Mutual Fund में कैश से भी कर सकते हैं निवेश, जानें क्या कहता है नियम?
म्यूचुअल फंड में कैश में निवेश करना संभव है, खासकर उन लोगों के लिए जिनके पास पैन या बैंक खाता नहीं है, जैसे किसान और छोटे व्यापारी। यह प्रति वित्तीय व ...और पढ़ें

म्यूचुअल फंड आज निवेशकों के बीच काफी पॉपुलर है। क्योंकि इसमें आकर्षित रिटर्न मिल जाता है। हालांकि ये रिटर्न पूरी तरह से शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव पर निर्भर करता है। म्यूचुअल फंड को लेकर अक्सर निवेशक ये सोचते हैं कि इसमें कैश के जरिए पेमेंट नहीं की जा सकती, ये पूरी तरह से गलत है। नियम के अनुसार कुछ लोगों को म्यूचुअल फंड में निवेश को लेकर छूट दी गई है।
कैश के जरिए हो सकती है पेमेंट?
म्यूचुअल फंड में वैसे तो कैश के जरिए निवेश नहीं किया जा सकता। हालांकि कुछ लोगों को इसे लेकर छूट दी गई है। नियम के अनुसार-
जो लोग जो करदाता नहीं हैं और जिनके पास पैन/बैंक खाते नहीं हैं। वे कैश के जरिए भी म्यूचुअल फंड में निवेश कर सकते हैं।
मसलन किसान, छोटे व्यापारी, व्यवसायी, श्रमिक इत्यादि इसमें शामिल हैं।
बस शर्त है कि प्रति वित्तीय वर्ष कैश के जरिए म्यूचुअल फंड में 50,000 रुपये तक निवेश किया जा सकता है।
किस नियम के तहत मिलती है अनुमति?
Prevention of Money Laundering Act, 2002 में इसका उल्लेख है। इसके साथ ही सेबी ने भी अपने एएमएल (Anti Money Laundering) में जारी किए गए सर्कुलर पर ये बात कही है। इसके अलावा इस नियम का AML के रेगुलेशन और गाइडलाइन्स में जिक्र है।
अक्सर लोग पेमेंट के लिए म्यूचुअल फंड में एसआईपी का ऑप्शन चुनते हैं। आइए जानते हैं कि एसआईपी से हमें क्या-क्या फायदे मिलते हैं?
SIP के फायदे
1. लचीलापन
एसआईपी में आपको कई तरह की फ्लेक्सिबिलिटी (Flexibility) मिलती है। जैसे आप अपने अनुसार अवधि चुन सकते हैं। वहीं निवेश की रकम को बढ़ाया जा सकता है। इसके अलावा अगर कोई आर्थिक आपदा आ जाए, तो एसआईपी को बीच में रोक (pause) भी कर सकते हैं।
2. कम्पाउंडिंग का फायदा
एसआईपी में निवेश करने से कम्पाउंडिंग का फायदा भी मिलता है। इसलिए अगर आप लंबे समय के लिए पैसा निवेश कर रहे हैं, तो ही आपको एसआईपी में फायदा मिलता है। आप जितना लंबे समय के लिए निवेश करेंगे, उतना ही ज्यादा कम्पाउंडिंग का फायदा होगा।
3. निवेश की कोई सीमा नहीं
एसआईपी में आप जितना चाहे, उतना निवेश कर सकते हैं। इसमें निवेश करने की कोई सीमा नहीं रखी गई है। हालांकि ये ध्यान रखें की पोर्टफोलियो में डाइवर्सिफिकेशन हो। जिसका मतलब हुआ कि अलग-अलग एसेट क्लास में निवेश किया हो। ताकि आपको शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव का इतना असर ना हो।
(डिस्क्लेमर: यहां म्यूचुअल फंड पर दी गयी जानकारी निवेश की सलाह नहीं है। जागरण बिजनेस निवेश की सलाह नहीं दे रहा है। म्यूचुअल फंड में जोखिम हो सकता है इसलिए निवेश करने से पहले किसी सर्टिफाइड इन्वेस्टमेंट एडवाइजर से परामर्श जरूर करें।)
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