इक्विटी MF से ज्यादा पैसा Gold ETF में आया, जनवरी में लोगों ने 24039 करोड़ रुपये का दांव लगाया; देखें आंकड़े
जनवरी 2026 में भारतीय निवेशकों ने इक्विटी म्यूचुअल फंड की तुलना में गोल्ड ईटीएफ में अधिक निवेश किया। गोल्ड ईटीएफ में ₹24,040 करोड़ का इनफ्लो हुआ, जबकि ...और पढ़ें

नई दिल्ली। 2026 के पहले महीने में भारतीय निवेशकों ने इक्विटी म्यूचुअल फंड से ज्यादा गोल्ड ईटीएफ में लगाया। जनवरी में Gold ETF में ₹24,040 करोड़ का निवेश हुआ, जो दिसंबर में ₹11,647 करोड़ था। यानी इसमें महीने-दर-महीने 100% की बढ़ोतरी हुई है। वहीं, अगर बात करें इक्विटी म्यूचुअल फंड की तो जनवरी 2026 में इसमें 24,029 करोड़ रुपये का निवेश हुआ। इससे गोल्ड ETF इक्विटी-लिंक्ड कैटेगरी में सबसे ज्यादा इनफ्लो वाला सेगमेंट बन गया।
एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया ने मंगलवार को आंकड़े जारी किए। बढ़ते जियोपॉलिटिकल रिस्क के बीच कीमतों में तेजी आने से भारतीय इन्वेस्टर्स ने गोल्ड एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स में खूब पैसा लगाया, और पहली बार इक्विटी फंड्स में फ्लो को पार कर गया।
सोने में तेजी की वजह से बढ़ा गोल्ड ETF में निवेश
पिछले महीने सोना रिकॉर्ड हाई लेवल पर पहुंच गया था जो डॉलर में जनवरी 2024 के लेवल से दोगुना था। यहीं कारण है कि गोल्ड ईटीएफ में लोगों ने खूब पैसा लगाया। गोल्ड ETF को फिजिकल गोल्ड के मुकाबले खरीदना और रखना आसान है और भारत इस मेटल के लिए दुनिया के सबसे बड़े मार्केट में से एक है। इसे आप बड़ी आसानी से कुछ ही मिनट में ब्रोकरेज प्लेटफॉर्म के जरिए खरीद सकते हैं
एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) के चीफ एग्जीक्यूटिव वेंकट चलसानी ने कहा, "जनवरी में हमने मार्केट में बहुत ज्यादा उतार-चढ़ाव देखा, खासकर वेनेजुएला में अमेरिकी सरकार के दखल और नए टैरिफ लगाने की वजह से।"
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भारतीय इक्विटी म्यूचुअल फंड में नेट इनफ्लो महीने-दर-महीने 14.35% घटकर 24,028.59 रह गया। यह लगातार दूसरे महीने गिरावट है। इस बीच, गोल्ड एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड में फ्लो पिछले महीने से दोगुने से ज्यादा बढ़कर 24,039.96 रुपये हो गया, जिससे वे पहली बार इक्विटी फ्लो से थोड़ा आगे निकल गए, AMFI के डेटा से पता चला।
गोल्ड ETF होल्डिंग्स तीन साल के उच्चतम स्तर पर
पिछले हफ्ते कीमतों में गिरावट के बाद भी, दुनिया भर में गोल्ड ETF होल्डिंग्स तीन साल के सबसे ऊंचे लेवल के पास बनी हुई हैं, क्योंकि तेजी के पीछे के कारण जियोपॉलिटिकल रिस्क और सॉवरेन बॉन्ड और करेंसी में कम होता भरोसा शामिल है।
भारत में, इन वैश्विक ताकतों को धातु के गहरे सांस्कृतिक संबंधों और क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धियों की तुलना में स्थानीय इक्विटी के अपेक्षाकृत कमजोर प्रदर्शन से मजबूती मिलती है, जिससे निवेश को और समर्थन मिलता है।
इक्विटी म्यूचुअल फंड में फरवरी 2021 से लगातार हर महीने पैसा आ रहा है, जो सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP), सरकारी सुधारों और सेंट्रल बैंक की सपोर्टिव पॉलिसी की वजह से हुआ है। इस लगातार घरेलू पैसे ने मार्केट को लगातार विदेशी बिकवाली से उबरने में मदद की है और COVID के बाद स्टॉक्स में तेजी लाई है।
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