16 लाख के आउपुट में ₹1.5 लाख से ₹2 लाख ही बचत होती है।

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कितने में तैयार होती है साड़ियां?

उन्होंने जागरण बिजनेस को बताया कि सूरत में हर तरह की डिजाइन वाली साड़ियां और लहंगों की कारीगरी होती है। उनकी मिल में ₹10 मीटर से लेकर ₹500 मीटर तक के साड़ी की कारीगरी होती है। इसके अलावा उन्होंने ये भी साफ किया कि फैक्ट्री में साड़ियों की कॉस्ट और आउटपुट कभी निश्चित नहीं होता है। कभी कभी आंकड़ा बहुत अधिक बढ़ जाता है, कभी-कभी व्यापार घाटे में रहता है।