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    Mutual Fund SIP: क्या आप भी नहीं भर पाए इस महीने की एसआईपी, अब क्या होगा; कितना लगता है चार्ज?

    Updated: Fri, 10 Apr 2026 04:15 PM (IST)

    म्यूचुअल फंड में एसआईपी किस्त छूटने पर बैंक द्वारा जुर्माना लगाया जाता है, जिस पर 18% जीएसटी भी लगता है। विभिन्न बैंकों के शुल्क अलग-अलग होते हैं, जैस ...और पढ़ें

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    SIP Missed: म्यूचुअल फंड निवेशकों के बीच इसलिए भी पॉपुलर है क्योंकि इसमें आप एसआईपी के जरिए किस्तों में निवेश कर सकते हैं। हालांकि कभी-कभी वित्तीय परेशानी के चलते एसआईपी के लिए पैसे ही नहीं बचते। इस स्थिति में आपको क्या करना चाहिए और ऐसी स्थिति का सामना आप आगे कैसे कर सकते हैं? इसके साथ ही जानेंगे कि एसआईपी छूट जाने पर आपको कितना चार्ज और टैक्स देना पड़ता है?

    SIP Missed हो गया, अब क्या होगा?

    म्यूचुअल फंड में मिलने वाले आकर्षक रिटर्न का फायदा तभी मिलता है, जब आप इसमें लंबे समय तक निवेश करते हैं। कभी-कभी ऐसा भी होता है कि किसी वित्तीय संकट के चलते आप एसआईपी की पेमेंट नहीं कर पाते। इस स्थिति में आपके मन में कई सवाल आते हैं कि क्या अब कोई चार्ज देना पड़ेगा, इससे हमारे कुल रिटर्न पर कितना प्रभाव होगा इत्यादि। सबसे पहले हम चार्ज और टैक्स के बारे बात कर लेते हैं।  

    कितना लगेगा चार्ज?

    Angel One से मिली जानकारी के अनुसार अगर बैंक में बैलेंस कम होने की वजह से एसआईपी पेमेंट नहीं हो पाती तो बैंक द्वारा इस पर चार्ज लगाया जाता है। Angel One के मुताबिक एसआईपी पेमेंट बाउंस (SIP Bounce Penalties) होने पर अलग-अलग बैंक अलग-अलग चार्ज वसूलता है। 

    • ICICI और कोटक महिंद्रा बैंक- 500 रुपये चार्ज
    • SBI और पंजाब नेशनल बैंक- 250 रुपये चार्ज
    • HDFC बैंक- 450 रुपये

    कितना लगता है टैक्स?

    चार्ज के साथ ही इस पर 18 फीसदी जीएसटी भी लगाया जाता है। इसे अब एक उदाहरण से समझते हैं।

    मान लीजिए कोई व्यक्ति हर महीने 1000 रुपये की 5 एसआईपी करता है। बैंक प्रत्येक एसआईपी पेमेंट बाउंस होने पर 250 रुपये चार्ज लगाता है। इसके साथ ही उसमें 18 फीसदी टैक्स भी लगता है। तो उसे अगली पेमेंट पर (चार्ज- 5x250=1250) + 225 जीएसटी= 1475 रुपये देने होंगे। इसके साथ ही वे 5000 रुपये की एसआईपी का भुगतान भी करेगा। 

    ऐसा फिर न हो उसके लिए क्या करें?

    सबसे पहले ये कोशिश करें जिस अकाउंट से म्यूचुअल फंड लिंक हो उसमें बैलेंस हमेशा रहें। इसके साथ ही अपने फोन पर रिमाइंडर लगा दें। इसके अलावा आप एसआईपी पेमेंट की डेट अलग-अलग कर सकते हैं। इससे होगा ये कि अगर एक एसआईपी की पेमेंट फेल हो भी जाती है तो आप दूसरी एसआईपी पेमेंट कटने से पहले पैसा जोड़ सकते हैं। 

    (सोर्स- Angel One)

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